
टोंक. सरकार भले ही टीबी (क्षय) रोगियों का इलाज मुफ्त में करने का दावा कर वाहवाही लूट रही हो, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें दवा के अलावा कुछ नहीं मिल रहा।
टोंक. सरकार भले ही टीबी (क्षय) रोगियों का इलाज मुफ्त में करने का दावा कर वाहवाही लूट रही हो, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें दवा के अलावा कुछ नहीं मिल रहा। शहर के टीबी अस्पताल में आ रहे मरीजों की स्थिति तो ये है कि उन्हें एक्स-रे कराने के लिए 3 किलोमीटर दूर सआदत अस्पताल आना पड़ता है।
जबकि क्षय रोगी में शारीरिक दुर्बलता इतनी होती है कि वह ये दूरी वह पैदल तय नहीं कर सकता। ऐसे में परिजनों को करीब 150 रुपए ऑटो के खर्च कर सरकारी योजना के तहत मुफ्त का एक्स-रे कराने आना-जाना पड़ता है। इससे दोनों अस्पतालों का फेरा लगाने में ही मरीजों के पसीने छूट रहे हैं।
एक्स-रे की सर्वाधिक जरूरत टीबी रोगियों को ही होती है। इलाज के दौरान प्रत्येक माह एक्स-रे रिपोर्ट के आधार पर दवा का असर होने नहीं होने की जानकारी मिलती है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना के तहत चतुर्भुज तालाब स्थित टीबी अस्पताल में भी एक्स-रे सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।
इसके लिए सुसज्जित कक्ष में मशीन लगाई गई, लेकिन कुछ दिनों बाद ही रेडियोग्राफर व अन्य कार्मिकों के तबादले होने से मशीनें अनुपयोगी हो गई। क्षय रोग अधिकारी के एक्स-रे जांच लिखने पर मरीज सआदत अस्पताल पहुंचता है, तब तक अस्पताल का आउटडोर समय बीत जाता है।
अस्पताल की एक ही पारी में एक्स-रे सुविधा उपलब्ध होने से मरीज महंगे दामों पर बाजार में एक्स-रे कराने को मजबूर हंै।
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