
कला से बढ़ाया क्षेत्र का मान, महात्मा गांधी की थ्रीडी पेंटिंग बनी आकर्षण का केन्द्र
निवाई. गांधी एक विचार हैं और वक्त की जरूरत हैं, सम्मान और एक गति है।उनका कहना है कि आज गांधी की बहुत जरुरत है। यह कहना है वनस्थली विद्यापीठ के चित्रकला विभाग एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अन्नपूर्णा शुक्ला का। उनके द्वारा बनाए गए चित्र त्री आयामी गत्यात्मकता (थ्रीडी)की लम्बाई 11 फीट और चौड़ाई 6 फीट की है। यह ऑयल कलर से कैनवास पर बनाया गया है। संभवत: यह महात्मा गांधी की सबसे थ्रीडी पेंटिंग है।
गत वर्ष अजमेर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी पेंटिंग का प्रदर्शन किया गया था। वहीं इसके अलावा दिल्ली व लखनऊ में भी इसका प्रदर्शन किया जा चुका है। डॉ अन्नपूर्णा ने गांधी को एक माध्यम न बनाकर अलग-अलग माध्यमों में कई रूपाकारों में व्यक्त किया है। जैसे लिखने वाली सामान्य चॉक पर बापू को उकेरा गया है, जिसका साइज 2 इंच है। इसी तरह पेंसिल की नोक पर खड़े हुए बापू को बहुत बारीकी से उकेरा गया है। इसका साइज एक इंच है।
इसके डॉ. शुक्ला ने क्ले, कागज की लुगदी, जूट, टाट, कैनवास आदि से भी गांधी की मूर्ति बनाई है। उनका कहना है कि गांधी को जीवन उतार विश्व को अहिंसा पर चलने का संदेश देना मात्र ही उद्देश्य है। डॉ.शुक्ला द्वारा बनाई गई पेंटिंग व कलाकृतियों को देश विदेश के कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। कई लेख देश की और विदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है। अन्र्तराष्ट्रीय सद्भाव सम्मान के साथ अन्य राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। चित्रों की एकल और सामूहिक प्रदर्शनी भी देश विदेश में हो चुकी हैं।
Published on:
02 Oct 2020 06:14 pm
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