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अपने घर का ख्वाब अभी दस महीने और दूर

अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में फ्लैट खरीदने वालों को दस माह और करना होगा इंतजार, यूआइटी ने कब्जा सौंपने की प्रक्रिया शुरू की, पीएचइडी ने खोदे सात ट्यूबवैल, पानी पहुंचाने का काम बाकी

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अपने घर का ख्वाब अभी दस महीने और दूर

अपने घर का ख्वाब अभी दस महीने और दूर

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. शहर में सरकारी योजना में ‘अपना घर’ का सपना संजोए बैठे आवेदकों को घर शिफ्ट करने के लिए अभी दस माह का और इंतजार करना पड़ सकता है। वजह यह कि दो स्कीमों में बनकर तैयार दो हजार से ज्यादा फ्लैट्स के लिए पानी का स्थायी प्रबंध फिलहाल नहीं हुआ है। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (पीएचइडी) को पेयजल योजना का काम पूरा करने में वक्त लगेगा। हालांकि नगर विकास प्रन्यास (यूआइटी) से कब्जा लेने के बाद वैकल्पिक पेयजल प्रबंध किया जा रहा है, लेकिन डेढ़-दो सौ आवासों को ही आपूर्ति की जा सकती है।
अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत राजस्व ग्राम बेड़वास (सातोड़ी मगरी) में 406 और मेगा आवास योजना के तहत राजस्व ग्राम धोली मगरी, रकमपुरा एवं रेबारियों का गुड़ा में 1696 फ्लैट्स बनकर तैयार हैं। इनमें से 2167 फ्लैट्स का आवंटन किया जा रहा है। कब्जा सौंपने के लिए यूआइटी ने पिछले दिनों शिविर लगाकर करीब 600 फ्लैट्स मालिकों को कब्जे सौंप दिए। यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। लगभग डेढ़ हजार फ्लैट्स के कब्जे सौंपने के लिए लाभान्वितों को जरूरी दस्तावेजों के साथ बुलाकर सत्यापन करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कब्जा मिलने के बाद भी इन घरों में लोग तब तक नहीं रह सकेंगे, जब तक कि यहां के लिए पानी की सप्लाई का प्रबंध न हो जाए।

तालमेल की कमी से देरी
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि यूआइटी और पीएचइडी के बीच तालमेल की कमी के चलते पूरी तरह सुविधायुक्त फ्लैट्स उपलब्ध नहीं हो सके हैं। लाभान्वितों को घर बसाने के लिए अभी और बाट जोहनी पड़ेगी। इस साल जनवरी में घरौंदे बनकर तैयार हो चुके थे।

यह प्रक्रिया अभी बाकी
- सातोड़ी मगरी के लिए पेयजल योजना का दो करोड़ का तखमीना बनाकर पीएचइडी ने भेजा है। इसके तहत तीन ट्यूबवैल खुदाई, पाइप लाइन बिछाने, टंकी निर्माण, पम्प हाउस निर्माण, आरओ और ऑपरेटिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। केवल ट्यूबवैल खुदाई के लिए टेण्डर हुआ है। यूआइटी 55 लाख रुपए दे चुका है।
- मेगा आवास योजना में प्रस्ताव के अनुसार सात ट्यूबवैल खोदने के साथ ही पाइप लाइन, टंकी निर्माण व ऑपरेटिंग सिस्टम पर पांच करोड़ रुपए खर्च होंगे। यहां सात ट्यूबवैल खोद दिए गए हैं, जिनमें उम्मीद के मुताबिक पानी आया है। शेष काम बाकी है। डेढ़ करोड़ रुपए यूआइटी जारी कर चुका है।

इतना समय लगेगा
सूत्रों ने बताया कि योजना में जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध कराने के लिए काम करने का प्रस्ताव पीएचइडी ने मुख्यालय को भेजा है। प्रस्ताव स्वीकृति नवम्बर तक, तकनीकी मंजूरी दिसम्बर तक, जनवरी में टेण्डर और फरवरी अंत तक कार्यादेश जारी होने की उम्मीद है। उसके बाद काम पूरा होने में छह से आठ महीने लग सकते हैं।

हमें इंतजार है
पहले बताया था दिवाली पर घर का कब्जा दे देंगे, मगर हमें नहीं मिला है। किश्तें सभी जमा हो गई हैं। यूआइटी से कब्जा मिलने के बाद पानी की भी जरूरत रहेगी, जो अभी वहां नहीं है। ऐसे में घर शिफ्ट करने में देरी हो रही है।
पुष्पा प्रजापत, आवेदक, सातोड़ी मगरी आवास योजना

बजट की समस्या नहीं
योजना लागू करने में बजट की कोई समस्या नहीं है। चरणबद्ध ढंग से पैसा आएगा और काम होता रहेगा। देरी क्यों हुई, अक्टूबर से पहले क्या हुआ, इसकी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। प्रस्ताव भेज रखा है, जिसे मंजूरी मिलते ही प्रक्रियागत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
नक्षत्र सिंह चारण, अधीक्षण अभियंता, पीएचइडी

पांच महीने में सबको मिल जाएगा पानी
पेयजल योजना लागू होने में अधिकतम पांच महीने और लग सकते हैं। अभी तक जितने लोग रहने आ रहे हैं, परिसर में मौजूद ट्यूबवैल से वैकल्पिक तौर पर पानी दिया जा रहा है।
बालमुकुंद असावा, सचिव, नगर विकास प्रन्यास