
irrfan khan: दुनिया भर में टोंक नाम रखने वाले प्रसिद्ध अभिनेता इरफान खान का निधन
टोंक. दुनियाभर में टोंक का नाम रोशन करने वाले मशहूर अभिनेता इरफान खान का मुम्बई के कोकिलोबन अस्पताल में इंतकाल हो गया। वे 53 वर्ष के थे। उनके इंतेकाल से टोंक में गम छा गया। कोरोना महामारी के चलते लगाए गए कफ्र्यू में लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से खिराजे अकीदत पेश की। अपनी अदाकारी से इरफान ने बॉलीवुड ही नहीं हॉलीवुड में भी गहरी छाप छोड़ी।
आंखों से अदाकारी में माहिर और अलग तरह से डायलॉग डिलिवरी के लिए इरफान खान पहचाने जाते थे। इरफान को ब्रेन ट्यूमर था। गौरतलब है कि गत शनिवार को ही उनकी मां सईदा बेगम का इंतकाल हो गया था। वे 95 साल की थीं और जयपुर में रहती थीं। लॉकडाउन और खुद की तबीयत खराब होने के कारण इरफान मां के जनाजे में शामिल नहीं हो पाए थे। उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए मां को आखिरी विदाई दी थी।
इरफान की मौत पर अंजुमन ,सोसायटी, खानदान-ए-अमीरिया के संरक्षक नवाब इरफान अली खां, हामिद अली खां आदि ने खिराजे अकीदत पेश की है। टोंक की गलियों में खूब खेले हैं इरफान नवाब परिवार से जुड़े नवाबजादा हामिद अली खां, साहबजादा अब्दुल मुनीम खान, आसिफ खान, जुनेद असलम आदि ने बताया कि अभिनेता इइरफान खान का बचपन टोंक में गुजरा। उनका ननिहाल शाही जामा मस्जिद के पीछे हकीम बुकरात के यहां था। वहीं उनका भी मकान था। इरफान खान क्रिकेट खेलते थे। कचहरी दरवाजा तथा बड़ा कुआं क्षेत्र की गलियों में दोस्तों के साथ खूब खेले हैं। बचपन में टोंक में क्रिकेट भी खेली है।
इरफान के परिवार में पत्नी सुतापा देवेंद्र सिकंदर और दो बेटे बाबिल और अयान हैं। सात जनवरी 1967 को जन्मे इरफान का पूरा नाम साहबजादा इरफान अली खान था। वे क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन पिता चाहते थे कि वे फैमिली बिजनेस संभाले।
हालांकि इरफान को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में जाने का मौका मिल गया और यहीं से उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ। छोटे पर्दे पर उनकी शुरुआत श्रीकांत और भारत एक खोज से हुई। इरफान को पान सिंह तोमर के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया। कला के क्षेत्र में उन्हें देश के चौथे सबसे सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा गया। 1988 में आई मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे से इरफान अपना फिल्मी सफर शुरू किया था।
Published on:
29 Apr 2020 04:22 pm
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