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कला एवं संस्कृति को जीवित रखे हैं जनजातियां

72 वां घुमन्तू विमुक्ति आजादी दिवस मनाया: विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों का इतिहासटोंक. गांधी पार्क में विमुक्ति दिवस को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें घुमंतू जातियों में शामिल बागरिया, बावरिया, सांसी, सांटिया, बंजारा, कंजर, मोगिया, कालबेलिया, गाडिय़ा लोहार, भोपा, नाथ, सपेरा, नट आदि 54 जाति के महिला-पुरुष शामिल हुए।

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टोंक

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Jalaluddin Khan

Aug 31, 2023

कला एवं संस्कृति को जीवित रखे हैं जनजातियां

कला एवं संस्कृति को जीवित रखे हैं जनजातियां

कला एवं संस्कृति को जीवित रखे हैं जनजातियां
72 वां घुमन्तू विमुक्ति आजादी दिवस मनाया: विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों का इतिहास
टोंक. गांधी पार्क में विमुक्ति दिवस को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें घुमंतू जातियों में शामिल बागरिया, बावरिया, सांसी, सांटिया, बंजारा, कंजर, मोगिया, कालबेलिया, गाडिय़ा लोहार, भोपा, नाथ, सपेरा, नट आदि 54 जाति के महिला-पुरुष शामिल हुए।


इसमें भारत जोड़ो मिशन सोसायटी अध्यक्ष अनीष कुमार नाडार एवं घुमंतू जाति स्वाभिमान जागरण सभा एवं शांति मार्च के संयोजक अकबर खान के नेतृत्व में गांधी पार्क से रैली निकाली गई। बाद में मुख्यमंत्री के नाम विभिन्न मांगों को लेकर अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. सूरज ङ्क्षसह नेगी को ज्ञापन सौंपा।


अकबर ने सभा में कहा की भारत जोड़ो मिशन सोसायटी के नेतृत्व में पिछले दो महीने से नशा मुक्ति एवं शिक्षा ग्रहणकरने के प्रति घुमंतु जातियों के बीच में जागरण अभियान चलाया जा रहा है। घुमंतू जाति के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। अनीष कुमार ने कहा की घुमंतू समाज के लोग विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उन्हें शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। इस दौरान महावीर, रामनारायण, गोगा, रमेश, सीताराम, सरजू, गंगाराम, महावीर, किशन, नाथी, रतन, प्रधान, कैलाश, सीताराम आदि शामिल थे।


घुमंतू सांझा मंच टोंक व एक्शन एड एसोशिएसन की ओर कलंदर बस्ती, बहीर में 31 अगस्त को घुमन्तू विमुक्ति दिवस समारोह हुआ एक्शन एड एसोसिएशन स्टेट मैनेजर सीओन कांगोरी ने विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों का इतिहास बताते हुए कहा कि देश में अलग-अलग समय पर अलग-अलग आक्रमणकारियों का शासन रहा, लेकिन इन जनजातियों ने कभी किसी के सामने समर्पण नहीं किया।


1871 में अग्रेजों ने घुमंतू जनजातियों पर क्रिमिनल ट्राइब एक्ट लगाकर कमजोर करने का काम किया। उसके बाद भी ये जनजतियां अपनी कला और संस्कृति से जुड़े रहे। ये जनजातियां भी अपने पहनाए अपनी भाषा को जीवित रखे हुए है। इस अवसर पर सहायक निदेशक बाल अधिकारिता नवल खान ने घुमंतू व अर्धघुमंतू जनजातियों के लिए चल रही विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

परम्पारिक खेलों का हुआ आयोजन
समारोह में पारम्पारिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया । इसमें 70 वर्षीय जुबैदा ने जुए के दुष्परिणमों को लोक गीत के माध्यम से बताया। जमील और आफताब ने भालू का, रफीक ने जादू का खेल (हाथ की सफाई) दिखाकर आजादी दिवस मनाया। कलंदर बस्ती में रहने वाली बच्चियों को स्टेट ओपन से 10 वीं और 12 वीं परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर बेटी ङ्क्षजदाबाद ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। समारोह में अशरफ, मुन्ना, नूर, रज्जाक कलंदर, पप्पू भांड, गफूर आदि मौजूद थे।

190 जनजातियों को मिली आजादी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता उपनिदेशक राजेंद्र ङ्क्षसह गुर्जर ने राजस्थान मिशन 2030 के बारे में लोगों से सुझाव लिए। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नितेश जैन ने अल्पसंख्यक बच्चों के लिए शुरू किए गए आवासीय विद्यालय के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इस बस्ती से 12 बच्चों ने विद्यालय में प्रवेश लिया है। नूर मोहम्मद कैलन्दर ने विमुक्ति दिवस पर जानकारी देते बताया कि 1947 को भारत तो आजाद हो गया, लेकिन इसकी 190 जनजातियों के करोड़ों नागरिकों को पांच साल बाद 31 अगस्त, 1952 को असली आजादी मिली।

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