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अब किसानों को खरीदी गई उपज का नकद भुगतान ५० हजार की जगह होगा खरीदी पर २ लाख रुपए

सरकार और मंडी बोर्ड भले ही किसानों के लिए कई नियमों को परस्पर ला दे। लेकिन मंडी प्रशासन और व्यापारियों के नियम सिर्फ आदेश तक ही सीमित रहते है।

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No impact on ground level

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टीकमगढ़.सरकार और मंडी बोर्ड भले ही किसानों के लिए कई नियमों को परस्पर ला दे। लेकिन मंडी प्रशासन और व्यापारियों के नियम सिर्फ आदेश तक ही सीमित रहते है। मंडी बार्ड ने किसानों के लिए एक आदेश जारी किया है। जिसमें ५० हजार रुपए की जगह एक दिन में व्यापारी किसानों को १ लाख ९९ हजार ९९९ रुपए तक का भुगतान कर सकता है। जिसमें आयकर का कोई भी नियम सामने नहीं आएगा। यह आदेश शनिवार १ जून से लागू कर दिया गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर यह कार्रवाई उलट दिखाई दी है।
मंडी बोर्ड के आदेश अनुसार किसानों को ५० हजार की जगह २ लाख रुपए तो मिलेगें। लेकिन इस योजना को परस्पर लाने के लिए मंडी को फील्ड में रहकर कामयाब करना होगा। नहीं तो यह किसानों के हित की योजना आदेशों तक ही सीमित रह जाएगी। कृषि उपज मंडी सचिव ओपी लक्ष्यकार ने बताया कि किसानों की फसलों का पूरा भुगतान नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ता था। जिसके कारण मंडी बोर्ड ने किसानों के हित में आदेश जारी किया है। जिसमें कहा कि अभी हाल ही में किसानों की उपज का भुगतान एक दिन में ५० रुपए किया जाता था। जिसमें किसानों की आर्थिक तंगी समाप्त नहीं होती थी। इसमें सुधार करते हुए मंडी बोर्ड ने ५० हजार रुपए की जगह १ लाख ९९ हजार ९९९ रुपए का भुगतान एक दिन में करने के आदेश दिए है। जिसका परिपालन १ जून शनिवार से किया जाना था। लेकिन जिले की विभिन्न मंडिय़ों में आदेश का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखा है।
सामने नहीं आएगा किसानों की भुगतान राशि में आयकर अधिनियम
कृषि उपज मंडी के व्यापारी अब आयकर अधिनियम का हवाला देते हुए किसानों को ज्यादा राशि का भुगतान करने से मना नहीं कर सकेंगे। मंडी बोर्ड ने किसानों को उनकी उपज के मूल्य के दो लाख रुपए नकद देने के आदेश जारी कर दिए है। जिसका परिपालन १ जून से जारी किया जाना था। लेकिन कृषि उपज मंडी में इसका कोई असर नहीं दिखा है।


एक दिन में ही किया जाएगा उपज की राशि का भुगतान
कृषि उपज मंडी सचिव ने बताया कि उपज बेचने वाले किसानों को ५० हजार रुपए का प्रावधान था। लेकिन व्यापारी आय अधिनियम का हवाला देकर १० हजार ही देते थे। बांकी रकम को किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था। अवकाश या अन्य किसी कारण से यह राशि समय पर जमा नहीं हो पाती थी। कई व्यापारी किसानों से खरीदी उपज को बेचने के बाद राशि मिलने पर ही आगे का भुगतान करते थे। जिससे किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
बैठक की जगह व्यापारियों को सोशल मीडिया से दी जानकारी
किसानों के हित में आने वाले आदेश की जानकारी बैठक की जगह मंडी सचिव ने व्यापारियों को सोशल मीडिया द्वारा दी है। जिसमें कहा कि व्यापारियों द्वारा किसानों से खरीदी गई उपज की २ लाख रुपए की राशि नकद देनी होगी। कुछ खरीद स्थल और बची राशि को उसी दिन किसान के खाते में ट्रांसफर करनी होगी। लापरवाह व्यापारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
लेट भुगतान पर व्यापारियों को देना होगा ब्याज
मंडी अधिनियम के तहत किसानों द्वारा खरीदी गई उपज का भुगतान उसी दिन होना चाहिए। ऐसा न होने पर किसाना को १ प्रतिशत प्रतिदिन की दर से पांच दिन के भुगतान करने का प्रावधान है। मंडी अधिनियम के अनुरूप भुगतान नहीं होता है तो व्यापारी का लायसेंस समाप्त कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कई व्यापारियों द्वारा एक-एक हफ्ता भुगतान नहीं किया जाता है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की जाती है।
इनका कहना
मंडी बोर्ड ने किसानों के हित में यह अच्छा आदेश दिया है। किसानों को उपज बेचने के बाद उसी दिन राशि दी जाएगी। जिन-जिन व्यापारियों को आदेश की जानकारी नहीं है, उन्हें मंडी द्वारा पत्र द्वारा जानकारी दी जाएगी। व्यापारियों द्वारा उपज खरीदी के लेनेदेन में देरी करते है तो जांचकर कार्रवाई की जाएगी।
ओपी लक्ष्यकार सचिव जिला कृषि उपज मंडी टीकमगढ़।
सोशल मीडिया के तहत जानकारी मिली है। सभी व्यापारियों को मंडी बोर्ड का आदेश मंजूर है। किसानों की उपज का उसी दिन भुगतान करने के निर्देश मंडी के सभी व्यापारियों को दिए जाएगें।
कैलाशचंद्र चौधरी अध्यक्ष कृषि उपज मंडी व्यापार संघ टीकमगढ़।