
टोंक. अजमेर सम्भागीय आयुक्त हनुमानसहाय मीना की अध्यक्षता में जिला कलक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला हुई।
टोंक. अजमेर सम्भागीय आयुक्त हनुमानसहाय मीना की अध्यक्षता में शुक्रवार को डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें टोंक व भीलवाड़ा जिले के एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार एवं राजस्व कर्मचारी शामिल हुए। सम्भागीय आयुक्त ने कहा कि हमारा देश गांवों में बसता है और गांवों में आजीविका का प्रमुख साधन खेती है।
किसान के लिए उसकी भूमि ही रोजगार का जरिया है। इससे वह परिवार का पालन-पोषण करता है। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन कार्यक्रम का उद्देश्य गांवों में भूमि सम्बन्धी लिटिगेशन (मुकदमेबाजी) के मामलों को कम करना है। उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार एवं राजस्व से जुड़े कर्मचारी इस कार्यक्रम के प्रति सीखने का भाव रख कार्य करें। उनका लक्ष्य किसान का हित होना चाहिए।
अतिरिक्त भू-प्रबन्ध आयुक्त राजेन्द्र वर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसी पारदर्शी भू-प्रबन्ध व्यवस्था को लागू करने सम्बन्धी है, जिससे कार्यक्रम के अंतिम उद्देश्य कन्क्ल्यूजिव टाइटलिंग, टाइटल गारन्टी व टाइटल इन्श्योरेन्स की प्राप्ति सम्भव हो सके। सेवानिवृत्त आईएएस जी. एस. संधु ने कहा कि आज प्रौद्योगिकी का लाभ हर व्यक्ति ले रहा है। फिर किसान भी इससे अछूता नहीं रहना चाहिए।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला कलक्टर लोकेश गौतम, भू-प्रबन्ध अधिकारी जयनारायण मीना, एडीएम भीलवाडा एल. आर. घूघरवाल आदि मौजूद थे।
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