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बुंदेलखंड की अयोध्या में जानकी जू के साथ विराजे श्रीकृष्ण

कित मुरली कित चंद्रिका कित गोपिन को साथ, अपने जन के कारने श्रीकृष्ण भये रघुनाथ।।

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Viraje Sri Krishna with Janaki Zoo in Ayodhya, Bundelkhand

Viraje Sri Krishna with Janaki Zoo in Ayodhya, Bundelkhand

टीकमगढ़. भगवान राम के साथ उनकी अर्धागिंनी सीताजी के मंदिर देश ही नहीं विदेशो में मौजूद है। लेकिन भगवान राम की नगरी ओरछा में एक मंदिर ऐसा भी है,जिसमें माता सीता के साथ विराजे श्रीकृष्ण विराजे है। ओरछा के राजा राम की ससुराल कहे जाने वाले जानकी जू मंदिर देशी और विदेशी सैलानियो के लिए कौतूहल के साथ ही आस्था का केन्द्र है। इस मंदिर में ही श्रीराम विवाह महोत्सव के दौरान राजा राम की बारात आती हैं । लेकिन जब रोजाना भक्त यहां दर्शन करने आते हैं और मूर्ति को निहारते हैं । जहां भगवान रामराजा की अर्धांगिनी सीता उनके ही स्वरूप श्रीकृष्ण के साथ विराजकर दर्शन देती है। बुंदेलखंड की अयोध्या कही जाने वाली भगवान राम की नगरी ओरछा में रामराजा मंदिर के अलावाऐतिहासिक इमारतें और धार्मिक मंदिर हैं, लेकिन जानकी जू मंदिर के इतिहास की जिज्ञासा खासकर विदेशी सैलानियों को इस मंदिर में खींच लेती है।
राजा को राम ने कृष्ण रूप में दिए थे दर्शन
ऐसी पुरातन मान्यता है कि ओरछा की रानी कुंवर गनेश रामलला को बाल रूप में अयोध्या से ओरछा लाई थी । जिसके कारण धार्मिक नगरी ओरछा पूरी तरह राम मय हो गई थी। ओरछा के राजा मधुकरशाह जू देव कृष्ण उपासक थे ।
वह भगवान कृष्ण को अपना इष्ट मानते थे । मंदिर के पुजारी गणेशदास दुबे कहते है कि जब राजा को नगर के सभी मंदिरो में राम के दर्शन होने लगे तो वह अपने इष्ट के दर्शन को लालायित होने लगे। राजा इस दौरान इस मंदिर में पंहुचे और उन्होंने प्रार्थना कि तो ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम की मूर्ति ने तत्काल धनुषबाण छोडकर मुरली थाम ली।
राजा को जैसे ही वहां श्रीकृष्ण की झलक दिखाई दी । यह बात उन्होंने किसी को नही बताई और राज पुरोहित से प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त पूछा और तत्काल भगवान कृष्ण की प्रतिष्ठा करा दी । तभी से भक्तों को भगवान राम के कृष्ण रूप में ही दर्शन होते हैं । पुजारी दुबे कहते है कि चूंकि राम कृष्ण दोउ एक हैं अंतर नहीं निमिष ,इनके नयन गंभीर है उनके चपल विशेष।
विदेशियों में भी विशेष आस्था
ओरछा आने वाले देशी और विदेशी सैलानी रामराजा मंदिर के दर्शन के साथ ही उनकी ससुराल जानकी जू मंदिर जरूर जाते हैं । दक्षिण अफ्रीका के चिली से आए श्रद्वालु अलन जोसे ,लाव बेन ने कहा कि जब उन्हें गाइड निक्की ने इस मंदिर के इतिहास की जानकारी दी तो उनके मन में मंदिर को देखने की जिज्ञासा थी।