
Madhya Pradesh Labor Union gave a memorandum to solve the problem
टीकमगढ़. जतारा आशा कार्यकर्ताओं को वर्ष २०२० के बाद कार्यों का भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान की मांग को लेकर मजदूर संघ और मप्र आशा संघ ने कलक्टर को ज्ञापन दिया है।
कलक्टर को दिए ज्ञापन में राघवेंद्र राजपूत और संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि जतारा नगर में आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष २०१८ में की गई थी। उन्होंने वर्ष २०२० तक कोरोना काल की महामारी में कार्य किया था। उसके बाद भी इन्हें बिना किसी निरस्ती आदेश के सेवाओं के बदले आने वाले भुगतान को रोक दिया गया है। जिसके करण दो वर्ष हो गए है और मानदेय नहीं दिया गया है, लेकिन काम लगातार लिया जा रहा है। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। स्थाई नियुक्ति के लिए अधिकारियों द्वारा छह महीनों से आश्वासन दिया जा रहा है। अधिकारियों से मामले में चर्चा की जाती है तो उनका कहना होता है कि इनकी नियुक्ति गलत तरीके से की गई है। पीडि़तों का कहना था कि जब नियुक्ति गलत तरीके से की गई तो मानदेय तो स्वास्थ्य विभाग से लगातार वर्ष २०२० तक किया गया है। जिस अधिकारी द्वारा अवैध तरीके से नियुक्ति की गई है, उन अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई ही नहीं की गई है। आशा कार्यकर्ता रानी दुबे का कहना था कि वर्ष २०२० मानदेय नहीं दिया जा रहा है। भुगतान की बात की जाती है तो कहते है कि पॉर्टल पर नाम नहीं है। कोरोना काल में कराए गए काम का भी भुगतान भी नहीं किया गया है।
इनका कहना
जिन आशा कार्यकर्ताओं ने जो आवेदन दिया है यह जतारा नगर की आशा कार्यकर्ता है। वर्ष २०१८ में जतारा बीएमओ और बीसीएम द्वारा नियुक्त करके कार्य करने के लिए आदेशित किया गया था। वर्ष २०१९ के छहवें महीने में उन्हें हटा दिया गया था। इसकी जानकारी मप्र शासन भोपाल को मिली, उन्होंने संबंंधित नियुक्त कर्ताओं पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। शासन के निर्देश थे कि नगर में ५० हजार से अधिक संख्या और आदिवासी क्षेत्रों में नियुक्ति करनी थी, लेकिन बीएमओ और बीसीएम द्वारा गलत तरीके से नियुक्ति की गई है। मामला सामने आने पर उन्हें हटा दिया गया है। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी।
डॉ पीके महौर, सीएमएचओ टीकमगढ़।
Published on:
29 Mar 2023 08:13 pm
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