
Orchha: 500 years ago the king's ministers used to live in colonies
टीकमगढ़/ओरछा. 500 साल पहले पहले 15वीं शताब्दी में भी ओरछा सबसे विकसित रियासतों में शामिल था। उस समय भी यहां पर सर्वसुविधायुक्त कॉलोनियां थी और इसमें राजा के मंत्री और सूबेदार साथ रहते थे। ओरछा की इस विकसित संस्कृति की जानकारी यहां पर ऑर्कलॉजी विभाग द्वारा कराई जा रही खुदाई में सामने आ रही है। यहां पर 500 साल पुरानी विकसित संस्कृति एवं सभ्यता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजे मिल रही है।
शासन के निर्देशन पर ओरछा के जहांगीर महल के दक्षिणी भाग खुदाई का काम कराया जा रहा है। ऑर्कलॉजी विभाग के क्यूरेटर घनश्याम बाथम ने बताया कि किले परिसर के 600 मीटर के क्षेत्र में खुदाई और सफाई का काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां पर सफाई कराने के लिए काम शुरू किया गया था, लेकिन खुदाई में उस समय के मकान आदि के अवशेष एवं अन्य सामाग्री मिलने पर मशीनों से काम बंद करके अब मजदूरों से संभलकर खुदाई कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां पर प्रतिदिन 150 से 200 मजदूरों से काम कराया जा रहा है।
बहुत रेयर मिलती है ऐसी सभ्यताएं
बाथम ने बताया कि अब तक हुई खुदाई में यहां पर दो कॉलोनियों के अवशेष मिले है। पुराने आलीशान मकानों ेअवशेष के साथ ही सड़क, उस समय के मिट्टी और टेराकोटा के बर्तनों के साथ ही अन्य चीजें मिल रही है। बाथम ने बताया कि इन कॉलोनियों को देखकर पता चलता है कि उस समय भी राज्य को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए राजा द्वारा अपने मंत्री, बजीर एवं सूबेदारों को कॉलोनी बनाकर रखा जाता था। इससे सभी की सुरक्षा के साथ ही राजकीय कार्य में सुविधा होती होगी। उनका कहना था कि यहां पर मिल रहे अवशेषों से स्पष्ट है कि यह पूरा निर्माण एक सुरक्षित कैंपसनुमा एरिया रहा होगा। उन्होंने बताया कि ऐसे निर्माण विरले ही मिलते है।
समृद्ध ओरछा की मिल रही झलक
पिछले दो माह से चल रही इस खुदाई में अब तक मिले अवशेषों के आधार पर बाथम का कहना था कि उस समय के किले कोठिया तो यहां के वैभव को दर्शातें ही, लेकिन जो चीजें यहां पर मिल रही है, उससे ओरछा की 15वीं शताब्दी की समृद्धि की झलक भी देखने को मिल रही है। उनका कहना था कि यहां पर मिल रहे बर्तनों आदि को संभाल कर रखा जा रहा है और इस पूरे कैंपस को सुरक्षित किया जा रहा है। आने वाले समय में ओरछा के पर्यटकों के लिए यह नया ओरछा होगा।
सुरक्षा को लेकर सवाल
वहीं यहां पर चल रही खुदाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे है। लोगों का कहना है कि यहां पर चल रही खुदाई की किसी को जानकारी नहीं है और इसकी वीडियोग्राफी आदि भी नहीं कराई जा रही है। ऐसे में यहां पर मिलने वाली पुरातन महात्व के किसी सामग्री के यहां से वहां होने की आशंका भी जाहिर की जा रही है। इस पर बाथम का कहना था कि पूरा काम सुरक्षित तरीके से कराया जा रहा है और पूरे काम की वीडियोग्राफी कराई जा रही है।
Published on:
26 Dec 2022 08:12 pm

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