
Mining the sand from the quarries
टीकमगढ़..बुंदेलखंड की पहचान सूखाग्रस्त क्षेत्र के साथ ही बदहाली के नाम पर होती है। ऊंचे ऊंचे पहाडो वाले क्षेत्र को अब खनन माफिया की नजर लग गई है। जीवनदायिनी नदियों के घाट जंहा कमाउ हो चले है तो मिट्टी से रेत बनाने का काम भी जोरो पर है। पहाडों को छलनी करते हुए जमकर अवैध खनन किया जा रहा है,लेकिन मजाल है कि प्रशासन कोई बडी कार्रवाई कर पाए। प्रदेश में अवैध रेत खनन को लेकर भाजपा पर हमला करने वाली कांग्रेस की सरकार अब प्रदेश में है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री सरकार गठन के बाद से ही अवैध रेत पर कार्रवाई की बात कर रहे है,लेकिन टीकमगढ प्रशासन के कान में ज भी नही रेंग रही है। इस दौरान कई बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नही की जा रही है।क्षेत्र में सक्रिय खनन माफिया अब पहाड़ों का सीना छलनी करने लगा है। प्रशासन की उदासीनता से भूमाफिया पहाडिय़ों को खोदकर उसकी मिट्टी बेचने में लगे हैं। हालात यही रहे तो कई पहाडिय़ां विलुप्त हो जाएंगी।
शहर के पास ही हो गई खदानें
जिला मुख्यालय के पास ही सिद्वबाबा की पहाडी है। पर्यटन के साथ ही धार्मिक महत्व के इस क्षेत्र में जमकर अवैध खनन जारी है। नगर से महज 2 किमी दूर कभी पहाड़ हुआ करते थे,लेकिन अब यह क्षेत्र खदानों में तब्दील हो गए है। नगर में बनाए जा रहे अधिकांश मकानों के निर्माण में रोजाना मिट्टी का उपयोग हो रहा है। जिसकी पूर्ति इसी क्षेत्र से होती है।
बडी बडी मशीने लगाकर शोर करते ट्रेक्टर सडको पर जानलेवा सफर करते है। कलेक्टर कार्यालय से होकर रोजाना यह नजारा देखा जा सकता है। यही आलम नगर के वृंदावन तालाब के पास,डुमरउ के पीछे का है। जंहा अवैध तरीके से पर्यावरण के नियमो को ताक पर रखकर खुदाई जारी है। इन दबंगो के आगे एनजीटी के नियम और प्रशासन बौना साबित हो रहा है।
जिले में सडको के नाम पर खदानें
जिले में जिस भी क्षेत्र में सडक का निर्माण किया गया है,वंहा के पहाडों की शामत आई है। बल्देवगढ़,मोहनगढ़,निवाडी और जतारा रोड पर निर्माण के दौरान मिट्टी पास के ही पहाडों से ली गई है। रोड निर्माण के समय शिकायत होने पर विभाग द्वारा अनुमति होने की बात कहकर पल्ला झाड लिया जाता है। बल्देवगढ़ ब्लॉक सहित क्षेत्रभर में राजस्व विभाग की अपार भू सम्पदा को माफिया उकेरने में लगे हुए हैं।
राजस्व विभाग की पहाडिय़ों से लगातार अवैध रूप से मुरम का खनन किया जा रहा है। इतना ही नहीं खनन के दौरान पेड़ों को भी जेसीबी से उखाड़ कर फेंक दिया जाता है। काफी अर्से से चल रहे इस अवैध कारोबार पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ रही है। रोजाना इन क्षेत्रों से सैकड़ों ट्रालियां मुरम का खनन किया जा रहा हैमुरम का खनन वर्तमान में बल्देवगढ,कैलपुरा सहित कई जगहों की पहाडिय़ो से किया जा रहा है।
जा चुकी हैं जानें, अब संभलने की बारी
