एसडीएम ने जांच के बाद दिया था प्रतिवेदन, उठ रहे सवाल
टीकमगढ़. एसडीएम के जांच प्रतिवेदन के बाद खनिज विभाग ने क्रशर संचालक को 18 करोड़ रुपए के अवैध खनन करने का नोटिस जारी किया है। खनिज विभाग द्वारा यह राशि जमा करने क्रशर बंद करने को कहा गया है, लेकिन इस मामले में क्रशर संचालक एवं पट्टाधारक ने उलटे राजस्व विभाग की जांच पर सवाल खड़े किए है।
खनिज विभाग द्वारा क्रशर संचालक अंशुल खरे को अवैध खनन का नोटिस जारी किया गया है। खनिज विभाग द्वारा जारी नोटिस में बताया गया है कि एसडीएम सीपी पटेल, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों द्वारा उनके द्वारा श्रीनगर भाटा में पट्टे पर ली गई खसरा नंबर 236/1 में अवैध खनन किया गया है। यहां पर रकवा 1.400 हेक्टेयर पर 40 फीट गहराई का खनिज खोदा गया है। ऐसे में इसका पूरा मूल्यांकन करने के बाद एसडीएम द्वारा उनके द्वारा कुल 18 करोड़ रुपए से अधिक का खनन करने की बात कही गई है।
नोटिस में बताया गया है कि यहां पर खनन किए गए पत्थर की रॉल्यटी 6027950 का 15 गुना 9 करोड़ 4 लाख 19 हजार एवं इसके ही बराबर पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि जमा करते हुए कुल 18 करोड़ 8 लाख रुपए खनिज विभाग में जमा कराने को कहा गया है। इसके साथ ही क्रशर को बंद करने के लिए भी आदेश दिया गया है। खनिज विभाग के इस आदेश को लेकर तमाम क्रशर संचालकों के साथ ही विभाग में भी चर्चाएं चल रही है। इस मामले में खनिज अधिकारी के साथ ही कोई भी बात करने को तैयार नहीं है। इन्हें फोन लगाने पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है।
वर्तमान का नहीं खनन
खनिज विभाग द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में खुद अधिकारी यह मान रहे है कि यह खनन वर्तमान का नही है। जारी नोटिस में स्पष्ट बताया गया है कि खसरा नंबर 236/1 के रकवा 1.400 में जो 40 फीट गहरा खनन किया गया है, वह वर्तमान का नहीं दिख रहा है। ऐसे में इस नोटिस को लेकर भी लोग सवाल कर रहे है। कि एक ओर तो इस खनन को वर्तमान का नहीं बताया जा रहा है और दूसरा दो माह पूर्व ही काम की अनुमति मिलने वाले क्रशर संचालक को नोटिस जारी किया जा रहा है। ऐसे में अब अधिकारी भी जवाब देने से बच रहे है। इस माले में खनिज अधिकारी एसजेड अली एवं एसडीएम सीपी पटेल को फोन लगाया तो उनसे बात नहीं हो सकी है।
2 माह पूर्व हुई स्वीकृति
इनती बड़ी मात्रा में खनिज का अवैध खनन करने के मामले में पट्टाधारक अंशुल खरे का कहना है कि यह नोटिस उन्हें शनिवार को मिला है। उनका कहना है कि तमाम अनुमतियों के बाद उन्हें दो माह पूर्व ही कलेक्टर द्वारा भूमि प्रवेश की अनुमति दी गई। अब दो माह के अंदर कितना खनन किया जा सकता है कि यह पढ़े-लिखे लोग समझ सकते है। उन्होंने इस कार्रवाई को राजनैतिक द्वेष से प्रेरित बताया है।