
मालपुरा के अविकानगर में विकसित की गई मालपुरा रजाई।
मालपुरा. जयपुरी रजाई की तर्ज पर केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर में वैज्ञानिकों व तकनीकी अधिकारियों ने मोटी मालपुरा ऊन से रजाई बनाने में सफलता प्राप्त की है। केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर के वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग की ओर से ऊन से कम वजन की रजाई बनाने का अनुसंधान कार्य किया गया है।
इस रजाई में कृत्रिम पॉलिएस्टर रेशों के स्थान पर भेड़ से प्राप्त महीन व मोटी ऊन को सम्मिश्रित कर कॉटन के कपड़े में भरा गया है, जिससे रजाई वजन में हल्की होने के साथ-साथ अधिक गर्माहट प्रदान करती है। साथ में ऊन के स्प्रिंगीनेस होने के कारण रजाई की मोटाई भी रहती है।
जबकि कपास या पॉलिएस्टर रेशों द्वारा निर्मित रजाई के उपयोग के उपरान्त मोटाई कम होने के साथ गर्माहट भी कम हो जाती है। मालपुरा रजाई में मोटी ऊन डालने से पर्यावरण के अनुरूप एवं गुणवत्ता की दृष्टि से जयपुरी रजाई से बेहतर साबित मानी जा रही है।
संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि मोटी ऊन का रजाई में प्रयोग करने से क्षेत्र में पाई जाने वाली मोटी ऊन का उपयोग बढ़ेगा व इससे किसानों को ऊन की अधिक कीमत प्राप्त होने से उनका आर्थिक स्तर बढ़ेगा।
निदेशक ने बताया कि मालपुरा रजाई के उत्पादन को बढ़ाने व गुणवत्ता सुधार के लिए सघन अनुसंधान करने के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा लगातार अनुसंधान जारी है। वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डी. बी. शाक्यवार ने बताया कि मालपुरा रजाई के निर्माण में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एन. षनमुगम एवं डॉ. अजय कुमार की टीम ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इस उत्पाद को व्यावहारिक एवं अधिक मात्रा में उत्पादन करने के उद्देश्य से संस्थान की ओर से उत्तरप्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से प्रशिक्षित छात्रों द्वारा अविक्राफ्ट स्टार्टअप स्थापित किया जा रहा है। स्टार्टअप के माध्यम से इस तकनीक को बड़े स्तर पर प्रारम्भ करने की योजना है। उन्होंने बताया कि मालपुरा रजाई का वजन लगभग 975 ग्राम बताया है।
सीलन सहित अन्य दुर्गंन्ध नहीं आती
केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर के वस्त्र निर्माण एवं वस्त्र रसायन विभाग द्वारा मोटी मालपुरा ऊन से निर्मित रजाई की प्रमुख विशेषता यह है कि मालपुरा ऊन की रजाई को ओढकऱ सोने में श्वास लेने में कोई भी तकलीफ नहीं होती,
इस रजाई में बाहरी हवा (ऑक्सीजन) को खींचने की क्षमता है तथा कार्बन डाई ऑक्साइड को बाहर निकालने का कार्य करती है। मालपुरा रजाई को समेटकर रखने के बाद उसे वापस खोलने पर इसके आकार में कोई परिवर्तन नहीं होता है तथा उपयोग के बाद रखने पर इसमें किसी प्रकार की सीलन सहित अन्य दुर्गंन्ध नहीं आती है।
Published on:
11 Jul 2018 08:40 am

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