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10 साल बाद भी मॉडल स्कूल शिक्षक विहीन

ऐसे कैसे बढ़ेगा शिक्षा का स्तर, केवल भवन बनाकर भूले सुध

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Model school without teacher even after 10 years

Model school without teacher even after 10 years

टीकमगढ़. सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षामिले। शिक्षा के लिए उपयुक्त वातावरण हो। छात्रों के लिए सुविधायुक्त लैब, खेल का मैदान हो। कुल मिलाकर बेहतर शिक्षा का मॉडल हो। यही सोचकर 10 साल पहले शासन द्वारा पूरे जिले में मॉडल स्कूल संचालित किए गए थे। वर्ष 2011 से संचालित जिले के 6 मॉडल स्कूल में आज तक शिक्षा विभाग उपयुक्त शिक्षकों की भी व्यवस्था नहीं कर पाया है।


प्रायवेट स्कूलों की तर्ज पर शासकीय स्कूलों को तैयार करने के लिए शासन ने वर्ष 2011 में मॉडल स्कूल की योजना संचालित की थी। योजना के तहत हर विकासखण्ड में एक-एक मॉडल स्कूल खोला गया था। यह स्कूल शुरू होने के बाद से वर्ष 2015-16 में इन स्कूलों के लिए सर्व सुविधायुक्त भवन भी तैयार करके दे दिए गए थे। इसके बाद से तो विभाग और शासन इनकी सुध ही भूल गया है। न तो स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने पर्याप्त शिक्षक मिल सके है और लैब और प्ले ग्राउण्उ तो जैसे सपना बना हुआ है।


यह है शिक्षकों की स्थिति
कक्षा 9 से 12 तक संचालित होने वाले इन मॉडल स्कूलों के लिए विभाग द्वारा 14 शिक्षकों के पद स्वीकृत किए गए थे। इसके साथ ही तीन लैब टैक्नीशियन एवं एक पीटीआई का पद भी स्वीकृत किया गया था। लैब टैक्नीशियन और पीटीआई तो दूर इन स्कूलों में आज तक शिक्षक भी नहीं पहुंच सके है। विदित हो कि जिला मुख्यालय पर बड़ौराघाट स्थित मॉडल स्कूल में प्राचार्य सहित जहां मात्र 4 शिक्षक है, वहीं निवाड़ी जिला मुख्यालय पर स्थित मॉडल स्कूल में भी मात्र 3 शिक्षक ही है। यही हाल पृथ्वीपुर का है और मात्र 2 शिक्षक है। इसके साथ ही पलेरा में 7 और बल्देवगढ़ में 8 शिक्षक पदस्थ है।

स्कूल में लग रही कलेक्ट्रेट
निवाड़ी में हाल यह है कि यहां के मॉडल स्कूल में कलेक्ट्रेट संचालित हो रही है। मॉडल स्कूल को उत्कृष्ट विद्यालय भवन के पीछे व्यवसायिक शिक्षा के लिए बनाए गए चार कमरों में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं बल्देवगढ़ के मॉडल स्कूल के भवन को कॉलेज के साथ सांझा किया गया है। यहां पर आधे भवन में कॉलेज तो आधे में मॉडल स्कूल संचालित किया जा रहा है।


यहां प्राचार्य भी प्रभारी
इसके साथ ही कुछ मॉडल स्कूल में तो 10 सालों में स्थाई प्राचार्य की भी व्यवस्था नहीं हो सकी है। जतार, पलेरा, बल्देवगढ़ एवं पृथ्वीपुर के मॉडल स्कूल जहां प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे है, वहीं निवाड़ी के मॉडल स्कूल के प्राचार्य को डीईओ का प्रभार दे दिया गया है और अब वह स्कूल का रूख ही नहीं कर रहे है। ऐसें में यह स्कूल केवल नाम के मॉडल होते दिख रहे है। स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था न हो पाने के संबंध में डीइओ एचसी दुबे से बात नहीं हो सकी है।