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12.50 लाख की चोरी को 70 हजार का बताना और बिना जांच खात्मा लगाना पड़ा पुलिस को भारी

न्यायालय ने खात्मा आदेश किया वापस, लापरवाह थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को दिए आदेश टीकमगढ़/ओरछा. चोरी के एक मामले में पुलिस को सही रिपोर्ट दर्ज न करना और बिना जांच के ही खात्मा लगाना भारी पड़ गया है। न्यायालय ने पुलिस द्वारा लगाए गए खात्मा आदेश को वापस करने के […]

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ओरछा। पुलिस थाना ओरछा।

ओरछा। पुलिस थाना ओरछा।

न्यायालय ने खात्मा आदेश किया वापस, लापरवाह थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को दिए आदेश

टीकमगढ़/ओरछा. चोरी के एक मामले में पुलिस को सही रिपोर्ट दर्ज न करना और बिना जांच के ही खात्मा लगाना भारी पड़ गया है। न्यायालय ने पुलिस द्वारा लगाए गए खात्मा आदेश को वापस करने के साथ ही लापरवाही ओरछा थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक एवं आईजी सागर को निर्देश दिए है। विदित हो कि अधिकांश चोरियों के मामले में पुलिस इसी प्रकार की लापरवाही करती है। दरअसल ओरछा निवासी अधिवक्ता पूनम आनंद 13 अक्टूबर 2024 को अपनी मां की तबियत खराब होने पर उन्हें दिखाने के लिए जबलपुर गई थी। 16 अक्टूबर 2024 की सुबह 7-8 बजे उनके पड़ौसी बंटी शर्मा ने उन्हें सूचना दी कि उनके घर में चोरी हो गई है। सूचना मिलते ही वह अपनी कार से घर के लिए वापस निकली और बंटी शर्मा ने वीडियो कॉल करके उन्हें घर की िस्थति बताई। साथ ही बंटी ने बताया कि जब तक वह नहीं आएंगी और आवेदन नहीं देगी पुलिस अंदर जाकर जांच नहीं करेगी। इस पर उन्होंने एक आवेदन लिखकर बंटी शर्मा के साथ ही तत्कालीन थाना प्रभारी जगतपाल सिंह को व्हाट्स एप पर भेजा और कार्रवाई करने का निवेदन किया। उन्होंने अपने आवेदन में साफ बताया था कि उनके घर में 12.50 लाख रुपए की चोरी हुई है। इसके बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। वह ओरछा आकर अपनी तबियत खराब होने के बाद भी वह थाने गई तो थाना प्रभारी जगतपाल सिंह ने कहा कि वह उनके भाई के दोस्त और पूरी मदद करेंगे। इस पर उन्होंने पूनम आनंद से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए और 24 घंटे में चोरों का पता लगाने का आश्वासन दिया।

70 हजार के सामान की दर्ज की एफआईआर

पूनम आनंद ने बताया कि अगले दिन जब उन्होंने एफआईआर देखी तो उसमें 70 हजार रुपए की चोरी दर्ज थी। इस पर उन्होंने फिर से आवेदन दिया तो पुलिस वाले उनका मजाक उड़ाने लगे कि आप वकील होकर ऐसी गलती कैसे कर सकती है। साथ ही यह लोग मानसिक रूप से परेशान करते रहे। इस मामले में न तो पुलिस ने घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों से जांच की और न ही पीएसटीएन डाटा से चोरों की तलाश करने का प्रयास किया। साथ ही मामले में खात्मा लगा दिया था।

न्यायालय ने कहा कि यह न्याय प्रशासन पर गंभीर सवाल

पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर ओरछा न्यायालय के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट उमेश भगवती ने गंभीर सवाल उठाते हुए इसे न्याय प्रशासन पर गंभीर आघात बताया है। साथ ही कहा कि यदि पुलिस चोरी जैसे प्रकरण में गंभीरता से विवेचना करती तो इसका खुलासा किया जा सकता था। ऐसे में न्यायाधीश ने पुलिस द्वारा लगाए गए खात्मा के आदेश को वापस करने के साथ ही तत्कालीन थाना प्रभारी जगतपाल सिंह के खिलाफ पुलिस महानिदेशक एवं आईजी सागर को कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।