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TMKOC: कथावाचक अनिरुद्धाचार्य इस वजह से हुए दुखी, बोले- जबसे दया गई स्वाद कम हो गया है…

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य बताया है कि वो टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के बहुत बड़े शौकीन हैं।

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मुंबई

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Aug 23, 2024

Aniruddhacharya

Aniruddhacharya

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य सोशल मीडिया पर किसी न किसी वजह से छाए रहते हैं। कथावाचक के वीडियो खूब वायरल होते रहते हैं। इसी बीच अनिरुद्धाचार्य ने बताया है कि वो टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के शौकीन हैं। कथावाचक ने ये भी बताया है कि 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' की दयाबेन को शो को छोड़कर नहीं जाना चाहिए था।

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' देखना पसंद करते हैं अनिरुद्धाचार्य जी

अनिरुद्धाचार्य के कथा प्रोग्राम में एक महिला ने अपने बच्चे की शिकायत करते हुए बताया कि वो टीवी बहुत देखते हैं। इसका जवाब देते हुए कथावाचक ने पूछा कि टीवी पर बच्चे क्या देखते हैं तो महिला ने बताया कि 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा'। इस टीवी शो का नाम सुनते ही अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि वो भी टीवी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के फैन हैं। अनिरुद्ध आचार्य ने कहा, "दया चली गई बेचारी, मैं पहले कभी कभी देखा करता था जेठालाल को मगर दया जब से गई है उसका स्वाद कम हो गया है। बढ़िया है उसको देखने से मन खुश रहता है, दया जी तो चली गईं। व्यक्ति थोड़ा हंस लेते था उसको देखकर। बहुत सारी चीजें उसमें हंसने हंसाने के लिए बढ़िया है। कभी-कभी देख लेने में बुराई नहीं है। जो अच्छी चीज है उसे देख लेने में बुराई नहीं है। मैं भी कभी कभी देख लिया करता था। वैसे मेरा एक मानना है कि दया नाम की स्त्री थी जिसमें उसने बहुत पुण्य का काम किया, वैसे जेठालाल बहुत अच्छा है दया भी बहुत अच्छी है। उनका जो अभिनय था गजब का था, लाखों नहीं करोड़ों लोगों को हंसाने का काम उन्होंने किया है। गजब हंसाया, खूब हंसाते थे लोगों का आशीर्वाद लेते थे। पता नहीं दया क्यों चली गई?"

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अनिरुद्धाचार्य ने पैसों को लेकर कही बात

अनिरुद्ध आचार्य ने आगे कहा, "मैंने सुना है कुछ पैसों की वजह से गई हैं। जो चाहती थीं वो नहीं मिला, पर पैसा अपनी जगह होता है, पर अगर हम किसी को हंसाने के काम आ रहे हैं, तो ये भी सबसे बड़ा पुण्य है। दया को छोड़ना नहीं चाहिए था वो सीरियल। मैं ये कहना चाहता हूं दया से। वो रहती तो पैसा तो अपनी जगह है, पर वो खुश रहती। जिसमें मुख्य पात्र तो जेठा और दया ही हैं। सब चले जाते तो कोई फर्क नहीं पड़ता। जेठालाल तो है अभी, वो चला भी रहा है। मगर दया भी अच्छा पात्र है उसमें। कोई बात नहीं दया गयी थी सोने तो वापस आ जाए, उसको आशीर्वाद मिलेगा। सबको हंसाती थी बेचारी, बहुत अच्छा था।"अनिरुद्ध आचार्य ने आगे ये भी कहा कि जेठालाल का बबीता जी को देखना गलत था। बाकी उसमें सब अच्छा था। ऐसा तो हर पुरुष सोचेगा उसकी भी एक बबीता हो, आपका पुरुष भी ऐसा सोचने लगा तो, वो तो सीरियल था आपका पति सच में सोचने लगा तो?

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