खुदाई के नाम पर पूर्व में भी तालाबो के साथ ही अवैध खदानों के कारण जानें गई है। वृंदावन तालाब के जानलेवा गड्डे कुछ वर्ष पूर्व रजक परिवार के दो बच्चों की जान ले चुके हैं। इसके पहले पूर्व जनपद अध्यक्ष भगतराम यादव के पुत्र सुनील की जान भी इन जानलेवा गड्डों के चलते चली गई थी । नगर के ढोंगा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास खदान में चार बच्चो की मौत हुई थी। परंतु ऐसी घटनाओं के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया और अवैध खनन जारी है।
जिले में जारी रेत का अवैध करोबार
जिले में लंबे समय से रेत का अवैध कारोबार जारी है,लेकिन कार्रवाई के नाम पर ट्रेक्टर पकडकर चालानी कार्रवाई से ही खानापूर्ति की जाती है। रेत के ठेकेदारों द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से पिटपास का उपयोग कर दूसरी खदानों से रेत का खनन किया जा रहा है। इस मामले में खनिज विभाग के साथ ही माईनिंग कार्पोरेशन के अधिकारी भी आंखे मूंदे हुए है।
एनजीटी की रोक के बाद जिले की रेत खदानों की नीलामी की गई थी। इस नीलामी प्रक्रिया डिजयाना ग्रुप को लिधौरा ग्रुप की मड़ोरी, पठारी की दो एवं वीरपुरा सहित 6 खदानों का काम दिया गया था। इसके साथ ही इस ग्रुप को जिले की और भी खदानों का ठेका दिया गया है। खनिज विभाग द्वारा जहां केवल लिधौरा ग्रुप की खदानों से खनन की अनुमति दी गई है वहीं पलेरा की संजय नगर, खेरा, टौरिया, गौना करौला, कछौरा, दांतगोरा, बखतपुरा एवं बेला की किसी भी खदान से रेत खनन की अनुमति नही है।
लेकिन इसके बाद भी पलेरा की बखतपुरा और बेला खदान से बड़ी मात्रा में मशीनों की मदद से रेत का खनन किया जा रहा है। बखतपुरा खदान से निकाली जा रही रेत के लिए पठारी खदान के पिटपास दिए जा रहे है।
जनता को नही लाभ,मंहगी हो रही रेत
खदान की अनुमति न होने के बाद भी इन खदानों से रेत का खनन करा रहे खनिज माफियाओं द्वारा मनमाने दर से पैसे भी वसूले जा रहे है। ट्रेक्टर से रेत का व्यापार करने वाले छोटे कारोबारियों से 1200 से 1500 रूपए वसूल किए जा रहे है।
इसके एवज में उन्हें पिटपास भी नही दिया जा रहा है और मात्र गेटपास देकर यह राशि ली जा रही है। रेत का काम करने वाले ट्रेक्टर चालक कहते है कि उनके ट्राली में दो से ढाई फीट रेत बनती है। शासकीय मूल्य के हिसाब से 177 रूपए घन मीटर के अनुरूप 350 रूपए लिए जाने चाहिए।
मगर यहां पर ठेकेदारों द्वारा 1200 से 1500 रूपए लिए जा रहे है। रेत के इन छोटे कारोबारियों से मानमाने तरीके से वसूली जा रही रायल्टी का खामियाजा सीधे आम आदमी को उठाना पड़ रहा है। शासकीय मूल्य से अधिक पर रेत बिकने से आम लोगों को भी ज्यादा मूल्य पर रेत खरीदनी पड़ रही है। इस मामले में माईनिंग कार्पोरेशन के साथ ही खनिज विभाग मौन है।
कहते है अधिकारी--
मुरम खदानों की जानकारी नही है। रेत के मामलों में कार्रवाई की गई है,आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
अमित मिश्रा जिला खनिज अधिकारी टीकमगढ़
्रप्रशासन के द्वारा कार्ययोजना बनाई जा रही है,जल्द ही बडी कार्रवाई की जाएगी। जंहा भी अवैध खनन के मामले आएगें,किसी को बख्शा नही जाएगा।
सौरभ कुमार सुमन कलेक्टर टीकमगढ़
Published on:
02 Feb 2019 01:00 am
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