
फोटो: पत्रिका
Unique Preidiction: टोंक जिले के आवां कस्बे में मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को पारंपरिक दड़ा महोत्सव का आयोजन पूरे उत्साह और आस्था के साथ किया गया। गोपाल चौक में आयोजित इस अनूठे आयोजन में आवां सहित बारहपुरों से आए हजारों खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने भाग लिया। करीब दो घंटे तक चले इस खेल में 70 किलो वजनी दड़े को निर्धारित दिशा में पहुंचाने के लिए जमकर जोर आजमाइश की गई।
दड़ा महोत्सव को लेकर मान्यता है कि यदि दड़ा दूनी गोल पोस्ट की ओर जाता है तो आने वाला साल सुकाल का संकेत देता है, जबकि यदि यह अखनिया की ओर चला जाए तो अकाल की आशंका मानी जाती है। इस बार कड़ी मशक्कत के बावजूद दड़ा किसी भी दिशा में नहीं गया और अंत में गढ़ में ही चला गया। इस स्थिति को किसानों ने न सुकाल और न अकाल बल्कि सामान्य वर्ष का संकेत माना।
हालांकि दड़ा बेनतीजा रहने से किसानों में थोड़ी निराशा जरूर दिखी, लेकिन इस बात का संतोष भी रहा कि अकाल का संकेत नहीं मिला। किसानों का मानना है कि आने वाला साल मेहनत और संतुलन के साथ बीतेगा और हालात सामान्य रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान सरपंच दिव्यांश एम. भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि दड़ा दूनी दरवाजे वाले पोस्ट की ओर नहीं गया, इसका मतलब यह नहीं है कि अकाल आएगा। इसका संदेश यही है कि यह वर्ष अकाल रहित और सामान्य रहेगा। उन्होंने किसानों से धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखने की अपील की।
दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर 70 किलो वजनी दड़े की विधिवत पूजा की गई। इसके बाद दड़े को गढ़ के चौक में रखा गया, जहां धक्का-मुक्की और जोर आजमाइश का यह पारंपरिक और अनोखा खेल शुरू हुआ।
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Updated on:
15 Jan 2026 09:16 am
Published on:
15 Jan 2026 09:16 am
