देश-विदेश में सुनहरी कोठी का नाम, ढूंढने में पर्यटक हो रहे हैं परेशान
ऐतिहासिक सुनहरी कोठी को देखने आ रहे हैं देशभर से लोग
शहर में नहीं लगे हैं बोर्ड
जलालुद्दीन खान
टोंक. नजरबाग स्थित विश्व विख्यात सुनहरी कोठी को देखने के लिए तो देश के विभिन्न प्रदेशों से लोग आ रहे हैं, लेकिन उन्हें सुनहरी कोठी तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल इंटरनेट पर टोंक के नाम से सर्च करने पर सुनहरी कोठी दिखाई देती है।
ऐसे में लोग उसे देखने के लिए आ तो रहे हैं, लेकिन शहर के समीप हाइवे पर आने के बाद उन्हें कोठी तक पहुंचने में पूछताछ का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर में एक भी स्थान पर सुनहरी कोठी को लेकर कोई बोर्ड नहीं लगा है। वहीं सुनहरी कोठी कहां यह भी शहर में किसी स्थान पर अंकित नहीं है।
जब कोठी के सामने व्यक्ति पहुंचता है तो उसे वहां लगे पुरातत्व विभाग के बोर्ड को देखकर अंदाजा लगाना पड़ता है। यह बोर्ड नहीं हो तो यह कोई सामान्य ही नजर आए।
औसत 15 आ रहे हैं
सुनहरी कोठी एक दशक पहले जिर्णशीर्ण होने पर बंद कर दी गई थी। फिर पुरातत्व विभाग को डेढ़ करोड़ रुपए का बजट दिया गया था। इस राशि से विभाग की ओर से कोठी की चारदीवार को ऊंचाकर कर गार्डन बनाया गया है। वहीं गार्डन में फुलवारी व पानी के फंव्वारे बनवाए गए हैं।
यह है सुनहरी कोठी की खास बात
सुनहरी कोठी का निर्माण पूर्व टोंक रियासत के प्रथम नवाब मोहम्मद अमीर खां उर्फ अमीरुद्दोला खां ने 1824 में कराया था। बाद के नवाब इब्राहिम अली खां ने कोठी में सोने-चांदी की नक्काशी कराई।
एक जीना (सीढिय़ां) तथा छोटे-बड़े दस दरवाजे वाली कोठी के दरवाजों को रंगीन कांच पर सुनहरी काम के साथ इस खूबी से बनाया गया कि ढलते सूरज की रोशनी महल में प्रवेश कर प्रतिदिन इन्द्रधनुष बनाती थी और पूरा महल रोशनी से नहा उठता था।
कोठी की दीवार एवं छतों को भी सोने के पानी से बने बेलबूटे, फूल, गुलदस्ते अलग ही छटा बिखेरते प्रतीत होते हैं। महल के एक हिस्से की भीतरी दीवारों पर जड़े छह शीशे पूरी कोठी का नजारा एक ही कोण से दिखाने में सक्षम है। जहां ये शीशे लगे हुए हैं, उस हिस्से को शीश महल नाम से जाना जाता था।
कम ही संख्या में आ रह हैं पर्यटक
जिले में यूं तो पयर्टन की असीम सम्भावनाएं हैं, लेकिन फिलहाल यहां पयर्टकों की संख्या काफी कम है। यहां नियुक्त कर्मचारी के मुताबिक हर महीने महज १५ से २० लोग ही आ रहे हैं। इनमें दिल्ली, हरियाणा समेत राजस्थान के विभिन्न जिलों के लोग शामिल है।
हाइवे पर लगे बोर्ड
प्रशासन को चाहिए कि शहर की ऐतिहासिक व पर्यटन स्थलों का उल्लेख बोर्ड के माध्यम से शहर में प्रवेश करने वाले हाइवे तथा मुख्य मार्गों पर किया जाए। छावनी बायपास पर गेट तो लगा है, लेकिन वह शहर की जानकारी कम विज्ञापन का काम अधिक कर रहा है।
शहर से गुजर रहे हाइवे पर बोर्ड पर राजनेताओं ने अपने पोस्टर चिपका दिए हैं। इससे गेट लगाने का उद्देश्य नजर नहीं आ रहा है। जबकि प्रशासन को चाहिए कि वह सुनहरी कोठी समेत अन्य पर्यटन स्थलों को नेट के माध्यम से प्रचारित करे। साथ ही हाइवे पर इनका उल्लेख करे। तब जाकर यहां प्रदेश व देश के पर्यटक आएंगे।
रजिस्टर में लिखते हैं नाम
सुनहरी कोठी में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम, मोबाइल नम्बर व शहर का नाम लिखा जाता है। सुबह से शाम तक इसे खोला जाता है।
लोकेशन
नजर बाग, टोंक
इतिहास
वर्ष १८२४ में टोंक रियासत के प्रथम नवाब इब्राहिम खां ने बनवाई
वर्तमान
कोठी का जिर्णाद्धार किया है, लेकिन दूसरी मंजिल पर सोने चांदी के काम व अन्य नक्काशी का काम बाकी है।
जयपुर से दूरी १०० किलोमीटर
सवाईमाधोपुर से दूरी ७६ किलोमीटर
कोटा से १५० किलोमीटर