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विश्व पटल पर चमकेगी यहां की पीतल की कारीगरी, मोदी सरकार ने सीडीपी में किया चयन

सिंगल कास्टिंग के लिए देश में अलग पहचान बनाने वाले यहां की कारीगरों के हुनर को देखते हुए केन्द्र सरकार ने इसे सीडीपी योजना में शामिल किया है।

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Tikamgarh will become the hub of metal craft

Tikamgarh will become the hub of metal craft

अनिल रावत, टीकमगढ़. टीकमगढ़ की पीतल की कारीगरी अब विश्व पटल पर चमेगी। सिंगल कास्टिंग के लिए देश में अलग पहचान बनाने वाले यहां की कारीगरों के हुनर को देखते हुए केन्द्र सरकार ने इसे सीडीपी योजना में शामिल किया है। अब जिले में अंतर्राष्ट्रीय मानक की पीतल की मूर्तियां तैयार, उन्हें वैश्विक बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। यह प्रदेश का पहला सीडीपी केन्द्र होगा। जल्द ही जिला मेटल क्राफ्ट का हब बनेगा।
पीतल की अद्भुत कारीगरी के लिए पहचान बनाने वाले टीकमगढ़ जिले को केन्द्र सरकार ने सीडीपी (कलस्टर विकास कार्यक्रम) में शामिल किया है। केन्द्र सरकार के निर्देशन पर लघु उद्योग विकास निगम के अधिकारियों ने यहां पर जमीन पर चयन कर लिया है। जिला प्रशासन ने भी इसके लिए ग्राम तखा में 12 हैक्टेयर जमीन आवंटित कर दी है। लघु उद्योग विकास निगम यहां पर तीन माह के भीतर कलस्टर विकसित करके देगा। इसके लिए केन्द्र सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 10 करोड़ की राशि भी आवंटित कर दी है। इसमें प्रदेश सरकार भी 40 फीसदी राशि प्रदान करेगी।

मिलेगा वैश्विक बाजार: उद्योग विभाग के महाप्रबंधक राजशेखर पाण्डे ने बताया कि यह प्रदेश का पहला कस्टर होगा। तखा में विकसित होने वाले कलस्टर में कारीगरों को पूर्ण रूप से विकसित जमीन प्रदान की जाएगी। यहां पर एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इस सेंटर में कारीगरों द्वारा बनाए जाने वाली पीतल के उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय मानक पर निर्मित कराने में मदद की जाएगी। इसके साथ ही सभी कारीगरों की बेव साईट और पोर्टल बनाए जाएंगे। ताकि यही से इन्हें वैश्विक बाजार उपलब्ध हो सके।
यह है मूर्तिकला की खासियत: पीलत की कारीगरी तो देश में अनेक स्थानों पर होती है, लेकिन यहां की मर्तिकलां सबसे अधिक है। यहां पर मूर्तिकार सिंगल कास्टिंग करते है। सिंगल कास्टिंग में मूर्तिकार, जिस सांचे से एक मूर्ति बनाते है, वह मूर्ति बनने के साथ ही टूट जाता है। यदि कारीगर को वैसी ही दूसरी मूर्ति बनानी है तो सांचे के लिए उसे फिर से उतनी ही मेहनत करनी होती है। इसलिए जिले की पीलत की मूर्तियों की पूरे देश में अलग ही पहचान है।
राष्ट्रपति दे चुके पुरूस्कार: जिले की पीतल की मूर्तिकलां को प्रदेश के साथ ही देश में भी सम्मानित किया जा चुका है। यहां के पीतल के कारीगर हरीश कुमार सोनी एवं धनीराम सोनी को राष्ट्रपति द्वारा नेशनल अवार्ड भी दिया जा चुका है। वहीं रमेश कुमार सोनी को भी इस कला में राज्य स्तरीय पुरूस्कार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्राप्त कर चुके है। इनके यहां पर पैतृक रूप से यह काम किया जा रहा है।
कहते है अधिकारी: केन्द्र सरकार द्वारा पीतल कारीगरी के लिए जिले का चयन किया जाना बड़ी बात है। कलेक्टर ने इसके लिए 12 हैक्टेयर जमीन उपलब्ध करा दी है। तीन माह के अंदर इसे विकसित कर लिया जाएगा। केन्द्र सरकार से 10 करोड़ की राशि प्राप्त हो चुकी है। यहां के मेटल क्राफ्ट को अब वैश्विक पहचान मिलेगी।- राजशेखर पाण्डे, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र।

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