
भगवती तेली/उदयपुर. देशभर के विश्वविद्यालयों व अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में पढऩे वाले विद्यार्थियों की डिग्रियां, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट्स अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमेशा उपलब्ध रहेंगे। विद्यार्थी जब चाहे पोर्टल पर जाकर अपने दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर के शिक्षण संस्थानों में दिए जाने वाले एकेडमिक अवाड्र्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्टॉरेज करने जा रहा है। यह कार्य एनडीएमएल, नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी (एनएडी) पर होगा। इसके लिए यूजीसी को ऑथोराइज्ड बॉडी बनाया गया है।
एमएचआरडी की इस पहल को लेकर सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में डिजिटलाइजेशन बोर्ड बनाया गया है। यह बोर्ड विवि में एनएडी पर दस्तावेज अपलोड सहित विभिन्न कार्यों को डिजिटल रूप प्रदान करने का काम करेगा। बोर्ड में कॉमर्स कॉलेज के डीन प्रो. जी सोरल को कन्वीनर बनाया गया है। प्रो. एन लक्ष्मी, प्रो. हनुमान प्रसाद, प्रो. एमके जैन, डॉ. शिल्पा सेठ, डॉ. गिरीराज सिंह चौहान, डॉ. पीएस राजपुत व डॉ. एनके पारीख को सदस्य बनाया गया है। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को एनएडी पर रजिस्टे्रशन एवं दस्तावेज अपलोड करने को कहा है। एनएडी पर अब तक 150 विश्वविद्यालय रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। कर्मचारी, बैंककर्मी व विद्यार्थी स्वंय स्तर पर रजिस्टे्रशन कर दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। इसके लिए आपको आधार नम्बर से रजिस्टे्रशन करना होगा, जिसके बाद आपको ओटीपी मिलेगा। ओटीपी से वेरिफिकेशन होने के बाद यूजर आईडी व पासवर्ड मिलेगा। जिसके बाद एनरोलमेंट हो जाएगा। इसके बाद दस्तावेज अपलोड किए जा सकेंगे।
यह है नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी
एनएडी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल है। जहां अकादमिक संस्थानों की ओर से जारी शैक्षणिक पुरस्कारों के डिजिटलीकरण, स्टोरेज और सत्यापन की सुविधा मिलेगी। डिजिटल इण्डिया के तहत दस्तावेजों के डिजिटल रिकॉड्र्स रखने में सहायता होगी। एनएडी दस्तावेजों को वेरिफिकेशन करेगा, जिससे दस्तावेजों का ऑथेंटिफिकेशन भी हो सकेगा। विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेजों के खो जाने, फटने व विभिन्न स्थानों पर साथ ले जाने से छुटकारा मिलेगा। दस्तावेजों की सुरक्षा रहेगी।
Updated on:
31 Oct 2017 01:20 pm
Published on:
31 Oct 2017 01:18 pm
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