22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उदयपुर

Heritage News of Mewar : मेनार में 50 लाख खर्च कर 600 वर्ष पुराने मंदिर को संवारा , अब 5 फरवरी को कलश स्थापना महोत्सव

मेनार में भव्य आयोजन को लेकर तैयारिया शुरू

Google source verification

मेनार. मेवाड़ में विरासत संरक्षण संवर्द्धन और जीर्णोद्धार की परम्‍परा सदियों पुरानी है । अपनी विरासत को संजोए रखना उनकी सार संभाल करने में आज की सरकारें पिछड़ रही है । इसी बीच मेनारवासियों ने प्राचीन धरोहर की सार संभाल और अपनी विरासत को संजोए रखने और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है । मेनार में 7 साल पूर्व ग्रामीणों ने प्राचीन विरासत महाराणा प्रताप से पूर्व समय के 600 साल पुराने ठाकुर जी मन्दिर को जर्जर होंने से बचाने का जिम्मा उठाया था जो अब जाके पूर्ण हो चुका है । कस्बे के मध्य पहाड़ी पर स्थित ठाकुर जी कृष्ण मन्दिर के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा हुआ है । अब इस मंदिर पर जीर्णोद्वार के बाद कलश स्थापना और ध्वजादंड महोत्सव की तिथि तय हो गई है। सभी ग्रामीण ठाकुर जी मंदिर के कलश स्थापना महोत्सव की तैयारियों में जुट गए है। कार्यक्रम को लेकर पंचों की ओंकारेश्वर चबूतरे पर नियमित बैठको का दौर शुरू हो चुका है । वही शाम को युवाओंकी बैठक में व्यवस्था कार्यों को लेकर निर्णय लिए जा रहे है। पंडित अम्बालाल शर्मा सराड़ी के अनुसार पूर्णाहुति पश्चात रवि पुष्य नक्षत्र योग में 5 फरवरी सुबह 10.40 से दोपहर 12.12 तक कलश, ध्वजादंड, भोग एवं महाआरती का आयोजन होगा।

हवन कुंड का निर्माण कार्य शुरू
मेनार में आयोजन को लेकर युद्धस्तर पर तैयारिया जारी है । भगवान चारभुजानाथ के शिखर मंदिर पर कलश स्थापना महोत्सव में किसी प्रकार की कोई कमी न रहे इसके लिए युवाओं के संगठन बनाकर जिम्मेदारियां दी जा रही है। ओंकारेश्वर चौक के मरमत का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है वही मधुश्याम प्रांगण में 9 कुंडीय हवन के लिए हवन कुंड का निर्माण कार्य जारी है वही परिसर में इंटरलॉकिंग कार्य करवाने की रूप रेखा बनाई जा रही है।

ये होंगे मुख्य कार्यक्रम :
28 जनवरी से 3 फरवरी : श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव , एमपी के कथावाचक रमेश वैष्णव द्वारा
1 फरवरी : जल यात्रा , मंडल प्रवेश और अग्नि प्रवेश होगा
1 फरवरी से 5 फरवरी : ओंकारेश्वर चौक परिसर में 9 कुंडिय हवन
3 फरवरी : मंदिर वास्तु हवन , मंदिर शिखर एवम् 108 कलश स्नान
5 फरवरी : कलश स्थापना , धवजादंड और भोग महाआरती

राणा लाखा के समय बना मन्दिर, 97 वर्ष लगे थे

इस मंदिर की नींव करीब 600 वर्ष पूर्व रखी गयी थी । जिसे बनाने मे 97 वर्ष लगे थे । नागर शैली में बना यह मंदिर उदयपुर स्थापना से पूर्व का है । दो सरोवरों एवं गांव के बीच ऊंची पहाड़ी पर स्थित ठाकुर जी मन्दिर को बनने में 97 साल लगे थे । 1320 के आस पास इस मंदिर निर्माण का मुहर्त कर नींव रखी गई जो 97 साल बाद जाके राणा लाखा के समय पूर्ण हुआ था । गांव के बीचों बीच बने मन्दिर हर दृष्टिकोण से सुरक्षित जगह पर है । मंदिर की बनावट देखते ही बनती है ऊंचे चबुतरे पर बना यह मंदिर क्षेत्र में सबसे ऊंचा और प्राचीन मन्दिर है ।

राणा प्रताप के समय ध्वजा चढ़ाई का उल्लेख

वही मंदिर के ध्वजा चढ़ाई का उलेख प्राचीन समय के सूरह लेख पर मिलता है जिसमे सन 1596 मे महाराणा प्रताप मन्दिर के ध्वजा चढ़ाने का जिक्र मेवाड़ी भाषा मे लिखे जर्जर अभिलेख पर मिलता है । ग्रामीणों द्वारा करीब 50 लाख रुपये तक खर्च कर इस प्राचीन धरोहर को संवारा है । मंदिर निर्माण मे खर्च हुई राशी ग्राम स्तर पर ही जनसहयोग , सामूहिक आयोजनों आदि से एकत्रित की गई है ।

इनका कहना है :
यहां मैंने 1982 में मंदिर के पास सूरह लेख पढ़ा था जिसपर मंदिर के ध्वजा चढ़ाई का उल्लेख मिलता है जिसमें सन 1596 में महाराणा प्रताप के समय मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने का जिक्र मेवाड़ी भाषा में लिखे जर्जर अभिलेख पर मिलता है । ध्वजा चढ़ाने एवं समस्त न्यात के साक्षी रहने का उलेख मिलता है । ग्रामीणों द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार गौरव की बात है ।
डॉ. श्री कृष्ण जुगनु
मेवाड़ के इतिहासकार एवं लेखक