
जंगल के बीच बसा एक गांव, बिजली पहुंची ना सड़क
मदनसिंह राणावत/झाड़ोल . ग्राम पंंचायत सैलाना का राजस्व गांव इडमाल ८०० लोगों की आबादी है। आजादी के 70 साल बाद भी गांव अंधियारे से नहीं उबर पाया है। यहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची। गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई।
सरकारी योजनाएं धरातल पर होने का दम भरने वाली सरकार और अधिकारियों के दावे इडमाल गांव में खोखले साबित होते हैं। यहां पहुंचने के लिए 7 किलोमीटर की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क बनाई गई, लेकिन सड़क पूरी नहीं बनी। पांच किलोमीटर के बाद गांव में जाने के लिए पगडण्डी ही एक सहारा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने कई मर्तबा जिला प्रशासन को हालात बताए, ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति की बैठकों में मुद्दा रखा, लेकिन यहां तक सुविधा नहीं पहुंच पाई।
वर्ष २००७ में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बारी से इडमाल सड़क बनाई। पांच किलोमीटर सड़क बनी, जबकि सड़क बारी इडमाल तक बनाना था। सड़क नहीं बनने से मुख्य सड़क घाटे तक इडमाल तक जाने का रास्ता आज भी कच्चा ही है। आज भी ग्रामीण मवेशियों पर सामान लादकर गांव में पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे आवास लाभार्थी को सामान ले जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। करीब १२० लाभार्थी को सामान ले जाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वर्ष २००७ में सात किलोमीटर सड़क बननी थी मगर 5 किलोमीटर सड़क बनी वो भी खस्ताहात हो गई है।
नहीं है जल स्रोत
इडमाल में नदी किनारे में वेरी खोदकर या नदी में बहते पानी को भरने के अलावा पेयजल का और कोई साधन नहीं है। यहां ना तो हेडपंप है और ना ही कुआ है। गर्मियों में पेयजल बंदोबस्त के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। पंचायत समिति सदस्य भंवरलाल ने कई बार प्रशासन को बताया कि इडमाल में जाने के लिए रास्ता नहीं होने से गांव तक हैण्डपम्प खोदने की मशीन नहीं पहुंच पा रही है।
चिकित्सा सुविधा नहीं
गांव जंगल के बीच बसा है, जहां चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। क्षैत्र के कोई बीमार हो जाए तो खाट या झोले में डालकर मुख्य सड़क बारी तक लाना पड़ता है। मामूली राहत के लिए यहां एक नर्सिंगकर्मी को नियुक्त कर रखा है, लेकिन वह कभी क्षेत्र में नहीं पहुंचा।
इडमाल में बिजली, पानी, चिकित्सा, सड़क एवं अन्य सुविधाओं लेकर प्रशासन को कई बार अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण बहुत परेशान है। मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है, लेकिन चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल रही।
भवंरलाल, पंस सदस्य, झाड़ोल
इडमाल में दो किलोमीटर सड़क वन विभााग में आने से नहीं बन पाई है। आगे की कार्यवाही देखकर बता पाऊंगा।
यूनूस पीरजादा, एइएन, पीडब्ल्यूडी झाड़ोल
इडमाल में समय-समय पर टीकाकरण कार्यक्रम में नर्स जरूर जाती होगी। ऐसा संभव नहीं है कि नर्स नहीं जाए। ऐसी शिकायत है तो पाबंद किया जाएगा।
डॉ. धर्मेन्द्र गरासिया, बीसीएमओ, झाड़ोल
इस क्षेत्र की समस्या की जानकारी मुझे नहीं है। ग्रामीण समस्या बताए तो मौका मुआयना करवाकर समाधान निकाला जाएगा।
पर्वत सिंह चुण्डावत, एसडीएम, झाड़ोल
Published on:
19 Sept 2019 01:22 am
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
