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truth of incident in tikamgarh dehat police station : पुलिस वालों ने हाथ काटने की धमकी देकर उतरवाए थे किसानों के कपड़े

पीडि़तों के पास पहुंचा पत्रिका, किसानों ने रोते हुए सुनाई आपबीती, बयां की देहात थाने की घटना

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truth of incident in tikamgarh dehat police station

truth of incident in tikamgarh dehat police station

टीकमगढ़. पुलिस लॉकअप में कपड़े उतरवाकर पीटे गए किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने थाने ले जाकर उनसे गाली गलौज की, थप्पड़ मारे और धमकाया कि अगर कपड़े नहीं उतारे तो सबके हाथ काट देंगे। जो किसान विरोध कर रहे थे वे भी हाथ कटने के डर से कपड़े उतारकर चुपचाप हवालात में बैठ गए। पुलिस का व्यवहार ऐसा था, जैसे हम कोई चोर हों। पत्रिका ने घटना के बाद बुधवार को पीडि़त किसानों के घर पहुंचकर उनकी व्यथा सुनी। किसानों के अनुसार, मंगलवार को जिला मुख्यालय पर खेत बचाओ, किसान बचाओ रैली में दुनातर गांव से लगभग सौ किसान गए थे। रैली में बवाल होने के बाद जब ये किसान गांव लौट रहे थे तो पुलिस ने उन्हें पकडक़र देहात थाने ले गई।

कुछ तो लगभग नग्न हालत में थे
पीडि़तों ने बताया कि हमसे कुछ युवा थे। इनमें से दो-चार को थाने में लगभग नग्न जैसी हालत में कर दिया था। उनके अनुसार, वहां करीब 25 पुलिस वाले थे। इनमें से दो पुलिस वाले दो स्टार वाले थे और एक तीन स्टार वाला था। वे लगातार गालियां दे रहे थे और चांटे मार रहे थे। रतिराम बताते हैं कि उन्हें तो डंडे भी मारे, जो कलाई में लगा। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। लगभग एक घंटे बाद पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह के आने पर ही पुलिस ने हमें छोड़ा।

पुलिस का इरादा मारने का था...
कि सान रवि और रतिराम अहिरवार बोले, पुलिस हम और करीब 30-35 लोगों को लॉकअप में ले गई और वहां कपड़े उतरवाए। जब विरोध किया तो पुलिस वालों ने कहा कि ‘कपड़े नहीं उतारोगे तो हाथ काट लेंगे।’ पीडि़त किसान ने बताया पुलिस वालों का मारने का ही इरादा था, इसीलिए कपड़े उतरवाए। कुछ को चांटे तो कुछ लोगों को डंडे मारे। उनका कहना था, सामने लाए जाने पर वे पुलिस अधिकारियों और जवानों को पहचान जाएंगे।

जांच के बाद बताएंगे
डीआईजी जैन ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद भी दोषियों के बारे में कुछ बता सकेंगे। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल किसानों को गिरफ्तार कर मंगलवार को उनके कपड़े उतार कर थाने में बंद करने, प्रशासन द्वारा ज्ञापन लेने में लापरवाही की जांच की। कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल से जब लाठी चार्ज की घटना, ज्ञापन लेने नहीं आने और उसके बाद बिगड़े हालात के बारे में पूछा गया तो वह बिना जवाब दिए डीआईजी के वाहन में बैठकर चले गए।

जांच में जो भी निष्कर्ष आएंगे उसी के आधार पर ही मैं कुछ कह पाऊंगा। फिलहाल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
-ऋषि कुमार शुक्ला, डीजीपी

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