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विश्व पर्यटन दिवस : हाथी भाटा पर न पानी है ना छाया, कोई कैसे आए

खेड़ा गांव के समीप राष्ट्रीय राज मार्ग 116 से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर स्थित हाथीभाटा पर्यटन स्थल राजनैतिक, प्रशासनिक, पर्यटन व पुरातात्विक विभाग की अनदेखी का शिकार बन कर विकास को आज भी तरसता नजर आ रहा है।

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Hathibhata Tourist Places

बनेठा के गोठड़ा ग्राम पंचायत के हाथी भाटा स्थल पर पाषाण से निर्मित हाथी।

बनेठा. क्षेत्र के गोठड़ा ग्राम पंचायत में खेड़ा गांव के समीप राष्ट्रीय राज मार्ग 116 से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर स्थित हाथीभाटा पर्यटन स्थल Hathibhata Tourist Places राजनैतिक, प्रशासनिक, पर्यटन व पुरातात्विक विभाग Tourism and Archaeological Department की अनदेखी का शिकार Unseen victim बन कर विकास को आज भी तरसता नजर आ रहा है।

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यहां तत्कालिन शिल्पियों Immediate craftsmen ने पहाड़ी को तराश कर विशालकाय हाथी खड़ी मुद्रा Giant elephant standing pose में निर्मित किया था, जो आज भी दूर से सजीव प्रतीत होता है।

साथ ही इसके 22 बीघा जमीन पर कई वर्षों पूर्व जिला प्रशासन ने चारदीवारी Administration boundary wall बनाई थी, लेकिन अब मुख्य द्वार एवं दीवारे क्षतिग्रस्त Walls damaged होने से इस स्थल की सुरक्षा नहीं No site security होने से किए गए वृक्षारोपण नष्ट होने के कगार पर है, जिससे इसके आसपास की सुनहरी प्राकृतिक छटा मैदान पहाडिय़ां पर्यटकों को लुभाने में अभी तक कारगर साबित नहीं हो पा रही है।

शिवालय- विशालकाय हाथी Giant elephant के ठीक सामने 500 मीटर की दूरी पर पहाड़ी के शिखर पर शिवालय स्थित है। जिसमें स्थित शिवलिंग के 90 डिग्री पर हाथी स्थित होने पर श्रद्वालु इसे गणेश प्रतिमा मान कर यहां पूजा-अर्चना करने आते है।

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सौन्दर्यकरण का अभाव
इस पर्यटन स्थल पर जिला प्रशासन, पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों के द्वारा कई बार इस स्थल का अवलोकन करने के बाद भी स्थल का सौन्दर्यकरण नहीं हो पा रहा है। जानकारी अनुसार जिला प्रशासन पुरातत्व व पर्यटन विभाग की विकास के लिए हुई बैठकों में इस स्थल का विकास व सौन्दर्यकरण का दायित्व पर्यटन विभाग को सौंपा गया है।

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जिसके तहत इसक ो विकसित करने के लिए इस स्थान पर पौधारोपण करने, बच्चों के खेलने व कूदने के लिए झुले चकरी लगाने, धर्मशाला व रसोई का निर्माण करवाए जाने का प्रस्ताव जिला पर्यटन विकास समिति टोंक की बैठक में 8 जुलाई 2017 को तत्कालिन जिला कलेक्टर टोंक की अध्यक्षता में बीसलपुर में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया था। साथ ही विभिन्न सडक़ मार्ग पर साइन बोर्ड लगवाए जाने के निर्देश उपखण्ड अधिकारी उनियारा को दिए गए थे।

साथ ही इस स्थल पर चौकीदार नियुक्त करने के लिए राज्य पुरातत्व विभाग को पर्यटन एवं जिला कलक्टर की संयुक्त बैठक में 10 सितम्बर 2018 को प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन इस स्थल के प्रचार-प्रसार व सुरक्षा व सौन्दर्यकरण के पुख्ता कार्य नहीं होने से इस स्थल के विकास को गति नहीं मिल पायी है।

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हाथी के कान पर लेख अंकित
विशालकाय पाषाण हाथी पर कई चित्र व आकर्षक बनावट है। वहीं हाथी के दोनों कानों पर पांच पक्तियों में देव नागरी लिपी में लेख लिखे हुए है, जो अब स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे है। कई इतिहासकार व पुरातात्विक
ज्ञाता इसे मध्यकाल में निर्मित होना मान रहे है।


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