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बस्सी में बघेरे का लगातार हो रहा है मूमेंट, चार वर्षों से निवाई के दर्जन भर गांवों के लोग हैं भयभीत

गांव बस्सी में इन दिनों बघेरे के लगातार मूमेंट से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। बघेरा पहाडियों से निकलकर आवारा मवेशियों, गांव में घूमने वाले श्वानों, बाडों में बंधे पशुओं का शिकार कर रहा है, जिससे रात में घर से बाहर निकलने में ग्रामीण कतरा रहे है।  

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बस्सी में बघेरे का लगातार हो रहा है मूमेंट, चार वर्षों से निवाई के दर्जन भर गांवों के लोग हैं भयभीत

बस्सी में बघेरे का लगातार हो रहा है मूमेंट, चार वर्षों से निवाई के दर्जन भर गांवों के लोग हैं भयभीत

निवाई. उपखंड क्षेत्र के गांव बस्सी में इन दिनों बघेरे के लगातार मूमेंट से ग्रामीणों में भय व्याप्त है। बघेरा पहाडियों से निकलकर आवारा मवेशियों, गांव में घूमने वाले श्वानों, बाडों में बंधे पशुओं का शिकार कर रहा है, जिससे रात में घर से बाहर निकलने में ग्रामीण कतरा रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि बघेरे ने बुधवार को बस्सी में पहाड़ी के समीप एक सूनी गाय का शिकार कर मार दिया।

इसी प्रकार लादूराम व नाथू के बाड़े में बंधी हुई दो बकरियों का शिकार कर दिया। बघेरे को देखकर बाडे में अन्य बकरियां तेज आवाज में ममियाने लगी। बकरियों के ममियाने की आवाज सुनकर पास में ही सो रहे ग्रामीण उठ गए। और बघेरे की आशंका पर जोर हल्ला करने लगे। जिससे बघेरा बाडे से छलांग लगाकर पलक झपकते ही बस्सी की पहाडियों की ओर चला गया।जिससे ग्रामीण राहत की सांस ली।

नोहटा व बस्सी की पहाडियों पर विचरण:
सरपंच सांवलमल मीणा, किशनलाल, मुरारीलाल, लादूराम, हीरालाल, हंसराज, बनवारीलाल, लेखराज, राजू, नाथूलाल, बाबूलाल ने बताया कि करीब चार वर्षों से बस्सी और आसपास के क्षेत्र में बघेरों का लगातार मूवमेंट बना हुआ है। बघेरों ने अब तक 300 से अधिक पशुओं, श्वानों तथा जंगली जानवरों, नील गायों का शिकार कर चुके है। बघेरे नोहटा व बस्सी की पहाडियों पर बनी गुफाओं में रहते है। रात के अंधेरे में गुफाओं से शिकार के लिए बाहर निकलते है। बघेरे बाहर निकलने के बाद उन्हें जो भी पहले शिकार जैसे जंगली जानवर, आवारा पशु, नील गाय मिल जाता है। तो उसका शिकार वापस गुफा में लौट जाते हैं। लेकिन बघेरों को शिकार नहीं मिलने पर वह गांव बस्सी, बारेडा, बहड, नोहटा , करीरिया, मंडालिया, रामनगर, धतूरी सहित आसपास के गांवों की ओर मूवमेंट कर लेते है।

घर के बाहर
रखते है रोशनी
बस्सी, नोहटा सहित आसपास के गांवों के लोग बघेरों के डर से रात के समय घरों के बाहर तथा बाडों में लाइट जलाकर रखते हैं, जिससे बघेरा दिख सके। बघेरे के मूमेंट क्षेत्र के गांवों के किसान अपने खेत पर रात के समय फसल की रखवाली और ङ्क्षसचाई कार्य करते समय चौकस और चौकन्ना रहना पड़ता है।

बस्सी में एक बार रखा है ङ्क्षपजरा
पिछले चार वर्षों में बघेरों का बस्सी में लगातार मूवमेंट है। बघेरे पशुओं और अन्य जानवरों का शिकार कर रहे है। लेकिन वन विभाग के चार वर्षों में एक बार बिना शिकार के ङ्क्षपजरा रखकर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली है। जिससे ग्रामीणों के समक्ष बघेरे का भय व्याप्त है।

ये बोले वनअधिकारी

क्षेत्रीय वनप्रसार अधिकारी गौरव राठी का कहना है कि बस्सी में बघेरे की सूचना पर सिरस नाका इंचार्ज रामराज मीणा गुरुवार को मौके पर पहुंचकर मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाकर एक रिपोर्ट तैयार की है। बघेरों के मूवमेंट की जानकारी के लिए उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना दी जा रही है। राठी ने यह भी बताया कि बघेरे वन क्षेत्र में रहते समूह के रूप रहते है। तथा वन क्षेत्र में पानी नहीं होने की वजह से बाहर पानी पीने आते है। इस बीच शिकार भी कर लेते है। (ए.सं.)

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