
सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Groundwater depletion in Rajasthan: उदयपुर। उत्तर-पश्चिम भारत में भूजल का अत्यधिक दोहन अब सिर्फ जल संकट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर धरती की संरचना पर भी साफ दिखने लगा है। एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के हिस्सों में भूजल तेजी से घटने के कारण जमीन हर साल 1.5 से 4.2 मिलीमीटर तक ऊपर उठ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया भविष्य में भूकंपीय गतिविधियों का जोखिम बढ़ा सकती है।
यह शोध राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, भारतीय मौसम विभाग और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर किया। अध्ययन में सैटेलाइट आधारित जीआरएसीई मिशन के आंकड़ों, जीपीएस माप, वर्षा रिकॉर्ड और भूजल स्तर के 20 साल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
शोध के अनुसार पिछले दो दशकों में खेती, शहरीकरण और औद्योगिक जरूरतों के लिए अत्यधिक भूजल निकासी हुई है। जब जमीन के नीचे से पानी निकलता है तो उसका भार कम हो जाता है, जिससे धरती की ऊपरी सतह ‘रीबाउंड’ करते हुए ऊपर उठने लगती है। दिल्ली, जयपुर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में लगे जीपीएस स्टेशनों ने इसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन वर्षों में बारिश कम रही, उन अवधियों में जमीन के उठने की दर अधिक रही। हालांकि हाल के कुछ वर्षों में वर्षा में मामूली बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन बढ़ती मांग के कारण भूजल की भरपाई नहीं हो सकी। खास चिंता की बात यह है कि दिल्ली-अरावली फोल्ड बेल्ट जैसे संवेदनशील भू-भाग में यह प्रक्रिया भूगर्भीय फॉल्ट्स पर दबाव कम कर सकती है, जिससे भूकंप आने की संभावना बढ़ सकती है।
अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया कि उथले कुओं में कभी-कभी पानी का स्तर स्थिर या बेहतर दिख सकता है, लेकिन गहरे एक्विफर लगातार खाली हो रहे हैं। यही कारण है कि सैटेलाइट और जीपीएस डेटा क्षेत्रीय स्तर पर गंभीर भूजल क्षरण की ओर इशारा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि भूजल प्रबंधन पर तुरंत और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जल संकट के साथ-साथ भू-भौतिकीय जोखिम भी बढ़ेंगे। उनका सुझाव है कि वर्षा जल संचयन, नियंत्रित पंपिंग और दीर्घकालिक निगरानी के बिना यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
शोध में यह स्पष्ट रूप से पाया गया है कि अरावली क्रेटन में भूजल की कमी का संबंध पृथ्वी की आंतरिक संरचना के कमजोर होने से क्षेत्र में भूकंप का खतरा बढ़ सकता है। भविष्य में अधिक निगरानी स्टेशनों की स्थापना की जानी चाहिए। साथ ही सख्त और निरंतर निगरानी भी आवश्यक है।
राजस्थान से जुड़ी हर ताज़ा खबर, सीधे आपके WhatsApp पर
जुड़ें अभी :https://bit.ly/4bg81fl
Updated on:
11 Jan 2026 09:59 am
Published on:
11 Jan 2026 09:52 am
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
