
कई जल जीवन मिशन योजना और हैंडपंप पड़े बंद
कई गांव की योजनाएं पड़ी बंद, सुधार का नहीं कि या जा रहा प्रयास
टीकमगढ़.जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते पेयजल की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। आंकड़े बाजी का खेल और बढ़ती गर्मी के साथ हैंडपंपों का पानी भी खत्म होता जा रहा है। जिसका उदाहरण कई गांव देखने को मिल जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लोग भीषण गर्मी में पीने के पानी को लेकर जद्दो जहद कर रहे हैं। उसके बाद भी विभाग की रिपोर्ट कुछ अलग ही दावा कर रही है।
विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि जिले में ७२०१ हैंडपंप खनन है और उसमें से ६९७३ चालू है। विभिन्न कारणों से २२८ हैंडपंप बंद है, लेकिन ग्रामीण की जमीनी रिपोर्ट विभाग के दावे से अलग है। सैंकड़ों गांव ऐसे है, जहां पर पेयजल के लिए ग्रामीण रतजगा कर रहे है। दर्जनों की संख्या में खनन हुए हैंडपंप बंद है। जिसका उदाहरण टीकमगढ़ जनपद पंचायत का अजनौर गांव और हनुमानसागर, बल्देवगढ़ ब्लॉक का गांव बनयानी और सिजौरा। जतारा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत किटाखेरा के गांधीग्राम गांव का है। ऐसा एक गांव ही नहीं सैंकड़ों की संख्या में पेयजल की समस्या से जूझ रहे है।
६२५ है जिले में राजस्व गांव
जिले में ६२५ राजस्व गांव है। उन गांव में ४९० जल जीवन मिशन के तहत योजनाएं स्वीकृत की गई है। उसमें से ४ योजनाएं स्वीकृति के लिए संबंधित विभाग के पास पड़ी है। इनमें से १०४ जल जीवन मिशन की योजनाएं पूर्ण हो गई है। जो ८४६६३ परिवारों को पानी दे रही है। ३६२ योजना में से २५० योजना की उच्च स्तरीय टंकी का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन हकीकत का पता लगाया जाए तो कई गांव की योजनाएं बंद पड़ी है। जिसमें सिजौरा गांव की योजना छह साल से बंद पड़ी है।
इन गांव की बंद पड़ी योजनाएं
बल्देवगढ़ जनपद पंचायत की नौरपारा, मनपसार, चंदेरी, चिंनगुवां, देवरदा, कु डीला, रमपुरा, सेवार, मलगुवां, बडेरा, चंदपुरा, गनेशपुरा, वनपुरा सापौन, लखेरी, टीकमगढ़ जनपद पंचायत की दरी, समर्रा, जतारा जनपद पंचायत की मस्तापुर, दरगांय कलां, दिगौड़ा के साथ अन्य गांव की योजनाएं बंद है। जो योजनाएं चालू है, वहां पर तीन से चार दिनों में पानी छोड़ा जा रहा है।
इस स्थानों पर भारी जल संकट
वर्मामांझ, बरेठी खास, हथेरी मस्तापुर, दरगांय खुर्द, कौडिया, नादिया गौर के साथ के साथ अन्य गांव में वर्षों से पेयजल संकट है। लेकिन विभाग द्वारा पेयजल संकट की समस्या को पीएचई विभाग दूर नहीं कर पा रहा है। वहीं जिले में २० योजनाएं ऐसी है। जिनका कार्य सफल नहीं हो पाया है। वहां पर हैंडपंपों के माध्यम से पेयजल की पूर्ति की जा रही है। वहीं सिजौरा निवासी धूराम लोधी, लल्लू रजक, रवि अहिरवार,, मुकेश प्रजापति, राजेंद्र सेन, फूलचंद्र वंशकार, रमेश कुशवाहा ने बताया कि गांव में छह साल पहले जल जीवन मिशन की योजना शुरू हुई थी, तीन महीने में ही बंद हो गई थी और आज भी बंद पड़ी है। बनयानी सरपंच बृजेंद्र सिंह ने बताया कि पंचायत में १५ हैंडपंप है, उनमें से दो चालू और सभी बंद पड़े है।
फैक्ट फाइल
६२५ जिले में राजस्व गांव
४९० स्वीकृत जल जीवन योजना स्वीकृत
२० योजनाएं असफल
१०४ योजनाएं पूर्ण
१८ नवीन हैंडपंप
३१ सिंगल मोटर पंप
७० नल जल योजना विकसित
७२०१ कुल जिले में हैंडपंप
६९७३ कुल जिले में चालू हैंडपंप
२२८ जिले में बंद हैंडपंप
२२ सुधार योग हैंडपंप
१५८ अनुपयोगी हैंडपंप
४८ जल स्तर कम हैंडपंप
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था हाल में ठीक चल रही है। जहां की योजनाएं बंद हो गई है, वहां का जल स्त्रोत कमजोर होगा। अगर ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की स्थिति खराब है तो विभाग द्वारा ग्रामीणों के लिए पेयजल पूर्ति की जाएगी।
अनिल लगरया, ईई पीएचई विभाग टीकमगढ़।
Published on:
29 May 2024 07:49 pm
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