
उदयपुर. एक खूबसूरत मुस्कुराहट किसी का भी दिल जीत सकती है और ये मुस्कुराहट तब ही बनी रह सकती है जब आपके दांत सेहतमंद हों। दांतों की सेहत बनाए रखने के लिए डेंटिस्ट के पास समय-समय पर जाना चाहिए। दांतों की सार-संभाल को लेकर लोगों की सोच में धीरे-धीरे काफी बदलाव आया है, वहीं इनके उपचार के कई तरीके भी सामने आए हैं। एक समय था कि दंत रोगियों की संख्या गिनती की होती थी लेकिन अब सरकारी एवं निजी अस्पतालों में दांतों की जांच कराने या परामर्श लेने वालों की कतारें लगती हैं। वहीं, ट्रीटमेंट को लेकर अवेयरनेस बढ़ी है।
इसलिए मनाया जाता है डेंटिस्ट डे
राष्ट्रीय दंत चिकित्सक दिवस हर साल 6 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरूआत दंत चिकित्सकों के लिए प्रशंसा और धन्यवाद के तौर पर की गई थी। साथ ही यह दंत चिकित्सा के प्रति जागरूकता लाने का एक तरीका भी है ताकि लोग अपने दांतों की देखभाल करने के तरीके के बारे में अधिक जान सकें। यह उन लोगों को भी प्रोत्साहित करता है जो चेकअप के लिए डेंटिस्ट के पास आने से बचते हैं।
तनाव से बुरा प्रभाव
तनाव का भी दांतों की सेहत पर बुरा असर होता है। दंत चिकित्सकों का मानना है कि तनाव के चलते कई लोग मदिरा पान और धूम्रपान शुरू कर देते हैं, जिसका सीधा असर भविष्य में दांतों पर पड़ता है। खट्टे व अम्लीय तरल पदार्थों के सेवन का असर भी दातों को प्रभावित करता है इसलिए बहुत कम मात्रा में इनका सेवन करना चाहिए। डॉक्टर्स बताते हैं कि फास्ट एवं रिफाइंड फूड का उपयोग बढ़ जाने से दूध के दांत भी समय से पहले गिर जाते हैं। दातों की इन समस्या को नजरअंदाज करने पर कई तरह की बीमारियां हो सकती है। इसके लिए समय-समय पर दातों की जांच करवानी चाहिए।
ऐसे करें दांतों की देखभाल
हल्के हाथों से दिन में दो बार दांतों के ऊपर और नीचे के हिस्से की सफाई करें।
शीतल पेय, डिब्बाबंद फलों के जूस, अधिक चीनीयुक्त भोजन और अम्लीय जूस का सीमित मात्रा में ही सेवन करें।
डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार हर छह महीने या साल में एक बार दांतों की सफाई जरूर कराए, इससे मसूड़े स्वस्थ और मजबूत रहेंगे।
यदि मसूड़ों में सूजन, खून आ जाए तो दंत चिकित्सक से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
डेंटल ट्रीटमेंट के प्रति बढ़ी एक्सेप्टेंस
एमबी चिकित्सालय में डिपार्टमेंट ऑफ डेंटिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र सिंह बंसल ने बताया कि डेंटिस्ट्स के पास लोग पहले जहां जाने से घबराते थे लेकिन अब इतना जरूर फर्क पड़ा है कि ट्रिटमेंट के प्रति एक्सेप्टेंस बढ़ गई है। पहले जब उन्हें ट्रिटमेंट बताया जाता था तो लोग उसे नेगलेक्ट करते थे लेकिन अब अवेयरनेस आई है। कई तरह की लेटेस्ट टेक्नीक्स आने से भी सुविधा हो गई है। जहां पहले ट्रिटमेंट में ज्यादा समय लगता था अब कम समय में हो जाता है। एमबी चिकित्सालय में 60 से 70 मरीज प्रतिदिन आते हैं। इनमें सामान्य समस्याओं के अलावा दुर्घटना के कारण दांत व जबड़े में चोटों की समस्याओं के मरीज भी शामिल हैं। बंसल ने बताया कि लोग अगर दांतों की समस्याओं को लेकर पहले से ही जागरूक होंगे तो गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। इसी तरह डेंटिस्ट डॉ. स्मिता सिंह ने बताया कि आज के युवा अपनी खूबसूरती को लेकर कॉन्शियस हैं। खूबसूरती में दांत भी अहम हैं। ऐसे में वे दांतों की सेहत के प्रति जागरूक हुए हैं। वे क्लीनिंग, व्हाइटनिंग के अलावा जरूरत के अनुसार और भी ट्रीटमेंट लेना पसंद करते हैं, जबकि पहले गंभीर समस्या होने पर ही विजिट किया करते थे।
मजबूत दांतों के लिए ये करें
नियमित रूप से सुबह उठने के बाद और सोने से पहले ब्रश करें।
ब्रश कठोर नहीं होना चाहिए , इससे मसूड़ों को नुकसान पहुंचता है। ब्रश को जल्दी जल्दी दाएं-बाएं चलाने के बजाय नीचे से ऊपर चलाएं। मसूड़ों से दांतों पर ब्रश करें ताकि मसूड़ों की भी मालिश हो सके और रक्तसंचार बढ़ सके।
6 महीने में एक बार डेंटिस्ट के पास जरूर जाएं और दांतों की जांच कराएं।
खाना खाने के बाद मिठाई खाने के बजाय सेब, नाश्पती, गाजर, संतरे आदि का सेवन करें। ये डिटर्जेंट फ्रूट कहलाते हैं जो दांतों की सफाई करत हैं।
टूथ ब्रश को बंद डिब्बे में ना रखें, खुली जगह रखें। इस्तेमाल के बाद अच्छे से साफ पानी से धोने के बाद ही रखें।
फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट आदि दांतों को प्रभावित करने वाली और उस पर चिपकने वाली चीजें कम से कम खाएं।
Published on:
06 Mar 2019 12:19 pm
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