
टीकमगढ़. मकर संक्रांति त्योहार को लेकर बाजार में पतंगों की दुकानें सजी दिखाई देने लगी है। इन दुकानों पर पतंगों के लिए बच्चों की चहल पहल बनी है। रंगबिरंगी और विभिन्न प्रकार, आकार की पतंगे बच्चों से लेकर बड़ो हो लुभा रही है। सबसे अधिक मटका, डोरेमोन, तिरंगा, रॉकेट, तीन ठड्ढा और कार्टून के साथ २०२५ की पतंगों की खरीदी अधिक हो रही है। बाजार में ५ रुपए से लेकर १००० रुपए तक को लोग खरीद रहे है। झांसी रोड निवासी नीरज अहिरवार और मोटे का मोहल्ला निवासी लकी अली ने बताया कि नगर में एक दर्जन से अधिक पतंगों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। इन दुकानों पर रंगबिरंगी और विभिन्न आकार वाली चौकोर तो कहीं लंबी तो कहीं पूंछ वाली पतंग मिल रही है। सालभर में लगभग १५ लाख रुपए से अधिक का कारोबार होता है। जिसमें से ७० प्रतिशत सिर्फ मकर संक्रांति पर होता है। पतंग को खुशी,आजादी और शुभता का संकेत माना जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण इस समय सूर्य की किरणें सेहत के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इसी कारण खुले मैदान में जाकर पतंग उड़ान स्वास्थ्य के लिए भी फ ायदेमंद होता है। शहर में पतंग उड़ाने के शौकीनों की कमी नहीं है। १००० रुपए तक की बिक रही पतंग दुकानदार कृष्णा तिवारी ने बताया कि पहले आयताकार पतंगों का निर्माण होता था, लेकिन हर वर्ष ट्रेंड बदल रहा है। हमारे पास ५ रुपए से लेकर ५० रुपए तक की पतंग है। बाजार मोटे के मोहल्ला में ५ रुपए से लेकर ५० रुपए, १०० रुपए, २०० रुपए, ५०० रुपए, ८०० रुपए और १००० रुपए तक की पतंग बिक रही है। इन पतंगों में तीन इंच से लेकर ६ फीट लंबी पतंग है। कई लोगों में बड़ी पतंग उड़ाने का शौक होता है। वहीं अब चाइनीज मांझा पूरी तरह से बंद है। मांझे या कॉटन के धागे का ही उपयोग हो रहा है। स्वास्थ्य के लिए भी फ ायदेमंद है पतंग उड़ाना पंडित रामस्वरुप पटैरिया ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने मकर संक्रांति पर सबसे पहले पतंग उड़ाई थी। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। इस दिन सूर्य की किरणें शरीर के लिए फ ायदेमंद मानी जाती है। पतंग उड़ाने से शरीर में ऊर्जा आती है और विटामिन डी की कमी पूरी होती है। पतंग उड़ाने से मांसपेशियां टोन अप होती है और आंखों पर भी इसका अच्छा असर पड़ता है। पतंग उड़ाने से मन एकाग्र होता है और शरीर और प्रकृति का संबंध बढ़ता है। ये सावधानियां रखें या दुकानदार का कहना था कि पतंग की डोर देशी मांडो की रखे। चाइनीज मांझे का उपयोग न करे। बिना मुंडेर की छत या बिजली के तारों के आसपास पतंग न उड़ाएं। सडक़ या रेल पटरी पर खड़े होकर पतंग न उड़ाएं। पतंग उड़ाते समय ऊंगली में टेप या बेडेड का उपयोग करें। पतंग कटने के बाद समय सडक़ पर न जाएं। इनका कहना बचपन में खूब पतंगे उडाई, पतंगों को आसमान में पहुंचाने में माहिर थे। इससे अन्य प्रतियोगी परेशान रहते थे। अब समय बदल गया है। गर्मियों की छुट्टियों की जगह मकर संक्रांति पर ही पतंगों को उडाते है। मटका पतंग २०० रुपए की मिल रही है। देवेंद्र सिंह परमार, ग्राहक टीकमगढ़। हमारे यहां डोरेमोन पतंग १००० रुपए, पैरासूट पतंग ८०० रुपए, मटका और तिरंगा पतंग २०० रुपए की बेची जा रही है। रोज सुबह से शाम एक हजार से अधिक पतंगें बिक रही है। विमल कुमार राजपूत, दुकानदार मोटे का मोहल्ला। सबसे अधिक मटका और तिरंगा पतंग बिक रही है। इनके दाम ५० रुपए से लेकर १०० रुपए तक है। तिरंग पतंग को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं फेंके। उन्हें उठाकर सुरक्षित घर पर रख ले। समसुद्दीन खान, दुकानदार। मकर संक्राति का त्योहार सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर मनाते है। पतंग उडाई जाती है, उसके बीच जो भी पतंग आती है उसे काट देते है। लेकिन लेकिन रिस्तों पर कोई असर नहीं पड़ता था। इससे विश्वास भी बढता है। टिंकू साहू, रौरईयां रोड टीकमगढ़।
तिरंगा, डोरेमोन, पैरासूट और मटका पतंगों की बड़ी मांग, दुकानों पर बच्चों की दिख रही चहल पहल
