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टोंक

video: बनास की ‘जुगनी’ दिल्ली मंडी में बिखेर रही जलवा, क्षेत्र के किसान हो रहे मालामाल

बनास नदी के खीरा ककड़ी जहां अब तक दिल्ली तक पहचान बनाए हुए है। वहीं अब यहां के किसानों का झुकाव जुकिनी (जुगनी) नामक सब्जी की ओर भी बढऩे लगा है। सेहत के लिए फायदेमंद जुगनी हरी सब्जियों की श्रेणी में आती है। ये रंग व आकार में तुरई की तरह ही होती है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है।  

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टोंक/राजमहल. बनास नदी के खीरा ककड़ी जहां अब तक दिल्ली तक पहचान बनाए हुए है। वहीं अब यहां के किसानों का झुकाव जुकिनी (जुगनी) नामक सब्जी की ओर भी बढऩे लगा है। सेहत के लिए फायदेमंद जुगनी हरी सब्जियों की श्रेणी में आती है। ये रंग व आकार में तुरई की तरह ही होती है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है।

यूं हुई तैयार: किसानों ने बताया कि
कद्दू व लौकी के पौधों में कलम रोपण करके ये पौध तैयार की गई है। करीब एक साल से किसान यहां भी इसकी पैदावार करने लगे हैं।

कई पौषक तत्व होते हैं: जुगनी में पानी की मात्रा के साथ फाइबर, विटामिन बी6, राइबो फ्लेविन, फोलेट, विटामिन सी, विटामिन के आदि खनिज तत्वों के साथ साथ एंटी ऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इसके नियमित सेवन से शरीर का वजन संतुलित रहता है। ऐसे में दिल्ली तक इसकी मांग बढऩे लगी है। बनास नदी के पेटे में इस बार 100 हैक्टेयर में जुकिनी की खेती की गई है। इसका मंडी थोक भाव 25 से 30 रुपए प्रति किलो है। यह खुदरा भाव में 40 से 50 रुपए किलो तक बिकती है।

बीसलपुर बांध के डाउन स्ट्रीम में पिछले कई सालों से खीरा ककड़ी, लोकी, कद्दू, टमाटर, मिर्च, करेला आदि की खेती होती है। पिछले कुछ सालों से किसान जुकिनी की खेती में भी रुचि दिखाने लगे हैं। यहां अक्टूबर में खीरा ककड़ी की खेती शुरू हो जाती है। जो डेढ़ से दो माह के अंतराल में तैयार फसल तोडऩा शुरू कर देते हैं। वहीं मार्च, अप्रेल तक करेला व मिर्च तोडऩा शुरू कर देते हैं, जो जुलाई अगस्त तक जारी रहती है।
प्राकृतिक खाद मिलती है: जिले की बनास नदी का पानी जहां तीन जिलों के लोगों के कंठतर कर रहा है। वहीं इस पानी से तैयार हो रही सब्जियां देश की राजधानी तक महक रही है। टोंक जिले की सब्जियां दिल्ली मंडी तक बिक रही है। इसका कारण यहां शुद्ध पानी है। इसमें बड़ी बात यह भी है कि बीसलपुर बांध और बनास नदी में पानी के साथ कई तरह की खाद भी बहकर आती है।

यहां भी होती है तरकारी
कृषि उद्यान विभाग के मुताबिक सब्जी की खेती शहर में वजीरपुरा, लहन, महादेववाली, कम्पू, बनास नदी, पक्का बंधा, सरवराबाद, सईदाबाद, श्योपुरी में होती है। जबकि प्रमुख रूप से ङ्क्षटडा पचेवर, पराना, डिग्गी, खुरथल, चौसला, चिरोंज, बनेठा, ककोड़ में होता ही।

यूं होती खेती
सब्जी की खेती के लिए किसान पहले जमीन हकाई और बाद में बुवाई करते हैं। अन्य फसलों की भांति ही नियमित रूप से सब्जी की भी देखरेख करते हैं। इन इन दिनों जिले में ङ्क्षटडा, मूली, गाजर, खीरा, टमाटर व गोबी की बुवाई की जा रही है।

लगातार बढ़ रही है खेती: जिले में सब्जी की खेती लगातार बढ़ रही है। एक दशक पहले तक यह 3 हजार हैक्टेयर में थी, जो अब 4 हजार हैक्टेयर तक पहुंच गई है। इसका कारण सब्जी के दाम अच्छे मिलना है।

फैक्ट फाइल
बनास व अन्य पेटा काश्तत में खेती का रकबा- 1200 हैक्टेयर
सब्जी से जुड़े हैं परिवार- 10 हजार
कारोबार होता है- 20 करोड़ का
सब्जियां के प्रकार है – 20
एक दशक में रकबा बढ़ा – 1000 हैक्टेयर


इतने हैक्टेयर में होती है सब्जियां
सब्जी हैक्टेयर
ङ्क्षटडा 700
खीरा 250
मिर्च 250
टमाटर 300
करेला 150
गोबी 200