
आओ गांव चले : तरवरपुरा खेड़ा से बना अनवरपुरा खेड़ा
पीपलू (रा.क.). पीपलू उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बगड़ी के अंतर्गत अनवरपुरा खेड़ा ग्राम स्थित है। किवदंतीयों के अनुसार अनवरपुरा खेड़ा करीबन 200 वर्ष से अधिक पुराना गांव है। जिसका नाम पूर्व में तरवरपुरा का खेड़ा था। जिसे दादू संप्रदाय के बाबा तरवरदास ने बसाया था। इसके बाद नरसल गोत्र के गुर्जर जाति का मौजोराम ने आकर पशुपालन शुरू किया था।
जहां नरसल गोत्र के गुर्जरों की बसावट के समय की थूनी यहां आज भी है। लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि सबसे पहले इस गांव में दादू मत के अनुयायी तरवरदास आए थे। इसी के कारण यह गांव तरवरपूरा का खेड़ा के नाम से जाना जाता था। जहां इसका नाम टोंक नवाब रियासत के समय अनवरपुरा खेड़ा कर दिया गया।
तरवर दास ग्राम रानीपुरा से यहां आए थे जो कि मांडकला नगरफोर्ट के नजदीक था। वह रानीपुरा से बगड़ी ग्राम में पहुंचकर बसना चाहते थे लेकिन आनना जाटा ओर दादू मत के अनुयायी के बीच मतभेद हो जाने से वह बगड़ी में नहीं बसे और बगड़ी से 3 किलोमीटर दूर खेड़ा पहुंच कर ग्राम बसाया। जिसको तरवरपूरा का खेड़ा नाम से प्रसिद्धि मिली।
जिसका नाम टोंक रियासत के समय तरवरपुरा खेड़ा को बदलकर अनवरपूरा खेड़ा कर दिया। पहले यह गांव बगड़ी तहसील तहसील क्षेत्र में रहा। अब पीपलू क्षेत्र में हैं। तरवरदास ग्राम रानीपुरा से दादू संप्रदाय का प्रचार प्रसार करने को लेकर बगड़ी पंचायत के अनवर पुरा खेड़ा गांव में आए थे उस समय दादू संप्रदाय के प्रचार प्रसार के साथ-साथ दादू अनुयाई ग्रामीणों को अखाड़ाबाजी के करतब निशुल्क सिखाते थे।
यह है पृष्ठभूमि
अनवरपुरा खेड़ा गांव में बालाजी का स्थान काफी प्राचीन है। यहां मंगलवार शनिवार को चोला चढ़ाने, मनोती करने वाले काफी संख्या में आते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में पैदावार की दृष्टि से मूंगफली सरसों गेहूं का उत्पादन विशेष होता है। यहां शिक्षा की दृष्टि से सरकारी स्तर का उच्च प्राथमिक विद्यालय है। सिंचाई के लिए परंपरागत जल स्रोतों सहित वर्षा पर निर्भर रहते है। यहां के लोगों में आध्यात्मिक रूचि है।
ग्रामीणों के सहयोग से ठाकुर जी के मंदिर का भव्य निर्माण कराया जा रहा है। नौनिहाल बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र है। यहां माली, हिंदू लोहार, कुम्हार, गुर्जर, बैरवा, ब्राह्मण, बाबाजी, डोलियों आदि के घर हैं। यहां हाल ही ज्योति पुत्री अंबालाल का नीट में सिलेक्शन हुआ है। जिससे गांव में हर्ष की लहर है। गांव में बेरवा समुदाय का एक लडक़ा इंजीनियर व जाट समाज का एक लडक़ा हेमराज जाट बैंक ऑफ बड़ौदा सांकना में प्रबंधक है।
इसके अलावा कई अध्यापक, परिचालक, पुलिस, रोडवेज, राजस्व सेवा में कार्यरत है। ज्यादातर लोग कृषि एवं पशुपालन व्यवसाय को देखते हैं। गांव में विशेष समस्या टोंक जिला मुख्यालय तक सीधा सडक़ मार्ग नहीं होने से हैं। ग्राम के रामकरण जाट ने बताया कि यह समस्या अनवरपुरा खेड़ा गांव को डूंसरी, करीमपुरा गांव तक सडक़ मार्ग बनाए जाने से हल हो सकती है।
फिलहाल वे रजवास बरतल चौराहे होकर बरौनी होते हुए टोंक जिला मुख्यालय को आ जाते हैं हालांकि ग्राम पंचायत मुख्यालय बगड़ी तहसील मुख्यालय पीपलू पहुंचने के लिए सडक़ मार्ग बना हुआ है, लेकिन क्षतिग्रस्त होने के चलते आवागमन में काफी परेशानी स्थानीय लोगों को उठानी पड़ती है।
यहां डाक सुविधा का अभाव हैं। अनवरपुरा खेड़ा गांव में गोचरा पर अतिक्रमण होने से पशु पालकों को मवेशी चराने में दिक्कतें होती है। यहां के अधिकांश पशुपालक कृषि एवं पशुपालन व्यवसाय पर निर्भर है। दुग्ध उत्पादन के लिए यहां के दुग्ध उत्पादक किसान घर बैठे डेरी पर दूध बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं यहां से दूध निवाई जयपुर टोंक जा रहा है।
Published on:
22 Oct 2020 06:55 pm
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