
'We have a sense of compassion
टीकमगढ़. हमारे समाज में इन दिनों करुणा का भाव समाप्त होता जा रहा है । चारों तरफ हिंसा का बोलबाला हो रहा है। इसी बात को मद्देनजर रखकर, हिंदी साहित्य सम्मेलन और करुणा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। वर्तमान समय में करुणा का संकट विषय पर आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता आर एस चतुर्वेदी ने की । मुख्य अतिथि कवि योगेंद्र तिवारी अटल और विशिष्ट अतिथि करुणा इंटरनेशनल के राष्ट्रीय प्रचारक अजित जैन जलज रहे ।
वरिष्ठ एडवोकेट डी पी यादव ने कहा कि वास्तव में करुणा भाव की मौजूदगी ही हमें मनुष्य बनाती है। करुणा से ही हमारे आदमी होने की पहचान बनती है। इसके अभाव में जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता, हमारे अंदर प्राणी मात्र के प्रति दया और करुणा का भाव होना चाहिए , तभी हम सच्चे अर्थों मनुष्य कहलाने के हकदार हैं। किरण अध्वर्यु ने करुणा की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि हम करुणा के रास्ते चलकर ही मानवता की सच्ची सेवा कर सकते हैं । करुणा का अभाव हमें हिंसा के रास्ते ले जाता है। शिक्षाविद और विचारक फ ूलचंद जैन ने करुणा को मानव जीवन का सर्वश्रेष्ठ मूल्य बताते हुए कहा कि जड़चेतन के प्रति संवेदनशील रहकर ही एक समरसता वादी समाज की संरचना की जा सकती है। व्यंग्यकार रामस्वरूप दीक्षित ने कहा कि आज हम जिस युद्ध की मानसिकता में जी रहे हैं । वह हमें विनाश के रास्ते ले जाने वाली है। राष्ट्रवाद का अतिरेक हमें मनुष्य विरोधी बना रहा है। अजित जैन जलज ने स्कूलों में करुणा क्लब खोलकर बच्चों में करुणा जाग्रत करने वाली गति विधियों के संचालन पर जोर देते हुए कहा कि नई पीढी में जीव मात्र के प्रति संवेदना जाग्रत करने दिशा में पहल किए जाने की जरूरत है । मुख्य अतिथि कवि अटल ने करुणा शब्द की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए अनेक उदाहरणों से जीवन में करुणा के महत्व को प्रतिपादित किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आर एस चतुर्वेदी ने अपने जीवन से जुडी घटनाओं के माध्यम से बताया कि कैसे आज हम एक असहिष्णु समाज में तब्दील होते जा रहे हैं। माता पिता को देवता समान मानने वाले हमारे समाज में आज वृद्धाश्रमों की संख्या का बढना बता रहा है कि करुणा का भाव हमारे समाज से गायब होता जा रहा है। गोष्ठी के दूसरे चरण में सीताराम राय सरल,डी पी शुक्ला सरस,डीपी यादव और योगेंद्र तिवारी अटल ने अपनी करुणा भाव से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया । अंत में सम्मेलन के उपाध्यक्ष फूलचंद जैन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। गोष्ठी में संजीव सिरवैया,कस्तूरी जैन, रामकुमार त्रिपाठी, गौरव मिश्रा,नीता पुरोहित सहित कई श्रोता उपस्थित रहे।
Published on:
19 Mar 2019 09:03 am
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