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बस! एक झोंका और बत्ती गुल, निगम के दावोंं की खुली पोल

हवा का एक झौंके व बारिश की कुछ बूंदें बिजली निगम के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। पिछले 15 दिन के दौरान जिलेभर में यह तस्वीर सामने आ रही है।

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टोंक. गर्मी, बरसात, दीपावली आदि के दौरान बिजली सुचारू रखने के नाम पर बिजली निगम साल में कई दिन बिजली कटौती करता रहा है।

टोंक. गर्मी, बरसात, दीपावली आदि के दौरान बिजली सुचारू रखने के नाम पर बिजली निगम साल में कई दिन बिजली कटौती करता रहा है। जनता आस लगाए रहती है कि इससे ट्रिपिंग व गाहे-बगाहे बिजली गुल होने से उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन हवा का एक झौंके व बारिश की कुछ बूंदें बिजली निगम के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। पिछले 15 दिन के दौरान जिलेभर में यह तस्वीर सामने आ रही है। हल्की हवा के साथ ही जिले के गांव व शहर अंधेरे के आगोश में चले जाते हैं।

हादसों को न्योता

बिजली के तारों व ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन तारों के पास से गुजर रहे पेड़ों की टहनियां काटने व तारों को खींचने में लापरवाही बरतने का खामियाजा लोगों को अंधेरे में रहकर भुगतना पड़ता है। ढीले तार आए दिन हादसों को न्योता दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि 12 जून 2015 हुई सांस गांव की दु:खान्तिका में 20 लोगों की जान जाने के बाद भी जयपुर विद्युत वितरण निगम ने कोई सबक नहीं लिया। आज भी शहर व गांवों में लोग झूलते तारों, मकानों से सटकर गुजर रही एलटी लाइनों और भीड़ भाड़ वाले इलाकों में खुले पड़े ट्रांसफॉर्मरों में प्रवाहित करंट के साए के बीच रहने को मजबूर हैं।

बरसात के दौरान आए दिन मकानों में करंट दौडऩे लगता है। खम्भों में उतरने वाले करंट से मवेशी अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। इसके बावजूद निगम अभियंता सुध लेने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।

जल रहा धान

खेतों से गुजर रहे बिजली के तारों से निकलने वाली चिंगारियां प्रत्येक वर्ष किसानों के अरमानों पर भारी पड़ रही है। तारों में होने वाले स्पार्किंग से खेतों में पड़े धान व भूसे में आग लगने की घटनाओं पर लगाम नहीं लग रही। गत दो माह में ही दर्जनभर से अधिक स्थानों पर बाड़ों में आग लग गई।

अलीगढ़ .निगम की लापरवाही समझें या बजट का दुरुपयोग। हर बार रिमझिम बरसात या अंधड़ में बिजली गुल हो जाती है। बीते दिनों आए अंधड़ के चलते वार्ड एक में बिजली का खम्भा रास्ते में गिर गया। इसमें तीन दिन तक करंट प्रवाह होता रहा। घटना की सूचना निगम को देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।

मेहंदवास में गत दिनों आए अंधड़ के बाद तीन दिन बिजली गुल रही। इसके बाद अभी तक भी लाइनों में ट्रिपिंग जारी है। थ्री फेज बिजली आपूर्ति शुरू करते ही लाइनों में फाल्ट आने की सिलसिला शुरू हो जाता है। ये समस्या हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा हवा चलते ही कई घंटे बिजली गुल हो जाती है।

शहर के पास वजीरपुरा गांव में 10 दिन पहले आए अंधड़ के बाद से कई मकानों में बिजली गुल है। चैन से लोग सो नहीं पा रहे। मोबाइल ठप हैं। उपभोक्ता शिकायत कर थक चुके। इसके बावजूद बिजली सुचारू नहीं हो पाई। तालिबपुरा में खम्भों से तार टूटकर नीचे पड़े हैं। इससे गांव में बिजली आपूर्ति बाधित है।

क्षेत्र के खरोई गांव में ढीले तारों के चलते बाड़े में आग लगने से चारे की चार ट्रॉली जलकर राख हो गई। पुलिस के अनुसार आग खरोई गांव में लोडक्या पुत्र हरनाथ मीना के बाड़े में लगी। लोगों ने दमकल मंगाकर आग पर जैसे-तैसे काबू पाया। उधर बिजली निगम के अभियन्ता हादसे से बेखबर रहे।

लाइनों में ट्रिपिंग से गांवों में अधिक परेशानी होती है। कई दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से विद्यार्थियोंं की पढ़ाई भी बाधित रहती है।

निजाम मोहम्मद, हसनपुरा

गर्मियों की शुरुआत होते ही सालभर तक चलने वाली मरम्मत की पोल एक मिनट में खुल जाती है। इससे जलापूर्ति बाधित हो जाती है।

रमेश चौधरी, भीलवास्या

मामूली हवा चलते ही बिजली गुल हो जाना आम है। अगर हवा तेज चली तो गांव-ढाणियां की बिजली कई दिनों तक नहीं आती।

नोरतन सैनी,

रखरखाव में महज लीपापोती किए जाने से अंधड़ व बारिश में निगम की पोल खुलती है। जबकि आए दिन मरम्मत के नाम पर बिजली कटौती की जाती है।

लोकेश यादव, टोंक

निगम की ओर से रखरखाव पर पूरा ध्यान दिया जाता है। इसके बावजूद अंधड़ से लाइनें क्षतिग्रस्त होने की समस्या सामने आती है। अब इसे ठीक करने में समय तो लगता ही है।

डी. सी. अग्रवाल, अधीक्षण अभियन्ता टोंक।झोपडिय़ां

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