
राजमहल. जयपुर, अजमेर जिले सहित सैकड़ों गांव व कस्बों की प्यास बुझाने वाले राज्य के बड़े बांधों में से एक बीसलपुर बांध की सुरक्षा की ओर सरकार का ध्यान नहीं है।
राजमहल. जयपुर, अजमेर जिले सहित सैकड़ों गांव व कस्बों की प्यास बुझाने वाले राज्य के बड़े बांधों में से एक बीसलपुर बांध की सुरक्षा की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। ये बांध वर्षों बाद भी निजी सुरक्षा एजेंसी के चंद गार्डों के संरक्षण में है। इन सुरक्षा गार्डों के पास दो बंदूकें हैं, लेकिन ये भी किराए की है। सुरक्षा गार्डों में कई वृद्ध हो चुके हैं। बांध परियोजना की ओर से बांध स्थल पर पुलिस, आरएसी या केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) लगाने के लिए सरकार को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
दो किलोमीटर दूर पुलिस चौकी
बांध बनाने के दौरान बांध स्थल से दो किलोमीटर दूर पुलिस चौकी स्थापित की गई थी। यहां मात्र दो पुलिसकर्मी नियुक्त रहने से ये चौकी भी महज दिखावा है। इन दो पुलिसकर्मियों के पास किसी प्रकार के हथियार नहीं है ना ही कोई वाहन। यहां तक कि टेलीफोन की सुविधा भी नहीं है। चौकी परिसर से दूर-दूर तक किसी निजी या बीएसएनएल मोबाइल फोन के टावर भी काम नहीं करते। इससे बांध पर होने वाली घटना-दुर्घटनाओं के दौरान लोगों व सुरक्षा गार्डों को सूचना देने के लिए चौकी तक पैदल आना-जाना पड़ता है।
रात में कोई धणी-धोरी नहीं
बीसलपुर बांध चारों तरफ से वन क्षेत्र से घिरा है। बांध तक जाने के लिए परियोजना की ओर से तीन गेट बनाए गए हैं। इनमें गेट संख्या तीन पर केवल दिन में एक सुरक्षा गार्ड रहता है। रात को कोई सुरक्षाकर्मी नहीं रहता। ऐसे में कोई भी बांध तक पहुंचकर बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अजमेर के विशेष जांच दल की ओर से हर वर्ष निरीक्षण किया जाता है।
जांच दल ने 30 दिसम्बर 2016 को भी बांध स्थल का निरीक्षण किया था। इससे पहले जनवरी 2016 में निरीक्षण कर सीसी टीवी लगाने, पुलिस, सीआईएसएफ या फिर आरएसी तैनात करने पर जोर दिया गया था। इसके अलावा रोशनी, वायरलैस सेट, कर्मचारियों के परिचय-पत्र जारी करने आदि के निर्देश दिए गए थे। इसमें से कैमरे व वायरलैस सेट लगाने का कार्य तो पूरा कर दिया, लेकिन सुरक्षा अभी निजी हाथों में ही है।
एक तरफ पत्थर, दूसरी तरफ खाई
बीसलपुर बांध परियोजना की अनदेखी के कारण बांध स्थल तक के रास्ते भी दुर्दशा के शिकार हैं। गेट संख्या तीन से बांध तक जाने वाले वीआईपी रास्ते पर एक तरफ पानी से भरी गहरी खाई है तो दूसरी तरफ पत्थर, मिट्टी, बजरी आदि के ढेर लगे हैं। वाहन चालकों की जरा सी चूक उन्हें मौत के मुंह में ले जा सकती है।
वीआईपी रास्ता होने के बाद भी सड़क पर डामर का नामोनिशान नहीं है। इसी प्रकार बनास नदी-टोडारायसिंह की ओर जाने वाला मार्ग कई दिनों से हादसे का सबब बना हुआ है। जहां ठेकेदार की ओर से महज ग्रेवल बिछाकर लीपापोती कर दी गई। उल्लेखनीय है कि पिछले साल बांध से पानी की निकासी के दौरान यहां की सड़क बह गई थी।
महीनों आवाजाही बंद रहने के बाद कुछ दिनों पहले ही सानिवि की ओर से सड़क के खड्ढे भरकर ग्रेवल बिछाई गई है। इधर, बांध के पवित्र दह के पास बनास में बनाया गए रास्ते के किनारे कई स्थानों पर गहरी खाई है। इससे आए दिन वाहनों के बजरी में फंसने के साथ ही दह के पानी में गिरने का अंदेशा बना रहता है।
बारिश में है होती परेशानी
जुलाई से अक्टूबर तक बारिश के दौरान बांध स्थल पर पर्यटकों की भीड़ रहती है। इस दौरान पुलिस व आरएसी के जवानों के अभाव में निजी सुरक्षा गार्डों को मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार लोगों की भीड़ बांध की मुख्य दीवार तक पहुंच जाती है। जहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि यहां लोगों का प्रवेश निषेध है, लेकिन चंद निजी सुरक्षा गार्ड इन्हें नहीं रोक पाते।
सरकार ने नहीं दिखाई रूचि
&बांध पर पुलिस या सीआईएसएफ लगाने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन सरकार की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे सुरक्षा की जिम्मेदारी अभी निजी सुरक्षा गार्डों पर ही है।
आर. सी. कटारा, अधिशासी अभियंता बीसलपुर बांध परियोजना देवली।
Published on:
23 Apr 2017 09:49 am
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