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छत पर रखे लगेज से अंधे मोड़ों पर लहराती है बसें, ऐसी घटनाओं को रोकने नहीं किए जा रहे प्रयास

यात्री बसें यात्रियों के साथ ट्रांसपोर्ट का माल भी ढोंने लगी है। अंधे मोड़ों पर लहराती बसों से यात्री भगवान को भज रहे है। लेकिन मुनाफा पाने के चक्कर में यह नजारा प्रतिदिन सुबह और शाम पुराने बस स्टैंड और नए बस स्टैंड पर देखने को मिल रहा है।

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Transport vehicles became passenger buses

Transport vehicles became passenger buses

टीकमगढ़. यात्री बसें यात्रियों के साथ ट्रांसपोर्ट का माल भी ढोंने लगी है। अंधे मोड़ों पर लहराती बसों से यात्री भगवान को भज रहे है। लेकिन मुनाफा पाने के चक्कर में यह नजारा प्रतिदिन सुबह और शाम पुराने बस स्टैंड और नए बस स्टैंड पर देखने को मिल रहा है। जिसमें सवारियां कम और लगेज अधिक दिखाई दे रहा है। उसके बाद वाणिज्यकर विभाग और परिवहन विभाग मौन साधे बैठा हुआ है।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, दिल्ली, झांसी, छिंदवाड़ा के साथ अन्य शहरों में टीकमगढ़ से यात्री बसें यात्रियों को लेकर जाती है। उन्हीं बसों में नीचे यात्री और छतों पर लाइन लगाकर ट्रांसपोर्ट के माल को ढोंया जाता है। जब तक बस निश्चित स्थान पर नहीं पहुंच जाती, तब तक यात्रियों की धड़कने धड़कती रहती है। इसके साथ ही अंधे मोड़ों पर चलती बसों का लहराना और सड़क किनारे और सामने के वाहनों को जगह देने पर यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती है। उसके बाद भी जिम्मेदार विभागों द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जाता है। विभाग के कर्मचारियों का कहना था कि परिवहन अधिकारी कभी भी विभाग में नहीं आते है ना ही उनके द्वारा कार्रवाई की जाती है। वहीं बस चालकों का कहना है कि अपनी और यात्रियों की जान दाव पर रखकर बसों को लाते है। यात्री वाहन पर ट्रांसपोर्ट का माल लाना बर्जित है।
परिवहन और वाणिज्यकर विभाग की लापरवाही से लाद रहे ट्रांसपोर्ट का माल
परिवहन अधिकारी विभाग में नदारत रहते है। उनका काम बाबू और निजी कर्मचारी देखते है। उसका फायदा बस वाहन मालिक उठा रहे है। ट्रांसपोर्ट के वाहनों से आने वाले माल को बसों से पहुंचाया जा रहा है। जिसमें यात्रियों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस प्रकार के बस संचालन से कभी भी हादसा हो सकता है। लेकिन उन्हें रोकने का प्रयास किसी भी जिम्मेदार विभाग द्वारा नहीं किया जाता है।
भोपाल, इंदौर और झांसी से आ रहा बसों की छतों पर सबसे अधिक माल
जिले में दर्जनों की संख्या में ट्रांसपोर्ट संचालित हो रही है। जिसमें मुबई, दिल्ली, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, छिंदवाडा, राजस्थान के साथ अन्य स्थानों से दुकानदारों का सामान आता है। उसको लाने में बिल्टी के अनुसार रुपए लिए जाते है। उसके लिए ट्रांसपोर्ट कम्पनी की ओर से ट्रकों का संचालन होता है। डीजल के साथ अन्य करों को बचाने के लिए यात्रियों बसों का सहारा लेते है। जिसके कारण ट्रकों से आने वाला सामान बसों द्वारा जिले में पहुंच रहा है। इसके साथ ही बसों के माध्यम से बसों द्वारा महरौनी, मडावरा, ललितपुर, छतरपुर, घुवारा, दिगौड़ा, लिधौरा, पृथ्वीपुर, निवाड़ी, जतारा, पलेरा, बल्देवगढ़़, बरुआसागर, तालबेहट के साथ अन्य स्थानों पर पहुंच रहा है।


नहीं होती कार्रवाई
बस चालकों का कहना था कि जब टीकमगढ़ से बस जाती है तब उनकी छतों पर माल को जमा दिया जाता है और उस तरफ से आने पर भी माल को लाया जाता है। उसकी चेकिंग भी रास्ते में कहीं नहीं होती है। बसों का नाम देखकर ही जाने देते है। छतों पर माल रखे रहने के कारण कई बार तेज रफ्तार में लहरा जाती है। लेकिन प्रयास से संभल जाती है। इस प्रकार की लोडि़ंग से कभी भी हादसा हो सकता है। जो अधिक नुकसान देगा, लेकिन प्रशासन द्वारा होने वाली घटनाओं को रोकने का प्रयास नहीं किया जाता है।
बगैर परमिट की चलने वाली छोटी बिंगरों के भी हाल बेहाल
सागर, भोपाल, झांसी, ग्वालियर के साथ जबलपुर की ओर जाने वाले छोटी बिंगर वाहनों को बगैर परमिटों पर सुबह से चलाया जाता है। वह सुबह से सावरियों को लेकर चलती है। वापस लौटने पर उनकी छतों पर लगेज रखा रहता है। यात्रियों का सामान सीटों के नीचे और स्वयं की सीट पर रखा रहता है। जिसके कारण यात्रियों को बैठने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मामले को लेकर टीकमगढ़ परिवहन अधिकारी निर्मल कुमरावत को शनिवार की शाम ४.४५ बजे तीन कॉल किया गया। लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीवड नहीं किया गया।
इनका कहना
यात्री बसों में ट्रांसपोर्ट का माल आ रहा है यह गलत है। इसकी जांच सतना की टीम कर सकती है। जो व्यक्ति शिकायत करेगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर यह जांच परिवहन अधिकारी को करना चाहिए। जिससे घटनाओं को रोका जा सके।
शिव प्रताप सिंह वाणिज्यकर अधिकारी टीकमगढ़।