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तीन चौकियों वाला सदर थाना ही चौकी परिसर से हो रहा संचालित

सदर थाना स्थापित होने के बाद से भवन अभाव में निवाई थानान्तर्गत संचालित वनस्थली चौकी भवन में संचालित हो रहा है। जिससे थाने में कार्यरत पुलिस अधिकारी तथा अन्य पुलिस कर्मियों को भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  

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तीन चौकियों वाला सदर थाना ही चौकी परिसर से हो रहा संचालित

तीन चौकियों वाला सदर थाना ही चौकी परिसर से हो रहा संचालित

निवाई. राज्य में कानून व्यवस्था एवं आमजन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले पुलिस अधिकारी और कांस्टेबल थाना भवन व सरकारी निवास नहीं मिलने से खुद ही अस्त व्यस्त नजर आ रहे है। सूत्रों के अनुसार उपखंड क्षेत्र में बढ़ती अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने निवाई पुलिस वृत्ताधिकारी क्षेत्र में वर्ष 2018 में निवाई सदर थाना स्थापित कर दिया है।


लेकिन सदर थाना स्थापित होने के बाद से भवन अभाव में निवाई थानान्तर्गत संचालित वनस्थली चौकी भवन में संचालित हो रहा है। जिससे थाने में कार्यरत पुलिस अधिकारी तथा अन्य पुलिस कर्मियों को भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए सदर थाने की घोषणा कर थाने में सम्पूर्ण स्टाफ दे दिया है।

लेकिन असुविधाओं के चलते पिछले पांच वर्षों से सदर थाना वनस्थली चौकी भवन में संचालित है। चौकी परिसर में एक भी सरकारी आवास नहीं होने से थाने में तैनात थानाधिकारी और समस्त पुलिस कार्मिकों को थाने से करीब तीन से पांच किलोमीटर दूर रहना पड़ रहा है। आपात स्थिति में तत्काल आवश्यकता पडऩे पर अधिकारी और पुलिस कार्मिकों को दूर से आना पड़ता है।

सबसे खात बात यह है कि सदर थाने के अधीन गुंसी, राहोली और जोधपुरिया में पुलिस चौकी संचालित है और सदर थाना वनस्थली चौकी में संचालित है। जबकि राज्य सरकार ने निवाई सदर थाने के लिए ग्राम पंचायत गुंसी में हाईवे पर भूमि आरक्षित कर दी गई है।लेकिन भूमि आरक्षित करने के बाद भी राजस्व विभाग की ओर से सदर थाने के लिए करीब सात बीघा भूमि पांच वर्षों में भी आंवटित नहीं की गई है। भूमि आवंटित होने के बाद ही थाना भवन के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट मिल पाएगा। भूमि आवंटित नहीं होने से सदर थाना वनस्थली पुलिस चौकी में चल रहा है।

सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन होती है प्रक्रिया

प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत ग्रामीण लाभार्थियों को आवास स्वीकृति के लिए जियो टेङ्क्षगग एवं भुगतान सम्बन्धी कार्य आवास सॉफ्टवेयर पर ऑन लाइन सम्पादित किया जाता है। इस कार्य में लाभार्थियों को आवास स्वीकृति की प्रथम किस्त ऑनलाइन उनके बैंक खातों में स्थानान्तरित की जाती है। प्रथम किस्त के रुप में प्रति लाभार्थी को 30 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है।


पीडि़त बोले...कहीं सुनवाई नहीं

इस बारे में पीडि़त मूल ङ्क्षसह, सरदार गुर्जर ने बताया कि इस बारे में पंचायत समिति, थाने, जिला कलक्टर तक को गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रथम किश्त का भुगतान नहीं हुआ है। जिन खातों में राशि ट्रांसफर हुई, उनके खाताधारकों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।


चौकी में थाना और थाने में चौकी
गांव गुंसी में सदर थाने लिए भूमि आरक्षित कर दी गई है, लेकिन भूमि आवंटित नहीं होने से गुंसी थाने की जगह चौकी संचालित है। वहीं निवाई थानान्तर्गत वनस्थली चौकी के भवन में सदर थाना संचालित है।

साइबर क्राइम का मामला

साइबर क्राइम के चलते इन सभी लाभार्थियों की राशि की ऑर्डर शीट स्वत: 26 जून 2018 को जनरेट हो गई। अन्य लोगों के खातों में इनकी राशि चली गई। मामले की जानकारी मिलते ही तत्कालीन विकास अधिकारी रणधीर ङ्क्षसह की ओर से ऐसे अज्ञात लोगों के खिलाफ जिनके खातों में राशि हस्तान्तरित हुई है।13 जुलाई 2018 को थाना मालपुरा में मामला दर्ज करवाया गया, लेकिन मामले में कोई ठोस सुराग नहीं जुटा पाई है।

-पुलिस में दर्ज कराए मामले में कोई सफलता नहीं मिली तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी जिन्होंने आवास बना लिए उन्हें उच्च अधिकारियों से प्राप्त निर्देशों के आधार पर दूसरी किस्त जारी की जा रही है।
सतपाल कुमावत, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, मालपुरा

-इस मामले में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस मामले की कोई पत्रावली मेरे समक्ष नहीं आई है। आज मामला सामने आया है। पत्रावली देखकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
भूराराम खिलेरी, थाना प्रभारी, मालपुरा