तीन दशक पूर्व अजमेर जिले में जलापूर्ति को लेकर भूमिगत बिछाई गई बीसलपुर अजमेर पाइप लाइन मंगलवार देर शाम क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ों गैलन पानी व्यर्थ बह गया। इधर, सूचना पर देर रात डिवाटङ्क्षरग कार्य शुरू कर मरम्मत कार्य शुरू किया गया।
टोडारायसिंह . तीन दशक पूर्व अजमेर जिले में जलापूर्ति को लेकर भूमिगत बिछाई गई बीसलपुर अजमेर पाइप लाइन मंगलवार देर शाम क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ों गैलन पानी व्यर्थ बह गया। इधर, सूचना पर देर रात डिवाटङ्क्षरग कार्य शुरू कर मरम्मत कार्य शुरू किया गया।
उल्लेखनीय है कि तीन दशक पूर्व 1993 में अजमेर जिले में जलापूर्ति को लेकर बीसलपुर से अजमेर के लिए 1500 एमएम की भूमिगत सीमेंट पाइप लाइन बिछाई गई थी। मंगलवार देर शाम 6 बजे थड़ोली व भासू के मध्य उक्त पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। सूचना पर मेंटीनेंस टीम ने मौके पर पहुंचकर थड़ोली से पङ्क्षम्पग बंद करवाने के साथ वॉल्व को बंद करवाया तथा डी-वाटङ्क्षरग कार्य शुरू किया गया। डीजल पम्प सेट देर रात तक डिवाटङ्क्षरग कार्य जारी रहा।
इधर, पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ों गैलन पानी व्यर्थ बहने आस पास खेत व सड$क किनारे गड्ड़ों में पानी भर गया। मेंटीनेेंस प्रभारी रामकिशन जाट ने बताया कि बुधवार सुबह जेसीबी मशीन से खुदाई कार्य तथा क्षतिग्रस्त पाइप को हटाने का कार्य शुरू किया गया। दिनभर मेंटीनेेंस कम्पनी के कार्मिक दिनभर मरम्मत कार्य में जुटे रहे। उन्होंने बताया कि अजमेर पाइप लाइन का मरम्मत कार्य देर रात तक पूरा हो पाएगा। इधर, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अजमेर के लिए दूसरी स्टील पाइप लाइन से निरंतर जलापूर्ति होने से आंशिक जलापूर्ति ही प्रभावित रहेगी।
स्टील लाइन बिछे तो बने बात
प्रदेश की सबसे बड़ी बीसलपुर पेयजल परियोजना के प्रारम्भ में अजमेर जिले में जलापूर्ति को लेकर सन् 1993 में पाइप लाइन बिछाई। जहां तत्कालीन टेण्डर प्रक्रिया में स्टील व सीमेंट दोनों पाइप लाइन बिछाने को लेकर निविदा आमंत्रित की गई। लेकिन तत्कालीन सरकार ने बचत को लेकर स्टील की जगह सीमेंट पाइप लाइन बिछाई गई। भूमिगत बिछाई गई सीमेंट पाइप लाइन का एक दशक गुजरने के साथ ही आए दिन टूटने का सिलसिला शुरू हुआ। जिससे अजमेर शहर व ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति प्रभावित होने लगी। विभाग ने पेयजल की बढ़ती मांग व टूटने की समस्या से निजात पाने के लिए गत 2012 में थड़ोली पम्प से अजमेर के लिए 1500 एमएम की स्टील पाइप लाइन डाली गई। हालांकि पुरानी पाइप लाइन गर्मी के मौसम में आए दिन टूटती रहती है। जहां विभाग को मेंटीनेंस के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च करना पड़ रहा है।