
विशेषज्ञ नहीं होने से रैफर अस्पताल बना पीपलू सीएचसी
पीपलू (रा.क.). उपखंड मुख्यालय स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र को 1995 में सरकार ने सीएचसी में क्रमोन्नत किया था। वहीं इसके बाद करीब एक करोड़ की अधिक लागत से चिकित्सालय भवन का विस्तार किया गया, लेकिन विभागीय व जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की उपेक्षा के चलते आज तक इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा हैं। यह सीएचसी दूसरों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की बजाय खुद ही बीमार सी नजर आती हैं। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं वहीं स्टॉफ की कमी से चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ व स्टॉफ की कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीपलू में स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी से महिला मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वर्तमान में सीएचसी में कनिष्ठ विशेषज्ञ स्त्री रोग का एक पद स्वीकृत हैं, जो कि 7 दिसंबर 2018 से रिक्त हैं। पंचायत समिति क्षेत्र की करीब 40 हजार से अधिक महिलाओं की आबादी होने के बावजूद भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है।
महिला मरीजों को करीब डेढ़ वर्ष से अधिक समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीएचसी पर प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीजों का आउटडोर होने के साथ ही सौ महिला मरीज प्रतिदिन अपना उपचार कराने के लिए पहुंचती है। महिला डॉक्टर नहीं होने के कारण इन महिलाओं को टोंक, निवाई, जयपुर जाना पड़ता है।
इससे समय के साथ-साथ धन का भी दुरुपयोग हो रहा है। प्रसव के समय महिला प्रसूता विशेषज्ञ नहीं होने के कारण क्षेत्र की महिलाएं ज्यादातर टोंक जाती हैं। वहीं पीपलू सीएचसी से भी प्रसूताओं को थोड़ी सा भी क्रिटिकल होने की स्थिति में टोंक के लिए रैफर कर दिया जाता हैं।
वार्ड में नर्सिंग स्टॉफ की कमी, एक भी कर्मी छुट्टी पर तो होती हैं परेशानी
अस्पताल में वार्ड में 5 नर्सिंग स्टॉफ हैं। इनमें से एक मेल नर्स द्वितीय को स्टोर प्रभारी बनाया हुआ हैं। वहीं अन्य 4 में से एक भी मेल नर्स द्वितीय जिस दिन छुट्टी पर रहता हैं उस दिन परेशानी होती हैं। क्योंकि 3 शिफ्ट में एक-एक की ड्यूटी लगती हैं। इनमें एक ही महिला मेल नर्स हैं, जिस वक्त वह ड्यूटी पर हो तथा प्रसूता केस होता हैं तो वह वहां व्यस्त होने पर वार्ड में मरीज परेशान होते रहते हैं।
यह प्रमुख पद हैं रिक्त
चिकित्सालय में कनिष्ठ विशेषज्ञ स्त्री रोग का 1 पद स्वीकृत हैं जो रिक्त हैं। नर्स ग्रेड प्रथम के स्वीकृत 2 में से 2, प्रसाविका 1 में से 1, वार्ड ब्वाय के 7 में से 4 पद रिक्त पड़े हुए हैं। इनमें से कई पद तो वर्षों से रिक्त ही पड़े हैं। रिक्त पदों की वजह से चिकित्सालय में आने वाले रोगियों को सरकार की मंशा के मुताबिक समुचित चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है।
पीपलू सामुदायिक चिकित्सालय में महिला विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं होने से प्रसव पीडि़त ज्यादातर महिलाओं को टोंक ले जाना पड़ता है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के गरीब परिवारों की महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कल्पना जांगिड़, आशा
सहयोगिनी, पीपलू
विशेषज्ञ नहीं होने के चलते प्रसव पीडि़ता व अन्य बीमारी को बताने में महिलाएं शर्मिंदगी महसूस करती है। पुरुष डॉक्टर को पूरी बात नहीं बता पाती है। महिलाओं को टोंक व जयपुर जाकर दिखाना पड़ता हैं। क्रिटिकल मामलों में परिजनों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सोनू साहू, वार्ड पंच, पीपलू
पीपलू सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त हैं। वहीं नर्सिंग स्टॉफ में भी पद रिक्त हैं। उपखंड मुख्यालय होने की वजह से स्त्री रोग विशेषज्ञ का होना बहुत आवश्यक हैं। इस पद को भरे जाने के संबंध में हाल ही में क्षेत्रीय विधायक सहित विभागीय उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवाया हैं। गंभीर स्थिति में महिला प्रसूताओं को रैफर करना पड़ता हैं।
डॉ. रामअवतार माली, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सीएचसी पीपलू
Published on:
05 Aug 2020 08:03 pm
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