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महफूज नहीं है गुजरात बॉर्डर से सटे राजस्थान के 49 गांव

पांच पुलिसकर्मियों के भरोसे 80 किलोमीटर का एरिया, शराब व बाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले

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महफूज नहीं है गुजरात बॉर्डर से सटे राजस्थान के 49 गांव

महफूज नहीं है गुजरात बॉर्डर से सटे राजस्थान के 49 गांव

उदयपुर. गुजरात बॉर्डर पर बसे राजस्थान के 49 गांवों की सुरक्षा खतरें में हैं। न पुलिस नफरी बराबर है और न ही संसाधन है। उदयपुर जिले के कोटड़ा व झाड़ोल क्षेत्र का करीब 80 किलोमीटर का क्षेत्र बॉर्डर से सटा हुआ है। इन गांवों की चौकसी में मात्र पांच पुलिसवाले लगे हैं। इन क्षेत्रों में दो पुलिस चौकी आती है लेकिन हालात यह है कि इनमें कार्यरत पुलिसकर्मियों के पास केवल पर्याप्त साधन नहीं है। डैया चौकी में तो केवल एक मोटरसाइकिल है। एेसे में कोई घटना की सूचना पर पुलिसकर्मी निकल जाता है तो दूसरा पुलिसकर्मी उसके आने का इंतजार करता है। हरियाणा से आने वाली शराब गुजरात में जो तस्कर ले जाते हैं वे लग्जरी गाडि़यों से फर्राटेदार निकल जाते हैं। पुलिस इनका पीछा नहीं कर पाती है। चौंकाने वाली बात है कि इन क्षेत्रों से पिछले पांच सालों में बाल तस्करी के मामले सबसे ज्यादा आए हैं। इनके बावजूद सुविधा व संसाधनों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। बॉर्डर से सटे गांवों की सुरक्षा पर राजस्थान पत्रिका की एक रिपोर्ट।

दो हेड कांस्टेबल के भरोसे 27 गांव
कोटड़ा. राजस्थान के सीमावर्ती कोटड़ा क्षेत्र से लगातार बाल मजदूरों की तस्करी के मामले सामने आने के बाद जब जमीनी स्तर पर सुरक्षा प्रबंध देखे, तो खोखले ही मिले। सीमावर्ती पुलिस चौकी का स्टाफ एवं सर्कल एरिया के हिसाब से जनसंख्या के अनुरूप पुलिस स्टाफ ही नहीं है। मामेर पुलिस चौकी में 10 ग्राम पंचायतों के 27 राजस्व गांवों की कु ल 34 हजार की आबादी है। सीमावर्ती मामेर पुलिस चौकी पर वर्तमान में 2 हैड कांस्टेबल तैनात है।

जानकारी के अनुसार मामेर चौकी पर 1 एएसआई, 1 हैड कांस्टेबल, 4 पुलिस कॉन्स्टेबल के पद स्वीकृत है। मामेर चौकी में आने वाली 10 ग्राम पंचायतों में 27 राजस्व गांव हैं। इनमें मुख्यत: महाड़ी नाल, सड़ा, राजपुर, गुरा, मेड़ी, सावन क्यारा, देहरी, वासेला, मंडवाल, मामेर, बुडिय़ा आदि गांव शामिल हैं। मामेर पुलिस चौकी से गांवों का लगभग 18 किमी तक क्षेत्र विस्तार है। जहा की कुल आबादी लगभग 34 हजार से अधिक है।

मामेर चौकी
02 हैड कांस्टेबल कार्यरत

05 साल में बाल मजदूर तस्करी के 09 मामले दर्ज
101 बाल मजदूरों को किया रेस्क्यू

05 बड़े मामले शराब तस्करी के दर्ज
27 गांवों का 18 किलोमीटर का क्षेत्र शामिल
मोटरसाइकिल से करते हैं तस्करों का पीछा

झाडोल. गुजरात बॉर्डर से सटे क्षेत्रों के गांवों में सुरक्षा के इंतजाम अधूरे हैं। यहां जो पुलिस चौकी है वहां संसाधन के नाम पर केवल एक मोटरसाइकिल हैं। अक्सर तस्कर लग्जरी गाडिय़ां लेकर शराब या अन्य मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं वहीं पुलिस के पास आधुनिक वाहन नहीं होने से पीछा करना तो बहुत दूर क्षेत्र में गश्त करना भी मुश्किल हो जाता है। जिले के झाड़ोल उपखंड क्षेत्र के पानरवा थाना क्षेत्र के गुजरात बोर्डर पर स्थित डैया पुलिस चौकी पर नफ री की कमी है। यही वजह है कि शराब परिवहन एवं अन्य प्रकार के वाहन गुजरात पहुंच रहे हैं। पानरवा थाना प्रभारी नाथुसिंह ने कहा, साधन के नाम पर सिर्फ एक मोटरसाइकिल है। स्टाफ की कमी है। स्टाफ पूरा मिले तो चौकसी पूरी हो सके । फि र भी हम उपलब्ध संसाधन में अपना शत प्रतिशत काम दे रहे हैं।

दुर्गम पहाडि़यों में पहुंचना मुश्किल
पानरवा थाना मुख्यालय से करीब 30 कि मी की दूरी पर स्थित डैया चौकी में वर्तमान मे एक हैड कांस्टेबल एवं दो कांस्टेबल ही है। यहां पर दो कांस्टेबल के पद रिक्त हैं। इस चौकी क्षेत्र में 22 गांव और 62 किलोमीटर फैलाव है। यह क्षेत्र दुर्गम पहाडिय़ों व बिखरी आबादी में होने से आना-जाना मुश्किल है। कई बार डाक सुबह ले जाने पर शाम तक तामील हो पाती है। चौकी में सिर्फ एक मोटरसाइकिल है जिसे एक कांस्टेबल काम से जाने एंव शाम तक नही आने पर दूसरे काम अटक जाते हैं।
डैया चौकी

01 हैड कांस्टेबल व दो कांस्टेबल तैनात
05 वर्ष में 45 शराब तस्करी के मामले दर्ज

05 बाल श्रमिक के मामले आए सामने
22 गांवों का 62 किलोमीटर का आता है क्षेत्र
01 मोटरसाइकिल से चल रहा काम


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