टोंक. राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में प्रदेश सहित जिला व ग्रामीण क्षेत्रों में निजी अस्पतालों की गत 18 मार्च चल रही हड़ताल शनिवार को 8 वें दिन भी जारी रही। हड़ताल से चिरंजीवी व आरजीएच सहित अन्य योजनाओं में बीमित मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में भार बढऩे से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। लेकिन सरकारी अस्पताल में भी मरीजों को राहत नहीं मिल रही है। वहां भी इलाज के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
निजी चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में सआदत अस्पताल सहित जिले के पीएचसी व सीएचसी के सरकारी चिकित्सक भी सुबह दो घंटे कार्य का बहिष्कार किया। इस दौरान मरीजों को परामर्श के लिए परेशान होना पड़ा रहा है। इधर, अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ रविन्द्र ङ्क्षखची ने बताया कि निजी अस्पतालों की हड़ताल के समर्थन में शनिवार से घर पर भी ओपीडी की सेवाएं बन्द कर दी गई है। इस दौरान कोई भी सरकारी चिकित्सक अगामी दिशा निर्देशों तक घर पर भी मरीजों को परामर्श नही देंगे। उन्होने बताया कि 29 मार्च को सभी राजकीय चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
सर्जरी के बढ़े केस:
निजी अस्पतालों की हड़ताल के कारण सआदत अस्पताल में अब सर्जरी के केस बढऩे लगे हैं। अधिकांश ऑपरेशन केस ट्रोमा यूनिट में आ रहे हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ अरविन्द लूनिवाल ने बताया कि अन्य दिनों दिवस की अपेक्षा पांच से सात सर्जरी के केस बढ़ रहे है। ट्रोमा ओटी सप्ताह में गुरुवार और शनिवार को होती है। इसके अलावा जनरल व नेत्र सर्जरी के केस में भी थोडी बढ़ोतरी हुई है।
निजी में होते है प्रतिदन 35 से 40 ऑपरेशन:
प्राइवेट अस्पताल एसोसिशन संघ (उपचार) के जिलाध्यक्ष डॉ राजीव बंसल ने बताया कि जिले में करीब 4 दर्जन से अधिक निजी अस्पताल है। सरकार की चिरंजीवी व आरजीएच योजना में सर्वाधिक 90 प्रतशित तक ऑपरेशन निजी अस्पतालों में होते है। इन अस्पतालों में सिजेरियन डिलेवरी के अलावा प्रतिदिन 35 से 40 विभिन्न प्रकार के मेजर ऑपरेशन किए जाते है। जिनमें ऑर्थो, आई, ईएनटी, जनरल सर्जरी आदि शामिल है। बंसल ने बताया कि 20 से 25 केस सिजेरियन डिलीवरी भी प्रतिदिन होती है।
ऑपरेशन के बाद मर्ज बढ़ा, अब दिखाने की समस्या
देई-नैनवां के पास मोडछा गांव से आए मोहन लाल ने बताया कि यूरिन में परेशानी आने के कारण कुछ दिनों पूर्व एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन करवाया था। वहां से छुट्टी के बाद अस्पताल में हड़ताल हो गई। इस दौरान यूरिन में परेशानी हो गई।
जांच नहीं दिखा पाए
अस्पताल में सोप से आए जगदीश ने बताया कि पत्नी सुमित्रा के खांसी व सांस में तकलीफ होने के कारण दिखाने आए थे, लेकिन सुबह दो घंटे की हड़ताल के कारण दोपहर 1 बजे नम्बर आया। चिकित्सक ने जांच करवाई थी, लेकिन तीन बजे बाद जांच मिली है, लेकिन चिकित्सक को अब कल दिखाने वापस आना होगा।
सुबह से कतार में खड़े हैं
नगर फोर्ट के देवपुरा गांव से आई रसीला देवी ने बताया कि उसको पेट दर्द, वायरल व चक्कर की शिकायत थी। पहले निजी अस्पताल में दिखाया था। सात दिन बाद बुलाया था, लेकिन हड़ताल के कारण चिकित्सक ने देखने से मना कर दिया। उसका नाम चिरंजीवी योजना में बीमा भी है।
दो घंटे किया इंतजार, फिर भी नहीं मिला उपचार
दूनी से आए पीडि़त रोगी रजनीश मीणा ने बताया कि उसको टाइफाइड की शिकायत है। पेन डाउन हड़ताल के कारण चिकित्सक ओपीडी में अपनी सीट पर नहीं मिले। दो घंटे ओपीडी शुरू होने के बाद भी दिखाने के लिए चिकित्सकों को ढूढऩा पड़ रहा है। लेकिन चिकित्सक नहीं मिल रहे।
उनियारा. चिकित्सकों की हड़ताल के चलते उनियारा चिकित्सालय के सभी सरकारी चिकित्सक 2 घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर रहे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी रङ्क्षवद्र खींची ने बताया कि सभी चिकित्सकों ने सुबह 9:00 बजे से 11:00 बजे तक पेन डाउन हड़ताल रखी।
मालपुरा. मुख्यालय पर शनिवार को राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में एक तरफ जहां निजी अस्पताल पिछले 6 दिनों से बंद है। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. अनिल मीणा ने बताया किराजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह 9 से 11 बजे तक चिकित्सकों ने कार्य का बहिष्कार किया। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाओं को ही जारी रखा गया। उधर, अस्पताल में 2 घंटे कार्य बहिष्कार के चलते अस्पताल में मरीजों की काउंटर पर भीड़ लगी रही। 11 बजे चिकित्सकों की ओर से इलाज शुरू करने पर चिकित्सकों के पास रोगियों की इलाज करवाने के लिए भीड़ लगी रही। चिकित्सक डॉ अंकित जैन ने बताया कि राइट टू हेल्थ के विरोध में शहर के सभी निजी चिकित्सालय बंद है और साथ में सोनोग्राफी सेंटर बंद है।