राजपूत काल में स्थापत्य मूर्ति व चित्रकला की अद्भूत मिसाल के रूप में बनी चौबीस खम्बो की छतरी सार संभाल के अभाव में अपना अस्तित्व होती हुई नजर आ रही है।
बनेठा. कस्बा स्थित छतरियो के मोहल्ले में राजपूत काल में स्थापत्य मूर्ति व चित्रकला की अद्भूत मिसाल के रूप में बनी चौबीस खम्बो की छतरी सार संभाल के अभाव में अपना अस्तित्व होती हुई नजर आ रही है। छतरी पर जगह-जगह दरारें पड़ गई है। तथा कई प्रकार के पेड़ पौधे उग आने से दरारों आ गई हैं, जिससे ऐतिहासिक छतरी क्षतिग्रस्त होने के कगार पर आ गई हैं।
छतरी चौबीस खम्बों पर बनी हुई है तथा इसमे भगवान शिव की पिण्ड मूर्ति है, जिस पर आकर्षक चित्रकारी है। गौरतलब है कि कस्बे के टोंक मार्ग पर पहाड़ी के ऊपर भी एक पुरातन कालीन छतरी बनी हुई थी, जो टोंक की रसिया की छतरी की तर्ज पर निर्मित थी, जिसे इसी की समकालीन बसिया की छतरी के नाम से जाना जाता था। वह 2 साल पहले बनेठा में आए तूफान की भेंट चढ़ कर गिर चुकी है। पुरातत्व विभाग की अनदेखी से सार संभाल के अभाव में ऐतिहासिक धरोहर नष्ट होती जा रही है।
नहीं भरेगा एकादशी मेला
टोंक. जिलेभर में शुक्रवार को जलझूलनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। कोरोना के कारण सरकार की ओर से जारी गाइड लाईन के अनुसार इस दिन निकलने वाली ठाकुरजी की डोळ यात्राओं पर रोक रहेगी। साथ ही मेला सहित सभी बड़े आयोजनों पर भी रोक रहेगी। श्रद्धालुओं द्वारा एकादशी पर व्रत उपहास कर दान पुण्य किए जाएंगे।
मालपुरा. उपखण्ड के डिग्गी में शुक्रवार को जलझुलनी एकादशी पर आयोजित होने वाला मेला राज्य सरकार की त्रिस्तरीय जनअनुशासन दिशा निर्देश 5.0 तथा जिला कलक्टर के आदेशानुसार उपखण्ड मजिस्ट्रेट एवं इन्सिडेंट कमांडर रामकुमार वर्मा द्वारा मेले व पर्व पर आदेश जारी कर स्थगित किया गया। उपखण्ड क्षेत्र में जलझुलनी एकादशी पर जगह-जगह निकाले जाने वाले भगवान की डोळ यात्रा एवं डिग्गी एकादशी पर आयोजित होने वाले रंगारंग सास्ंकृतिक कार्यक्रम एवं डोळ यात्रा मेलों पर उपखण्ड मजिस्ट्रेट रामकुमार वर्मा द्वारा आदेश जारी क्षेत्र में सभी प्रकार के मेले व डोल यात्राओं पर रोक लगा दिए जाने के चलते सभी आयोजन स्थगित किए गए है।