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मंडी में अव्यवस्थाओं से परेशान हैं किसान, नहीं मिल पा रहे मजदूर

बाहर से माल लेकर आने वाले किसानों को दिनभर इंतजार करना पड़ता है। माल अधिक होने पर तो नम्बर नहीं आता। ऐसे में माल की सुरक्षा की समस्या भी रहती है।  

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मंडी में अव्यवस्थाओं से परेशान हैं किसान, नहीं मिल पा रहे मजदूर

मंडी में अव्यवस्थाओं से परेशान हैं किसान, नहीं मिल पा रहे मजदूर

उनियारा. उपखंड की सबसे बड़ी कृषि मंडी में प्रतिदिन 1000 बोरी की आवक हो रही है। बम्पर पैदावार के चलते किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। वहीं मंडी में अच्छी आवक से व्यापारी भी खुश हैं। लेकिन अगर क्षेत्र में सरसों की आवक को देखा जाए तो यह उसका एक बटा चार हिस्सा भी नहीं है। क्योंकि किसान कृषि मंडी में अपनी ङ्क्षजस को देना ज्यादा उचित नहीं समझते और बाहर ही व्यापारियों को देने में प्राथमिकता देते हैं।

कृषि मंडी में प्रतिदिन वैसे तो ङ्क्षजसों की बोली लगती है। लेकिन वह दोपहर बाद ही शुरू की जाती है। बाहर से माल लेकर आने वाले किसानों को दिनभर इंतजार करना पड़ता है। माल अधिक होने पर तो नम्बर नहीं आता। ऐसे में माल की सुरक्षा की समस्या भी रहती है।

रात को ही निकालकर व्यापारियों को पहुंचा देते
व्यापारी गण प्रतिदिन किसानों की ङ्क्षजसों को लेने के लिए मंडी में पहुंचते भी है, लेकिन फिर भी किसानों का रुख मंडी की ओर कम ही रहता है। क्योंकि मंडी में एक निश्चित समय में ही कार्य किया जाता है, जो कि किसानों को परेशानी देता है। किसान अपनी ङ्क्षजस को रात्रि में भी निकला कर उसे बेचने के लिए व्यापारियों के पास पहुंचता है।

पीपलू. उपखण्ड मुख्यालय सहित आस-पास के क्षेत्रों में बदलते मौसम की मार से ने किसानों के चेहरे पर ङ्क्षचता की लकीरें खीच रखी हैं। किसान जैसे तैसे अपनी फसल को कटाई कर समेटने में लग रहे हैं। हालांकि अभी तक तेज बारिश व ओलावृष्टि तो नहीं हुई, लेकिन पिछले दिनों में तीन से चार बार बूंदाबांदी होने से ङ्क्षचता अधिक बढ़ गई। किसानों ने बताया कि फसल को समेटने के लिए मजदूर के नहीं मिलने पर घर के सारे सदस्य ही कटी हुई फसल को समेटने में लग रहे हैं। किसानों ने बताया कि इस समय बरसात हो गई तो पशुओं के लिए चारे का संकट हो जाएगा।

समय पर नहीं मिल रहा पैसा

कई किसानों ने बताया कि उनके ङ्क्षजस को मंडी में बोली लगवा कर व्यापारी गण अपने-अपने दुकानों पर ले जाते हैं और वहां जाकर तुलवाते हैं। जबकि अक्सर यह देखा गया है कि कृषि मंडी में बोली लगने के बाद ङ्क्षजस मंडी परिसर में ही तुलकर किसानों उसका दाम वहीं दिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
इसलिए किसान ज्यादातर अपनी ङ्क्षजस को बाहरी बेचना पसंद करता है।

नहीं मिल पा रहे मजदूर
मौसम की मार इस कदर है कि आनन-फानन में किसान फसल को घर लाकर डालने की जल्दबाजी कर रहे हैं। मजदूरों को लावणी के लिए मुंह मांगी मजदूरी देनी पड़ रही है, लेकिन फिर भी मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं।

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