
Many miracles seen
टीकमगढ़. पृथ्वीपुर नगर के कोतवाल मोहल्ले में ५०० वर्ष पहले राजशाही दौर यहां जंगल हुआ करता था। वहां पर एक गाय प्रतिदिन दूध देने आती थी, फिर वहीं भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग प्रकट हुए। उसके बाद राजाओं को सूचना पर नगर के तिवारी परिवार को पूजा अर्चना के लिए चयन किया गया था। जब से अब तक शिवलिंग का आकार अब बड़ा हो गया है। यहां पर तीस त्योहारों के साथ अन्य धार्मिक कार्यक्रमों पर भण्डारा और लोग एकत्रित होते है। जहां पर भगवान भोलेनाथ कई प्रकार के चमत्कार दिखाते है।
पुजारी अंकित तिवारी ने बताया कि यहां पर कई पीढियां पूजा कर चुकी है। नगर के कोतवाल मोहल्ले में राजा महाराजा के दौर में घना जंगल हुआ करता था। चरवाहे अपनी गायों और बकरियों को लेकर जंगल में आते थे। उसी दौरान एक चमत्कारिक गाय आती थी और कोतवाल मोहल्ले नाम के जंगल में रुक जाती थी। अपना दूध निकालकर वापस चली जाती थी। उसकी जानकारी चरवाहों को मिली। उन्होंने ग्रामीणों को सूचना पर बुलाया, फिर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना राजाओं के आदेश पर की जाने लगी। जब से आज तक एक ही परिवार पूजा अर्चना करता आ रहा है।
भगवान भोलेनाथ को दूध पिलाने आती थी गाय
भगवान भोलेनाथ के भक्तों का कहना था कि पृथ्वीपुर नगर बसा हुआ है। वहां पर ५०० वर्ष पहले जंगल हुआ करता था। यहां पर क्षेत्र के चरवाहे जानवरों को लेकर आते थे। उसी दौरान एक गाय सामने आ जाती थी और वह जंगल के एक स्थान पर चली जाती थी। जहां पर उसका दूध अपने आप निकलता था। यह देखते-देखते महीनों गुजर गए। चरवाहों ने मामले की सूचना ग्रामीणों और राजा को दी। उसके बाद गांव के लोग एकत्रित हुए। उन्होंने वहां की खुदाई शुरु की। जहां पर एक छोटी सी शिवलिंग मिली। उसके बाद वहां की पूजा अर्चना शुरु कर दी।
कई प्रकार के देखे गए चमत्कार
भक्तों का कहना था कि कोतवाल सरकार नगर की रक्षा करते आए है। कई प्रकार की समस्याओं और आपदाओं से बचाते है। वहां पर एक लोटा जल अर्पण करने के बाद जानवरों और लोगों के रोग खत्म हो जाते है। भक्तों का कहना था कि यहां पर क्षेत्र के लोगों द्वारा धार्मिक कार्यक्रमों के साथ अभिषेक और भण्डारा आयोजित किए जाते है। जहां पर श्रृद्धालुओंं की मनोकामनाएं भी पूर्ण हो रही है।
भगवान का बढ़ रहा आकार
अशोक रजक और रमाकांत रजक का कहना था कि कोतवाल सरकार का आकार पहले अधिक बढ़ गया है। पुजारी बताते है कि जब भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग प्रकट हुई थी तो उनका आकार छोटा था। लेकिन अब उनका आकार बढ़ा हो गया है। सावन और मकर संक्राति पर वहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है।
Published on:
07 Aug 2022 07:39 pm
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