
किसानों के अरमानों पर मोयला रोग भारी
टोंक. जिले में इन दिनों खेतों से उड़ कर बाजार तक पहुंच चुके मोयला(चेपा) ने जिले में सरसों का उत्पादन गिरा दिया है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में मोयला के प्रकोप से 15 से 20 प्रतिशत सरसों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
जिला कृषि विभाग के अनुसार कुल दो लाख 85 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की गई थी, जिसमें प्रति हेक्टेयर औसतन चार से पांच हेक्टेयर सरसों का अनुमान है। ऐसे में जिले में करीब 14 लाख क्विंटल सरसों का उम्पादन होने की संभावना है। कृछ मंडियों में अगेती बुवाई वाली सरसों कट कर पहुंच चुकी है। वहीं खेतों में सरसों कटाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। ऐसे में मोयला खेतों से गांव कस्बा में उड़ रहा है।
ऐसे होता है नुकसान
मोयला दो प्रकार का होता है। एक काला पंख लिए हुए होता है व दूसरा हरे रंग का बिना पंख वाला होता है। दोनों ही प्रकार का मोयला सरसों को नुकसान पहुंचाता है। मोयला सरसों के फूल व नरम फलियों के रस को चूसता है, जिससे सरसों में क्लोरोफील की मात्रा कम हो जाने से फूलों व फलियों में हरापन कम हो जाता है। ऐसा होने पर सरसों का उत्पादन प्रभावित हो जाता है व फलियां कमजोर होने से सरसों की गुणवत्ता भी घट जाती है। ऐसे में कीट व सरसों में रोग लगने की मात्रा भी बढ़ जाती है।
ऐसे करें बचाव
किसानों को मध्य अक्टूबर में सरसों की बुवाई कर देनी चाहिए, जिससे की फरवरी प्रथम सप्ताह तक फसल कट जाए। मोयला का प्रकोप पछेती फसल में अधिकांशतया होता है। मोयला से बचने के लिए खेतों के चारों ओर पीले रंग का चिपक कार्ड लगाने चाहिए। ऐसे में मोयला खेतों को छोड़ कर कार्ड के चिपक जाता है। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार रासायनिक उपचार से भी मोयला के प्रकोप से बचा जा सकता है।
किसान मोयला का समय रहते उपचार करवा कर उत्पादन व गुणवत्ता में बढ़ोतरी कर सकते है। मोयला से अनुमानत:15 से 20 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
दिनेश बैरवा
सहायक निदेशक, कृषि(विस्तार), टोंक
Published on:
28 Feb 2022 12:47 pm

