उदयपुर

पीएम केयर्स से मिले 95 वेंटिलेटर बेकार, खा रहे धूल, कोरोना वॉर में भारी कमी

- उदयपुर में केवल 217 वेंटिलेटर में से एक भी खाली नहीं

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Apr 28, 2021
पीएम केयर्स से मिले 95 वेंटिलेटर बेकार, खा रहे धूल, कोरोना वॉर में भारी कमी

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. आरएनटी मेडिकल कॉलेज को मिले पीएम केयर्स के 95 वेंटिलेटर बेकार होकर धूल धुसरित हो रहे हैं। ज्यादातर तय मात्रा में जरूरत के मुताबिक मरीजों को ऑक्सीजन नहीं दे पाते। यदि इनके भरोसे रह जाए तो मरीज तड़पकर मर सकता है। उदयपुर को मिले 95 वेंटिलेटर्स में से 24 को इंस्टॉल कर उपयोग में लाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह चिकित्सकीय दृष्टि से सही नहीं होने से किसी काम नहीं आ रहे।
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ये काम आता है वेंटिलेटर

- वेंटिलेटर मेडिकल डिवाइस है, जो संक्रमित इंसानी फेफ ड़ों के कमजोर होने पर जरूरी ऑक्सीजन से काम करने की स्थिति में बनाए रखता है। इसके गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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ये वेंटिलेटर बेकार

- आरएनटी मेडिकल कॉलेज को जो 95 वेंटिलेटर मिले हैं। मरीज को वेंटिलेटर पर रखने पर दो-तीन घंटे में ख़ुद ही बंद हो जाते हैं, कई बार ऑक्सीजन प्रेशर डाउन हो जाता है। इसमें ऑक्सीजन सेंसर नहीं हैं, इसलिए पता ही नहीं चलता कि मरीज को कितनी ऑक्सीजन मिल रही है। वेंटिलेटर कब धोखा दे जाए और मरीज को दूसरे वेंटिलेटर पर लेना पड़े। अधिकांश वेंटिलेटर इन्स्टॉल तक नहीं हुए हैं।

- मरीज गंभीर होने पर 350 से 500 एमएल तक ऑक्सीजन जरूरी है, लेकिन ये वेंटिलेटर 150 से अधिक ऑक्सीजन शरीर तक नहीं पहुंचा पाते। इसे टाइडल वॉल्यूम कहा जाता है।

- उदयपुर में इन वेंटिलेटर्स के उपयोग के लिए मेडिसीन व एनेस्थिसिया विभाग ने मना कर दिया है, क्योंकि इस पर मरीज की जान जोखिम में रहती है।
वेंटिलेटर- संख्या

- सीवी 200- 80

- एग्वा- 15

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राजस्थान को पीएम केयर्स फंड से करीब डेढ़ हजार वेंटिलेटर बीते साल मिले, जिनमें ज्यादातर में सॉफ्टवेयर, प्रेशर ड्रॉप कुछ समय बाद खुद बंद होने की शिकायतें मिली।

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किसी भी वेंटिलेटर को मानक सर्टिफिकेट नहीं

- वेंटिलेटर की गुणवत्ता परखने के लिए सर्टिफिकेट होता है, जैसे अमरीकी संस्था यूएस एफ डीए या यूरोप की संस्था यूरोपियन सर्टिफि केशन। इससे मानक तय होते हैं।

- 27 मार्च, 2020 को प्रधानमंत्री ने पीएम केयर्स फं ड बनाया। हस्तियों और औद्योगिक घरानों ने इसमें बड़ी रकम दान की।

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वर्तमान में उदयपुर में 217 वेंटिलेटर में से एक भी खाली नहीं।

एमबी- 112
जीएमसीएच-22

पीएमसीएच-15

पीम्स-15

एम्स बेड़वास-10
पारस-5

जीबीएच मधुबन-8

शर्मा, चौधरी, सनराइज, अरावली, कल्पना, सिद्धी विनायक, एसआरजी, जेजे मल्टी, कनक, सरस्वती, कर्नावटी में मिलाकर 30 वेंटिलेटर हैं।

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ये 95 वेंटिलेटर किसी काम नहीं आ रहे हैं। हमारे मेडिसीन व एनेस्थिसिया विभाग के चिकित्सकों ने इसे उपयोग में लेने के लिए मना किया है, ये मरीज को जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन सप्लाई नहीं कर पाते, ऐसे में मरीज की जान खतरे में रहती है। हमने इसे लेकर राज्य व केन्द्र सरकार को विभिन्न पत्रों के माध्यम से जानकारी दी है। अभी जरूरत में हमें इतनी संख्या में बेहतर वेंटिलेटर मिलते तो मरीजों को राहत मिलती।

डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर

Published on:
28 Apr 2021 07:03 am
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