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नौकरी लगी तो हुआ अफसोस: ललक ने सिखाया पढऩा-लिखना

उच्च शिक्षा बेहतर है। लेकिन जीवन में इतना तो आना चाहिए कि पढ़ और लिखा जा सके। इसकी पीड़ा तब होती है जब कोई ताना मारे या किसी अन्य से पढय़ा जाए। इस पर अपने पढ़े-लिखे नहीं होने पर महज अफसोस ही हो सकता है।  

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नौकरी लगी तो हुआ अफसोस: ललक ने सिखाया पढऩा-लिखना

नौकरी लगी तो हुआ अफसोस: ललक ने सिखाया पढऩा-लिखना

टोंक. पढऩे की उम्र नहीं होती। लेकिन पढ़ाई के लिए मन में ठान लेना जरूरी है। अनपढ़ रहने का ऐसा ही मलाल था टोंक निवासी कमला को। कमला को भी पढ़ाई का अहसास तब हुआ जब उनके पति की मृत्यु के बाद उन्हें अनुकम्पा नौकरी मिली। पढ़ाई नहीं कर पाने की वजह से उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिल पाई। ऑफिस में कार्य करते समय उन्हें पढ़ाई नहीं करने का मलाल हुआ।

तब उन्होंने यह पीड़ा बताई उनके मकान में किराए से रहने वाली अनुपमा तिवारी को। अनुपमा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में ङ्क्षहदी भाषा की संदर्भ व्यक्ति के रूप में कार्यरत है। अनुपमा ने बताया कि 6 वर्ष पहले वे जिस घर में रहती थी उस घर की मालकिन कमला है। उनके पति का देहांत हो गया था। वे बीएसएनएल ऑफिस में थे।

उनकी पत्नी कमला को अनुकंपा पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति मिली। पढ़ी-लिखी नहीं होने पर उन्हें ऑफिस में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने ऐसी स्थिति में पढऩा सीखने का मन बनाया। गौरतलब है कि शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। पेश इसको लेकर एक रिपोर्ट।

किसी ने पढऩे का मौका नहीं दिया
कमला से जब पढ़ाई की बात की तो पता चला कि परिवार में उसे किसी ने पढऩे ही नहीं दिया। किसी को यह डर था कि वह उनके लिखे गए किसी शब्द को पढ़ लेगी। परिजनों ने भी नहीं कहा कि वह कुछ पढ़ ले। ऐसे में उसे पीड़ा और अधिक यह भी थी कि उसे किसी ने सीखने नहीं दिया। अनुपमा ने बताया कि उसने धीरे-धीरे पढऩा शुरू कर दिया। इसके लिए अनुपमा ने राजस्थान पत्रिका की हैङ्क्षडग पढऩे को कहा। जब भी मौका मिले तब शब्दों को जोडकऱ खबरें पढ़ लिया करे।

मन की पीड़ा की बयान

एक शाम अनुपमा से कमला ने कहा कि क्या वे उन्हें पढऩा सिखा देगी। इस पर पहले तो अनुपमा चौंकी। लेकिन बाद में उन्हें पढ़ाने का तय कर लिया। अगले दिन घर लौटकर आने पर कमला अपनी बेटी की ग्राफ की कॉपी और पैन ले कर उनके कमरे में आ गई। इसके बाद उसे स्लिप पैड निकालकर दिया और उस पर कमला का नाम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम लिखकर दे दिया।

प्रतियोगिता में मिला प्रथम स्थान
उन्हीं दिनों बीएसएनएल की ओर से साक्षरता दिवस पर एक सुलेख प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कमला ने भी भाग लिया और प्रथम स्थान प्राप्त किया। कमला को जीवन में पहली बार प्रमाण पत्र और मूमेंटो से सम्मानित होने का अवसर मिला।


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