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तीन साल से जिला अस्पताल मेटरनिटी विंग की बंद पड़ी लिप्ट

ऊपर की लिप्ट में गुटखा की गंदगी।

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ऊपर की लिप्ट में गुटखा की गंदगी।

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रैंप के माध्यम से ऑपरेशन की प्रसूताओं ले जाने में होती है समस्याएं

टीकमगढ़. जिला अस्पताल की बिल्डिंग एवं इमारतों को तो बड़ा कर दिया। लेकिन जो स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ी हुई समस्या है, उन्हें सुधारने का काम सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। अस्पताल के मेटरनिटी विंग की लिप्ट तीन सालों से बंद है। इसमें सबसे अधिक परेशानियां ऑपरेशन वाली प्रसूताओं को होती है। जिन्हें कठिन परिस्थिति में रैंप के माध्यम से वार्ड में ले जाना पड़ता है।
पत्रिका की टीम ने मंगलवार की सुबह १:०६ बजे मेटरनिटी विंग लिप्ट को देखा तो वहां की स्थिति उलट थी। उस लिप्ट में बिजली सप्लाई नहीं थी, गूटखा और अन्य कचरे के ढेर लगे थे। यही हाल नीचे की लिप्ट का भी था। ऊपर जाने के लिए लिप्ट का बटन दवाया तो उसी दौरान एक वृद्ध महिला की आवाज आई और बोली यह मशीन खराब है। इसे तीन साल से ऐसा ही देख रहे है। दोपहर १:१५ बजे तक जतारा के अशोक के वट से बात की। उन्होंने ने बताया कि मित्र के रिस्तेदार की महिला का ऑपरेशन हुआ है। उन्हें देखने के लिए आए थे। उनके द्वारा सुना है कि रैंप से जाते समय बहुत परेशान हुए है।

२० लाख रुपए में लगाई गई थी लिप्ट
जिला अस्पताल में बने मेटरनिटी विंग में प्रसूताओं की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाई गई थी। जिनमें पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा २० लाख रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन लिप्ट दस दिन तक नहीं चल पाई। परिजन को प्रसूता महिलाओं को स्ट्रेचर पर लिटाकर रैंप से ऊपर के वार्ड में ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में सबसे ज्यादा समस्या ऑपरेशन वाली महिलाओं को होती है।

तीन से बंद, आज तक नहीं हो पाई शुरू
तीन मंजिला बने मेटरनिटी विंग में पीआईसीयू वार्ड, आईसीयू वार्ड में चढऩे, उतरे में महिलाओं को दिक्कतों का सामना न करना पड़ता। इसके लिए तीन साल पहले अक्टूबर महीने में शुरू हुई थी। लिफ्ट शुरू होते ही पहली ही बार में क्षमता से अधिक वजन के साथ लिफ्ट को चालू कर दिया। जिससे वह तीसरी मंजिल तक भी नहीं पहुंच पाई और खराब हो गई, जो अब तक बंद पड़ी है। वहीं यह लिफ्ट छोटी भी है, जिससे मरीज को स्ट्रेचर सहित लिफ्ट में नहीं ले जाया जा सकता। जिससे अगर मरीज चलने की स्थिति में नहीं है तो उसे स्ट्रेचर पर लेटाकर रैंप से ऊपर ले जाना पड़ रहा है।

लिफ्ट के लिए कर्मचारी नहीं हुए तैनात
जिला अस्पताल में प्रसूताओं की सुविधाओं के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने ठेका से शुरू करवा दिया था, लेकिन उसके लिए कर्मचारी नियुक्त नहीं किया था। ओवरलोडिंग के चलते बंद हो गई थी। उसके सुधार के लिए इंजीनियर को बुलाने की बात दो साल से की जा रही है, लेकिन सुधार कार्य के लिए इंजीनियर नहीं आ पाया है।

इनका कहना
लोगों की सुविधाओं के लिए लिप्ट लगाई है, लेकिन वह बंद है। इसमें बिजली भी नहीं आ रही है। कुछ दिन पहले तो बिजली आती थी। लेकिन अब नहीं है।
कल्लू रैकवार तालमऊ फोटो।

मरीज के साथ रैंप के माध्यम से जाने आने मेंं डर लगता है। सुविधा के लिए अस्पताल वालों ने लिप्ट लगाई है, लेकिन चालू नहीं है।
करन सिंह। फोटो
इनका कहना
यह गंभीर समस्या है। सिविल सर्जन को इस पर ध्यान देना चाहिए। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। जिससे प्रसूताओं को परेशान ना होना पड़े।
शोभाराम रौशन, सीएमएचओ टीकमगढ़।