टीकमगढ़. मकर संक्रांति त्योहार को लेकर बाजार में पतंगों की दुकानें सजी दिखाई देने लगी है। इन दुकानों पर पतंगों के लिए बच्चों की चहल पहल बनी है। रंगबिरंगी और विभिन्न प्रकार, आकार की पतंगे बच्चों से लेकर बड़ो हो लुभा रही है। सबसे अधिक मटका, डोरेमोन, तिरंगा, रॉकेट, तीन ठड्ढा और कार्टून के साथ २०२५ की पतंगों की खरीदी अधिक हो रही है। बाजार में ५ रुपए से लेकर १००० रुपए तक को लोग खरीद रहे है।
झांसी रोड निवासी नीरज अहिरवार और मोटे का मोहल्ला निवासी लकी अली ने बताया कि नगर में एक दर्जन से अधिक पतंगों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। इन दुकानों पर रंगबिरंगी और विभिन्न आकार वाली चौकोर तो कहीं लंबी तो कहीं पूंछ वाली पतंग मिल रही है। सालभर में लगभग १५ लाख रुपए से अधिक का कारोबार होता है। जिसमें से ७० प्रतिशत सिर्फ मकर संक्रांति पर होता है। पतंग को खुशी,आजादी और शुभता का संकेत माना जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण इस समय सूर्य की किरणें सेहत के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इसी कारण खुले मैदान में जाकर पतंग उड़ान स्वास्थ्य के लिए भी फ ायदेमंद होता है। शहर में पतंग उड़ाने के शौकीनों की कमी नहीं है।
१००० रुपए तक की बिक रही पतंग
दुकानदार कृष्णा तिवारी ने बताया कि पहले आयताकार पतंगों का निर्माण होता था, लेकिन हर वर्ष ट्रेंड बदल रहा है। हमारे पास ५ रुपए से लेकर ५० रुपए तक की पतंग है। बाजार मोटे के मोहल्ला में ५ रुपए से लेकर ५० रुपए, १०० रुपए, २०० रुपए, ५०० रुपए, ८०० रुपए और १००० रुपए तक की पतंग बिक रही है। इन पतंगों में तीन इंच से लेकर ६ फीट लंबी पतंग है। कई लोगों में बड़ी पतंग उड़ाने का शौक होता है। वहीं अब चाइनीज मांझा पूरी तरह से बंद है। मांझे या कॉटन के धागे का ही उपयोग हो रहा है।
स्वास्थ्य के लिए भी फ ायदेमंद है पतंग उड़ाना
पंडित रामस्वरुप पटैरिया ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने मकर संक्रांति पर सबसे पहले पतंग उड़ाई थी। मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। इस दिन सूर्य की किरणें शरीर के लिए फ ायदेमंद मानी जाती है। पतंग उड़ाने से शरीर में ऊर्जा आती है और विटामिन डी की कमी पूरी होती है। पतंग उड़ाने से मांसपेशियां टोन अप होती है और आंखों पर भी इसका अच्छा असर पड़ता है। पतंग उड़ाने से मन एकाग्र होता है और शरीर और प्रकृति का संबंध बढ़ता है।
ये सावधानियां रखें या
दुकानदार का कहना था कि पतंग की डोर देशी मांडो की रखे। चाइनीज मांझे का उपयोग न करे। बिना मुंडेर की छत या बिजली के तारों के आसपास पतंग न उड़ाएं। सडक़ या रेल पटरी पर खड़े होकर पतंग न उड़ाएं। पतंग उड़ाते समय ऊंगली में टेप या बेडेड का उपयोग करें। पतंग कटने के बाद समय सडक़ पर न जाएं।
इनका कहना
बचपन में खूब पतंगे उडाई, पतंगों को आसमान में पहुंचाने में माहिर थे। इससे अन्य प्रतियोगी परेशान रहते थे। अब समय बदल गया है। गर्मियों की छुट्टियों की जगह मकर संक्रांति पर ही पतंगों को उडाते है। मटका पतंग २०० रुपए की मिल रही है।
देवेंद्र सिंह परमार, ग्राहक टीकमगढ़।
हमारे यहां डोरेमोन पतंग १००० रुपए, पैरासूट पतंग ८०० रुपए, मटका और तिरंगा पतंग २०० रुपए की बेची जा रही है। रोज सुबह से शाम एक हजार से अधिक पतंगें बिक रही है।
विमल कुमार राजपूत, दुकानदार मोटे का मोहल्ला।
सबसे अधिक मटका और तिरंगा पतंग बिक रही है। इनके दाम ५० रुपए से लेकर १०० रुपए तक है। तिरंग पतंग को सार्वजनिक स्थानों पर नहीं फेंके। उन्हें उठाकर सुरक्षित घर पर रख ले।
समसुद्दीन खान, दुकानदार।
मकर संक्राति का त्योहार सभी धर्मों के लोग मिलजुलकर मनाते है। पतंग उडाई जाती है, उसके बीच जो भी पतंग आती है उसे काट देते है। लेकिन लेकिन रिस्तों पर कोई असर नहीं पड़ता था। इससे विश्वास भी बढता है।
टिंकू साहू, रौरईयां रोड टीकमगढ़।
Published on:
13 Jan 2025 12:10 pm
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