
लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोर
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. मिलावटखोर नियम-कायदों को धता बताकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिले में पिछले तीन वर्षों में 93 नमूने अनसेफ पाए गए हैं। यहां मिर्च, मावा, मिठाई, दूध, मसालों में मिलावट पाई गई। प्रदेश में करीब 1500 से अधिक मामले अनसेफ मिले हैं।
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अगस्त 2011 में फ ूड सेफ्टी कानून तो बनाया गया लेकिन एक्ट लागू होने के बाद खतरनाक मिलावट के मामलों में लगातार इजाफ ा ही हो रहा है। जिले में पिछले तीन वर्षों में जांचे गए 1900 मामलों में से आधों से ज्यादा में मिलावट व अखाद्य पदार्थ मिले हैं। पीएफ ए एक्ट के तहत कुछ केसों में सजा मिली है। सब स्टेंडर्ड व मिस ब्रांड के मामले एडीएम के यहां जाते हैं, वहां मिलावट करने वाले नाममात्र का जुर्माना देकर छूट जाते हैं। आईपीसी की धारा 272 के तहत आजीवन कारावास तक की सजा है। अनसेफ के मामले कोर्ट में ट्रायल में देरी व लचर जांच के कारण सजा तक पहुंच ही नहीं पाए।
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तो कैसे साबित हो
नए कानून में मिलावटखोरों को आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन साबित करना होगा कि मिलावटी पदार्थ से किसी की मृत्यु हुई है। इसे साबित कर पाना बहुत ही मुश्किल रहता है। दरअसल बाजार या किसी गोदाम आदि से नमूने लेकर विभाग जांच के लिए भेज देता है। जांच रिपोर्ट आने तक यह खाद्य पदार्थ न जाने कहां और किसे बेच दिया जाता है।
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यह है सजा का प्रावधान: मिस ब्रांड में 3 लाख, सब स्टेंडर्ड में 5 लाख, मिस लीडिंग में 10 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। अनसेफ मामले में एक से दस लाख रुपए व छह साल से लेकर आजीवन कारावास का प्रावधान है।
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फेक्ट फाइल- उदयपुर जिला
वर्ष- नमूने लेकर जांच- मिलावटी मामले- मिलावट प्रतिशत- सब स्टेडर्ड- अनसेफ- मिसब्रांड-नियम उल्लघंन
2017- 663- 201- 30.32-90-34-65-6
2018- 551-113-20.51-34-23-54-2
2019- 681- 190-27.90-59-36-87-8
कुल- 1895-504-26.59-183-93-206-16
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प्रदेश में मिले मामले
वर्ष- निरीक्षण- नमूने लिए- सबस्टेडर्ड-मिस ब्रांड- अनसेफ
2013-25593-6048-738-279-126
2014- 26689-6241-840-313-240
2015-25191-8735-1263-584-357
2016-17286-7284-773-658-240
2017-15062-7687-1124-616-291
2018-11952-5858-740-361-259
2019- 684- 373- 17- 13-12- जनवरी तक
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- व्यापारियों पर लगाई गई पैनल्टी- 3.85 करोड़ रुपए
- सबमिट किए गए चालान- 7272
- अदालतों की ओर से तय किए गए मामले: 2339
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- खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम प्रोहिबिशन एण्ड रेस्ट्रिक्शनस ऑन सेल्स रेगुलेशन 2011 के विनियम 2.1.1(3) में निहित प्रावधानों अनुसार घी उत्पादन के दौरान कोई भी तेल नही मिलाया जा सकता है। अन्य खाद्य तेलों में पाम ऑयल का उपयोग मिश्रण के रूप में ब्लेण्डेड वेजीटेबल ऑयल्स पर रेगुलेशन 2.2 (24)में निर्धारित मानक के अनुसार किया जा सकता है।
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अनसेफ मामले खतरनाक होते हैं। विभागीय कार्रवाई लगातार की जाती है, लेकिन जब तक कोई दोषी पुष्ट होता है तब तक कई मामलों में समय लग जाता है।
अनिल भारद्वाज, खाद्य सुरक्षा अधिकारी उदयपुर
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लैब में जो नमूने आते हैं उसकी रिपोर्ट फूड सेफ्टी ऑफिसर को भेज देते हैं, आगे की कार्रवाई वहां से ही की जाती है। सब स्टैडर्ड और मिसब्रांड के मामले एडीएम के पास जाते हैं। अनसेफ मामलों में केस दर्ज होता है।
रवि सेठी, फूड एनॉलिस्ट,
फूड सेफ्टी लैब उदयपुर
Published on:
03 Feb 2020 11:49 am
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