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स्थानांतरण होने के बाद भी नवीन स्थानों पर दो महीना २० दिन में नहीं पहुंच वनपाल, वनरक्षक

वनमंडल टीकमगढ़ ने ४ अक्टूबर को वनपाल और वनरक्षकों की स्थानांतरण सूची जारी की थी। ढाई महीने बाद स्थानांतरण आदेश का पालन कर्मचारियों द्वारा नहीं किया गया है। जबकि तीन दिवस, एक हफ्ता या फिर १५ दिवस में नवीन पदस्थापना पर जाना अनिवार्य है।

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 Employees posted on flying squad and beats are handling the charge of the forest office

Employees posted on flying squad and beats are handling the charge of the forest office


टीकमगढ़. वनमंडल टीकमगढ़ ने ४ अक्टूबर को वनपाल और वनरक्षकों की स्थानांतरण सूची जारी की थी। ढाई महीने बाद स्थानांतरण आदेश का पालन कर्मचारियों द्वारा नहीं किया गया है। जबकि तीन दिवस, एक हफ्ता या फिर १५ दिवस में नवीन पदस्थापना पर जाना अनिवार्य है। वहीं बीटों और उडनदस्तों पर तैनात रहने वाले वनरक्षक, वनपालों को वन मंडल कार्यालय में व्यय शाखा, राजस्व शाखा और स्थापना शाखा का प्रभार दिए गए है। जहां वन सरंक्षक के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
वन मंडल कार्यालय में अंधेर नगरी चौपट राजा... की तरह कार्य चल रहा है। आरोपों से घिरे कई कर्मचारियों को महत्वपूर्ण प्रभार दिए है। बीटों पर तैनात वनरक्षक और वनपालों द्वारा वन्यप्रणियों और नवीन पेड, पौधों, वृक्षों की सुरक्षा की जगह जिला के मुख्य कार्यालय में आधा दर्जन से अधिक वनरक्षक और वनपालों को व्यव शाखा, राजस्व शाखा और स्थापना शाखा का प्रभार दिया गया है। जबकि अनेक बीटें खाली पड़ी है। जहां का जंगल में लगे वृक्ष उजड़ गए है, जिसमें वन्य प्राणी दिखाई नहीं दे रहे है। उसके बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही है।
४ अक्टूबर को यह जारी हुई थी स्थानांतरण सूची
मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय बल्लभ भवन भोपाल के पत्र क्रमांक एफ ६-१/२०२२/एफ/९ भोपाल दिनांक १६ सितम्बर द्वारा जारी राजस्व एवं जिला स्तर पर अधिकारियों, कर्मचारियों की स्थानांतरण वर्ष २०२२-२३ के तहत वन मंडल टीकमगढ़ क्षेत्र में पदस्थ वनपालों, वनरक्षकों के स्थानांतरण प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर जिले के वन्य प्राणियों और पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए ४ अक्टूबर को मंडलाधिकारी द्वारा १७ वनरक्षक और वनपालों की स्थानांतरण सूची जारी हुुई थी। उसमें कुछ तो स्थगन आदेश ले आए और कुछ नवीन स्थान पर पदस्थ हो गए और कुछ मनमानी के कारण उसी स्थान पर जमे हुए है।
उनकी यह है स्थिति
वन्य प्राणियों और पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए वनरक्षक और वनपालों की स्थानांतरण सूची में से तीन वन रक्षकों का यथावत, उसमें से एक वनरक्षक और एक वनपाल ने स्थगन ले लिया और सात ने नवीन पदस्थापना ले ली है। दो महीना बीस दिन बाद दो वनपाल और चार वनरक्षकों ने स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया है। उसके बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है।

वनरक्षक बीटों पर तैनात करने अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने दिया था आदेश
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने २७ सितम्बर २०१० को आदेश जारी करते हुए कहा था कि वन मंडल कार्यालयों में तैनात वन रक्षकों को वन्य प्राणिायों और पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए बीटों और उडऩ दस्तों पर तैनात किया जाए। उनसे कार्यालयों के कार्य नहीं कराया जाए। लेकिन वनमंडल कार्यालय में आठ वनरक्षकों को तैनात किया गया है, जो व्यव शाखा, राजस्व शाखा और स्थापना शाखा का प्रभार दि संभाल रहे है। जबकि जिले में दर्जनों बीट खाली पड़ी है।
वन पर अतिक्रमण और उजडऩे लगे जंगल
हनुमानसागर के साथ मोहनगढ़, विजरावन, दिगौड़ा, नादिया और वनगायं के साथ अन्य क्षेत्रों जंगलों को काटकर खेती के लिए अतिक्रमण किया जा रहा है। जिनकी सुरक्षा का अभाव बना हुआ है। जंगलों के वृक्षों पर लगातार कुल्हाड़ी चल रही है। जहां के बीट प्रभारियों और डिप्टी रेंजरों द्वारा रोकने का कार्य नहीं किया जा रहा है।
इनका कहना
यह मामला गंभीर है कही दूसरी जगह पदस्थ और टीकमगढ़ वन मंडल कार्यालय में काम कर रहे है। जो आरोप के घेरे में है उनको दिखवाता हूं। वनरक्षक कार्यालय में पदस्थ है और स्थानांतरण सूची का पालन नहीं कर रहे तो जांच करवाता हूं। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
संजीव झां, सीसीएफ छतरपुऱ।

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