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‘कान्हा’ चखकर भूले दूध, रोज गटक रहे ‘बलराम’, आंगनवाडिय़ों में शुरू होते ही ठप हो गई अमृत दूध योजना

सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में अमृत दूध योजना, स्कूलों में दूध पर करोड़ों खर्च, लेकिन यहां भारी लगा बजट

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Milk drink, sugar shake

amrit dudh scheme

चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर. सरकारी स्कूलों में अन्नपूर्णा दूध योजना की तर्ज पर आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए मुख्यमंत्री अमृत दुग्ध योजना शुरू की गई लेकिन एक सप्लाई के बाद ही यह ठप हो गई है। स्थिति यह है कि स्कूलों में बड़े बच्चे (बलराम) दूध गटक रहे हैैं, लेकिन आंगनवाड़ी के नन्हे मासूम (कान्हा) एक बार दूध चखकर ही रह गए। तत्कालीन राज्य सरकार के कार्यकाल के आखिरी समय में आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए यह योजना प्रदेश में लागू की गई लेकिन सरकार बदलते ही इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

एक बार चखा स्किम्ड मिल्क..
मुख्यमंत्री अमृत दुग्ध योजना के तहत वसुंधरा सरकार ने डेयरी कॉर्पोरेशन से जयपुर स्तर पर ही अनुबंध किया था कि वे प्रदेशभर में आंगनवाड़ी सेंटर पर स्किम्ड मिल्क पैकेट सप्लाई करेगा। उदयपुर में सरस डेयरी ने पहली खेप 2018 के अक्टूबर-नवम्बर माह में भेजी। यह दूध 3-6 वर्ष के बच्चों, धात्री और गर्भवती महिलाओं के लिए था, जो वितरण कर दिया गया, लेकिन इसके बाद किसी भी सेंटर पर यह स्किम्ड मिल्क पहुंचा ही नहीं।

बेकार हो गई तमाम कार्ययोजना...
इस योजना की पालना के लिए सरकार ने तमाम आंगनवाड़ी वर्कर्स, एसएल, सीडीपीओ को प्रशिक्षण भी दिया था, इसमें स्किम्ड दूध का उपयोग का तरीका, रिकार्ड संधारण और गुणवत्ता का ध्यान रखने संबंधी दिशा निर्देश दिए। एक बार मिल्क पैकेट सप्लाई भी हुए, लेकिन उसके बाद सरकार बदली और इस योजना को ग्रहण लग गया।

उदयपुर में यह है स्थिति
कुल आंगनवाड़ी- 3174

बच्चे-1 लाख के करीब


इनका कहना...

आंगनवाड़ी सेंटर्स पर स्किम्ड मिल्क की सप्लाई वसुंधरा सरकार में केवल एक बार हुई थी। इसके बाद सरकार बदल गई। करीब 11 माह से मिल्क पैकेट नहीं मिले।
राजेश कुमार, सीडीपीओ, गिवा